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एमएमएमयूटी में मालवीय रिसर्च कॉन्क्लेव का हुआ उद्घाटन, देश भर के दिग्गज प्रोफेसर हुए शामिल
Sat, 22 Feb 2020 08:55 PM IST
vivek shukla
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 22 Feb 2020 08:55 PM IST
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कार्यक्रम में शामिल प्रोफेसर।
- फोटो : अमर उजाला
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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विवि के आर्यभट्ट सभागार में चार दिवसीय ‘मालवीय रिसर्च कॉन्क्लेव’ का उद्घाटन आईआईटी गुवाहाटी के पूर्व निदेशक प्रो गौतम बिस्वास और विशिष्ट अतिथि इसरो के प्रो सुरेंद्र पाल ने किया।
प्रो गौतम बिस्वास ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में भारत ने तकनीक के क्षेत्र में बहुत प्रगति की हैं। स्वतंत्र भारत के इतिहास में कई बार ऐसे मौके आए जब पश्चिमी दुनिया ने भारत पर आर्थिक और प्रौद्योगिकी प्रतिबंध लगाएं। तात्कालिक रूप से इन प्रतिबंधों से देश को नुकसान तो हुआ पर दीर्घकालिक दृष्टि से भारतीय वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों ने अपनी प्रतिभा को साबित करके दिखाया।
प्रो सुरेंद्र पाल ने कहा कि हमारे संस्थानों, छात्रों और आमजन को अपने दिमाग से यह भ्रम निकाल देना चाहिए कि भारत प्रौद्योगिकी के मामले में पिछड़ा हुआ देश हैं। हम अंतरिक्ष, विज्ञान, अणु शक्ति, रक्षा प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में दुनिया के अग्रणी देशों में शुमार हैं। अकादमिक जगत को भी यह भ्रम त्यागना होगा कि अच्छे शोध के लिए बहुत ज्यादा संसाधनों की जरूरत होती है। बल्कि कम संसाधनों में भी बहुत अच्छा और उपयोगी अनुसंधान किया जा सकता है। उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के उदाहरण से समझाया कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम तब शुरू हुआ जब हमारे पास कुछ नहीं था।
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प्रो गौतम बिस्वास ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में भारत ने तकनीक के क्षेत्र में बहुत प्रगति की हैं। स्वतंत्र भारत के इतिहास में कई बार ऐसे मौके आए जब पश्चिमी दुनिया ने भारत पर आर्थिक और प्रौद्योगिकी प्रतिबंध लगाएं। तात्कालिक रूप से इन प्रतिबंधों से देश को नुकसान तो हुआ पर दीर्घकालिक दृष्टि से भारतीय वैज्ञानिकों एवं इंजीनियरों ने अपनी प्रतिभा को साबित करके दिखाया।
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प्रो सुरेंद्र पाल ने कहा कि हमारे संस्थानों, छात्रों और आमजन को अपने दिमाग से यह भ्रम निकाल देना चाहिए कि भारत प्रौद्योगिकी के मामले में पिछड़ा हुआ देश हैं। हम अंतरिक्ष, विज्ञान, अणु शक्ति, रक्षा प्रौद्योगिकी आदि क्षेत्रों में दुनिया के अग्रणी देशों में शुमार हैं। अकादमिक जगत को भी यह भ्रम त्यागना होगा कि अच्छे शोध के लिए बहुत ज्यादा संसाधनों की जरूरत होती है। बल्कि कम संसाधनों में भी बहुत अच्छा और उपयोगी अनुसंधान किया जा सकता है। उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के उदाहरण से समझाया कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम तब शुरू हुआ जब हमारे पास कुछ नहीं था।
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तब हमारे वैज्ञानिकों ने सीमित संसाधनों में वो कर दिखाया, जो विकसित देश ही कर सकते थे। विशिष्ट अतिथि कमांडर कौशल चौधरी ने कहा कि हम साइबर युग में जी रहे हैं जिसमें हर व्यक्ति किसी न किसी तरह से इंटरनेट से जुड़ा है। इंटरनेट का उपयोग करते समय सावधानी बरतने की जरूरत है। समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो श्री निवास सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा में अनुसंधान और शिक्षण दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। शिक्षकों को दोनों में पारंगत होना चाहिए। उन्होंने शोध समागम के प्रतिभागियों से आह्वान किया कि ज्यादा से ज्यादा सीखें, नया जानें, नए लोगों से जुड़े।
इससे पूर्व मुख्य अतिथि व अन्य आमंत्रित अतिथियों ने सरस्वती और महामना के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। साथ ही छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम समन्वयक प्रो राकेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत व संचालन डॉ अभिजित मिश्र ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सह समन्वयक डॉ संजय मिश्र ने किया। इस मौके पर पूर्व प्रो. राकेश कुमार, प्रो एके शर्मा, प्रो पीके सिंह, डॉ आरके यादव, डॉ राजेश वर्मा मौजूद रहे।
इससे पूर्व मुख्य अतिथि व अन्य आमंत्रित अतिथियों ने सरस्वती और महामना के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। साथ ही छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम समन्वयक प्रो राकेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत व संचालन डॉ अभिजित मिश्र ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सह समन्वयक डॉ संजय मिश्र ने किया। इस मौके पर पूर्व प्रो. राकेश कुमार, प्रो एके शर्मा, प्रो पीके सिंह, डॉ आरके यादव, डॉ राजेश वर्मा मौजूद रहे।