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गोविवि में पंडित दीनदयाल की पुण्यतिथि पर आयोजित हुई विचार गोष्ठी, शिक्षकों ने रखें विचार

Tue, 11 Feb 2020 08:47 PM IST
हरीशचंद सिंह डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: हरीशचंद सिंह Updated Tue, 11 Feb 2020 08:47 PM IST
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Seminar organized on death anniversary of Pandit Deendayal in DDU gorakhpur
विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में मंचासीन व शिक्षक उपस्थित लोग। - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय स्वयंसेवक के क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य रामाशीष ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय कहते थे कि जंजीर की ताकत बढ़ानी है तो उसकी सबसे कमजोर कड़ी को मजबूत करें। इसी अवधारणा को आगे चलकर उन्होंने अंत्योदय के विचार के रूप में रखा। वह शिक्षा को समाज का मौलिक कर्तव्य मानते थे।
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रामाशीष मंगलवार को दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर गोरखपुर विश्वविद्यालय के संवाद भवन में ‘वर्तमान समय में दीनदयाल के विचारों की प्रासंगिकता’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दीनदयाल के विचारों को संकल्प के रूप में लेकर कार्य करना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मुख्य वक्ता काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय स्थित भारत अध्ययन केंद्र के आचार्य प्रो. राकेश कुमार उपाध्याय ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय ने ऐसे समय में अपना समाज दर्शन प्रस्तुत किया, जब देश साम्यवाद और पूंजीवाद के बीच डोल रहा था।
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हमारे वेद ऋषियों ने जो एकात्म मानववाद का स्वप्न देखा था, उसे दीन दयाल के विचारों ने चरितार्थ किया। विशिष्ट अतिथि लाल बहादुर शास्त्री पीजी कॉलेज चंदौली के पूर्व प्राचार्य डॉ. अनिल यादव ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय ने अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। वह कहते थे कि राजा कौन बनेगा, यह बहुमत तय करेगा। राजा क्या करेगा, वह धर्मसिद्ध होगा। दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के निदेशक प्रो. संजीत गुप्ता ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल के विचार अनंतकाल तक प्रासंगिक रहेंगे, क्योंकि उनके विचारों का केंद्र मानव है।

उनके अनुसार राजनीतिक लोकतंत्र से ज्यादा महत्वपूर्ण सामाजिक लोकतंत्र है। अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वीके सिंह ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय के विचार हमें अब भी प्रेरित करते हैं। आज की युवा पीढ़ी के लिए उनके विचार अनुकरणीय हैं। संचालन डॉ. रंजन लता, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. महबूब हसन ने तथा डॉ. शैलश सिंह ने अतिथियों से परिचय कराया। इस अवसर पर प्रो. विनोद सिंह, प्रो. डीएन यादव, प्रो. मुरली मनोहर पाठक, प्रो. जितेंद्र मिश्र, प्रो. चंद्रशेखर, डॉ. सर्वेश कुमार, डॉ. पवन कुमार, डॉ. मीतू सिंह, डॉ. अमित उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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