फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Students strike in DDU gorakhpur

गोविवि: शोध पंजीकरण निरस्त करने के निर्णय पर भड़के छात्र, धरने पर बैठे

Fri, 28 Feb 2020 09:33 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: vivek shukla Updated Fri, 28 Feb 2020 09:33 PM IST
सार

  • कुलपति को सौंपा ज्ञापन, तीन को अकादमिक कौंसिल लेगी फैसला

विज्ञापन
Students strike in DDU gorakhpur
gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर विश्वविद्यालय के पांच विभागों में शोध के लिए पंजीकृत तृतीय श्रेणी के विद्यार्थियों का मामला उलझ गया है। पंजीकरण के समय विद्यार्थियों के अंक पत्र नहीं जांचे गए। अब, जबकि मामला पकड़ में आया है तो विभागाध्यक्षों ने विद्यार्थियों का पंजीकरण निरस्त करने का निर्णय लिया है। इसके विरोध में आठ शोधार्थियों ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन के सामने धरना दिया और कुलपति को ज्ञापन सौंपा। कुलपति ने तीन मार्च को होने वाली अकादमिक कौंसिल की बैठक में मामला रखने का निर्णय लिया है।
विज्ञापन


जिन विद्यार्थियों का पंजीकरण रद्द किया गया है वे समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र, संस्कृत, राजनीति शास्त्र एवं गणित विभाग के हैं। ये सभी विद्यार्थी शुक्रवार को प्रशासनिक भवन के सामने पहुंचे और नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। इसके बाद उन्होंने कुलपति से मुलाकात की। विद्यार्थियों का कहना है कि यूजीसी की गाइड लाइन में कही नहीं है कि तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण होने वालों को शोध से वंचित किया जाए।
विज्ञापन


विश्वविद्यालय ने पंजीकरण कर शुल्क जमा कर लिया और चार महीने कक्षाएं भी करने दीं। अब साजिशन शोध से वंचित कर रहे हैं। शोध छात्र कमलेश यादव ने कहा कि विभिन्न विभागों में 50 से ज्यादा शोधार्थी हैं जो तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण हैं। कहा कि दो मार्च से क्रमिक धरना शुरू किया जाएगा। उधर, कुलपति ने दोपहर बाद डीन एडवाइजरी कमेटी बुलाकर मामले में विमर्श किया। धरना देने वालों में अनूप ईश्वर, पवन कुमार, सुरेंद्र, नागेंद्र, वाल्मीकि, सुनील पासवान, अजय यादव, पंकज यादव आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन


मामला संज्ञान में आने पर डीन एडवाइजरी कमेटी के सामने रखा गया था। कमेटी ने विश्वविद्यालय नियमावली का परीक्षण किया है जिसके बाद निर्णय लिया है कि तृतीय श्रेणी उत्तीर्ण अभ्यर्थी को शोध की अनुमति नहीं दी जा सकती है। डीन एडवाइजरी कमेटी के निर्णय को तीन मार्च को होने वाले अकादमिक कौंसिल के सामने रखा जाएगा। अगर अकादमिक कौंसिल संशोधन करती है तो उसे लागू किया जाएगा वरना डीन एडवाइजरी कमेटी का निर्णय ही मान्य होगा।  
प्रो. वीके सिंह, कुलपति, गोरखपुर विश्वविद्यालय
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed