फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Gujarat ›   literary naxals gujarat sahitya academy targets parul khakhar poem: Gujarat Sahitya Academy chief slams poem on bodies floating in Ganga: says literary Naxals want to spread anarchy

आलोचना: गुजराती लेखिका ने लिखी गंगा में उतराते शवों पर कविता, साहित्य अकादमी ने कहा- साहित्यिक नक्सली

Sat, 19 Jun 2021 09:03 AM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Sat, 19 Jun 2021 09:03 AM IST
सार

गंगा नदी में कोरोना मरीजों के उतराते शवों को लेकर हाल ही में गुजरात की एक कवयित्री पारुल खाखर ने एक कविता लिखी। इस कविता के लिए गुजरात में तमाम लोगों ने पारुल की आलोचना की है। गुजरात साहित्य अकादमी ने पारुल को साहित्यिक नक्सली बताया है।

विज्ञापन
literary naxals gujarat sahitya academy targets parul khakhar poem: Gujarat Sahitya Academy chief slams poem on bodies floating in Ganga: says literary Naxals want to spread anarchy
पारुख खाखर - फोटो : Social Media

विस्तार

कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने देश में जमकर तबाही मचाई। इसने लाखों लोगों की जिंदगियां लील ली। स्थिति इतनी विकराल हो गई थी कि शमशान घाटों में शवों का दाह संस्कार करने के लिए लोगों को कई-कई घंटों का इंतजार करना पड़ता था। इस दौरान, गंगा में उतराते सैकड़ों शव मिले, जिन्हें लेकर सरकार की जमकर आलोचना हुई।

विज्ञापन


गंगा नदी में कोरोना मरीजों के उतराते शवों को लेकर हाल ही में गुजरात की एक कवयित्री पारुल खाखर ने एक कविता लिखी। इस कविता के लिए गुजरात में तमाम लोगों ने पारुल की आलोचना की है। गुजरात साहित्य अकादमी ने पारुल को साहित्यिक नक्सली बताया है। 
विज्ञापन


कविता को माना केंद्र के खिलाफ दुष्प्रचार 
गुजरात की कवयित्री पारुल खाखर ने हाल ही में केंद्र की आलोचना करते हुए अपनी कविता गंगा शव वाहिनी लिखी थी। इस कविता को केंद्र सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करने के हथियार के रूप में बताते हुए कहा कि तमाम लोगों ने इसका विरोध किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


साहित्य अकादमी ने कहा- लोकतंत्र पर लांछन लगाया
गुजरात में साहित्य अकादमी ने इस कविता की निंदा करते हुए पारुल खाखर को साहित्यिक नक्सली बताया। पारुल की कविता पर निशाना साधते हुए अकादमी ने कहा कि इस कविता के जरिये समाज में आराजकता फैलाने का प्रयास किया गया है। ये व्यर्थ का आक्रोश है और इससे लोकतंतत्र और समाज पर लांछन लगाने का काम किया गया है।


बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर के कहर के बीच बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश के तमाम इलाकों में गंगा नदी में शवों के उतराने की तस्वीरें सामने आईं थीं। वहीं प्रयागराज, उन्नाव और कुछ अन्य जिलों में रेत में शवों के दफनाने के मामले में उजागर हुए थे। कोविड मरीजों के साथ अमानवीयता का आरोप लगाते हुए विपक्ष ने सरकार को घेरा था। इसे लेकर देश के तमाम हिस्सों में विरोध के स्वर उठे थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed