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गोरखपुर: एमपी पीजी कॉलेज में मनाई गई महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि
Sun, 19 Jan 2020 09:17 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Sun, 19 Jan 2020 09:17 PM IST
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महाराणा प्रताप की पुण्य तिथि पर आयोजित संगोष्ठी।
- फोटो : अमर उजाला
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महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज जंगल धूसड़ में भारत-भारती पखवारा के तहत राष्ट्रीय सेवा योजना की ओर से महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि के अवसर पर संगोष्ठी हुई। वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के जीवन को युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताया।
मुख्य अतिथि गोरखपुर विश्वविद्यालय कार्यपरिषद सदस्य प्रमथनाथ मिश्र ने कहा कि महाराणा प्रताप यश, शौर्य और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रखर स्वरूप हैं। इतिहास के पन्नों में उनका नाम अमिट है। उनका संपूर्ण जीवन उस अक्षयवट के समान है जो युवाओं को निरंतर प्रेरित करता रहेगा। लेकिन साम्राज्यवादी एवं साम्यवादी मानसिकता के कारण भारतीय इतिहास में उन वह स्थान नहीं मिला, जो मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप के जीवन की गौरव गाथा को जानबूझकर नजरंदाज एवं विकृत कर दिया गया था। महाराणा प्रताप भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं। राष्ट्रीय स्वाभिमान पर मर मिटने वालों के प्रतिमान हैं।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार राव ने कहा कि महाराणा प्रताप और उनका जीवन भारत की पहचान है। राष्ट्र व समाज के लिए त्याग-बलिदान के पर्याय हैं। उनका जीवन दर्शन भारतीय युवाओं में भारत की सुरक्षा और संरक्षा का संकल्प पैदा करने का माद्दा रखता है। भारत के नौजवानों में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, श्रीकृष्ण से लेकर महाराणा प्रताप और शिवाजी के जीवन चरित्र को शिक्षा के पाठ्यक्रमों में स्थान देने की जरूरत है। महाराणा प्रताप की वीरता के बारे में भी तथाकथित इतिहासकार विविध प्रकार के भ्रम पैदा करने में सफल रहे। दुर्भाग्य से वर्षों तक उन्हीं विकृत इतिहास को पढ़ते-पढ़ाते रहे। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक उपस्थित थे।
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मुख्य अतिथि गोरखपुर विश्वविद्यालय कार्यपरिषद सदस्य प्रमथनाथ मिश्र ने कहा कि महाराणा प्रताप यश, शौर्य और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रखर स्वरूप हैं। इतिहास के पन्नों में उनका नाम अमिट है। उनका संपूर्ण जीवन उस अक्षयवट के समान है जो युवाओं को निरंतर प्रेरित करता रहेगा। लेकिन साम्राज्यवादी एवं साम्यवादी मानसिकता के कारण भारतीय इतिहास में उन वह स्थान नहीं मिला, जो मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप के जीवन की गौरव गाथा को जानबूझकर नजरंदाज एवं विकृत कर दिया गया था। महाराणा प्रताप भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं। राष्ट्रीय स्वाभिमान पर मर मिटने वालों के प्रतिमान हैं।
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महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार राव ने कहा कि महाराणा प्रताप और उनका जीवन भारत की पहचान है। राष्ट्र व समाज के लिए त्याग-बलिदान के पर्याय हैं। उनका जीवन दर्शन भारतीय युवाओं में भारत की सुरक्षा और संरक्षा का संकल्प पैदा करने का माद्दा रखता है। भारत के नौजवानों में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, श्रीकृष्ण से लेकर महाराणा प्रताप और शिवाजी के जीवन चरित्र को शिक्षा के पाठ्यक्रमों में स्थान देने की जरूरत है। महाराणा प्रताप की वीरता के बारे में भी तथाकथित इतिहासकार विविध प्रकार के भ्रम पैदा करने में सफल रहे। दुर्भाग्य से वर्षों तक उन्हीं विकृत इतिहास को पढ़ते-पढ़ाते रहे। इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक उपस्थित थे।
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