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एमपीपीजी कॉलेज में शोध व्याख्यान प्रतियोगिता, सर्वेश्वर कांत प्रथम व विमलेंदु को दूसरा स्थान
Wed, 15 Jan 2020 06:57 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Wed, 15 Jan 2020 06:57 PM IST
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शोध व्याख्यान प्रतियोगिता में व्याख्यान देते प्रतिभागी व निर्णायक डॉ. निलिमा दूबे।
- फोटो : अमर उजाला
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महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज, जंगल धूसड़ में भारत-भारती पखवारा के तहत अंग्रेजी विभाग की ओर से बुधवार को शोध व्याख्यान प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। 43 विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर बेबाकी से अपने विचार रखे।
प्रतियोगिता में बीए द्वितीय वर्ष के सर्वेश्वर कांत चंद्रा को प्रथम स्थान बीए प्रथम वर्ष के विमलेंदु उपाध्याय को द्वितीय स्थान एवं बीए द्वितीय वर्ष की कौशिकी एवं दिप्ती चतुर्वेदी को तृतीय स्थान प्राप्त किया। निर्णायक के रूप में भगवान दत्त महिला महाविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. निलिमा दूबे रहीं। डॉ. कविता मन्ध्यान ने कहा कि हमें बहती हुई नदी से सीखना चाहिए।
जिस प्रकार नदी तेजी के साथ अपने प्रारंभिक स्थिति से बढ़ना शुरू करती है और अपनी मंजिल को प्राप्त करने के लिए उसी गति से बहती रहती है। कुछ बाधाओं के आने पर उसकी गति अवश्य कम हो जाए लेकिन वह कभी भी रुकती नही है। सफल होने के लिए हमें लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना है। डॉ. निलिमा दूबे ने विजयी प्रतिभागियों को बधाई दी तथा उन्हें पुरस्कृत किया। इस दौरान महाविद्यालय के शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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प्रतियोगिता में बीए द्वितीय वर्ष के सर्वेश्वर कांत चंद्रा को प्रथम स्थान बीए प्रथम वर्ष के विमलेंदु उपाध्याय को द्वितीय स्थान एवं बीए द्वितीय वर्ष की कौशिकी एवं दिप्ती चतुर्वेदी को तृतीय स्थान प्राप्त किया। निर्णायक के रूप में भगवान दत्त महिला महाविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. निलिमा दूबे रहीं। डॉ. कविता मन्ध्यान ने कहा कि हमें बहती हुई नदी से सीखना चाहिए।
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जिस प्रकार नदी तेजी के साथ अपने प्रारंभिक स्थिति से बढ़ना शुरू करती है और अपनी मंजिल को प्राप्त करने के लिए उसी गति से बहती रहती है। कुछ बाधाओं के आने पर उसकी गति अवश्य कम हो जाए लेकिन वह कभी भी रुकती नही है। सफल होने के लिए हमें लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहना है। डॉ. निलिमा दूबे ने विजयी प्रतिभागियों को बधाई दी तथा उन्हें पुरस्कृत किया। इस दौरान महाविद्यालय के शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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