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एमएमएमयूटी में ‘मालवीय रिसर्च कॉन्क्लेव’ का दूसरा दिन, विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार
Sun, 23 Feb 2020 08:21 PM IST
vivek shukla
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 23 Feb 2020 08:21 PM IST
सार
- मालवीय जी के जीवन दर्शन पर गंभीर शोध की जरूरत : प्रो. विश्वनाथ
- एमएमएमयूटी में ‘मालवीय रिसर्च कॉन्क्लेव’ के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने रखे विचार
- शोध ऐसा हो जो जनता की समझ में भी आए : प्रो आरपी सिंह
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) में आयोजित चौथे ‘मालवीय रिसर्च कॉन्क्लेव’ के दूसरे दिन देश भर से आए विषय विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए।
पहले सत्र में बीएचयू के प्रो. विश्वनाथ पांडेय ने ‘मालवीय दर्शन का राष्ट्रनिर्माण में योगदान’ विषय पर बोलते हुए कहा कि मदन मोहन मालवीय के जीवन दर्शन को अकादमिक जगत ने उचित महत्व नहीं दिया। भारत के जिन राजनीतिक विचारकों ने देश को सबसे ज्यादा प्रभावित किया, उनमें मालवीय जी अग्रणी थे। उनके जीवन दर्शन, विचारों पर गंभीर शोध की आवश्यकता है।
दूसरे सत्र में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रो. आरपी सिंह ने ‘शोध प्रविधि और शोध लेखन’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि शोध को आमजन तक पहुंचाने के लिए अच्छी लेखन क्षमता होना आवश्यक है। शोधार्थियों के लिए यह नितांत आवश्यक है कि वे आम जनता को अपनी बात समझा सकें। आईबीएम बंगलूरू के डॉ. अतुल कुमार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग को भविष्य की टेक्नोलॉजी बताया।
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पहले सत्र में बीएचयू के प्रो. विश्वनाथ पांडेय ने ‘मालवीय दर्शन का राष्ट्रनिर्माण में योगदान’ विषय पर बोलते हुए कहा कि मदन मोहन मालवीय के जीवन दर्शन को अकादमिक जगत ने उचित महत्व नहीं दिया। भारत के जिन राजनीतिक विचारकों ने देश को सबसे ज्यादा प्रभावित किया, उनमें मालवीय जी अग्रणी थे। उनके जीवन दर्शन, विचारों पर गंभीर शोध की आवश्यकता है।
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दूसरे सत्र में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रो. आरपी सिंह ने ‘शोध प्रविधि और शोध लेखन’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि शोध को आमजन तक पहुंचाने के लिए अच्छी लेखन क्षमता होना आवश्यक है। शोधार्थियों के लिए यह नितांत आवश्यक है कि वे आम जनता को अपनी बात समझा सकें। आईबीएम बंगलूरू के डॉ. अतुल कुमार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग को भविष्य की टेक्नोलॉजी बताया।
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आईआईटी रुड़की के प्रो. पीके गर्ग ने जिओइंफार्मेटिक्स आधारित नगर नियोजन के बारे में विस्तार से समझाया। राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान नागपुर से आए प्रो. पवन कुमार लाभसेत्वर ने जल सुरक्षा और जल संरक्षण सहित पानी को फ्लोराइडमुक्त करने के उपायों पर चर्चा की।
आईआईएससी बंगलूरू के प्रो. के गोपकुमार ने पॉवर इलेक्ट्रॉनिक्स विशेषकर पीडब्लूएम कन्वर्टर तकनीक, आईआईटी कानपुर के प्रो. निश्चल वर्मा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप लर्निंग का इंजीनियरिंग अनुसंधान में अनुप्रयोग पर चर्चा की। आईआईटी मुंबई के प्रो. एसवी कुलकर्णी ने विद्युत पारेषण में स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकी की भूमिका और नवीकरणीय ऊर्जा, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के डॉ. अनुज शर्मा ने प्लास्मोनिक्स प्रौद्योगिकी और ऑप्टिकल उपकरणों में उसके अनुप्रयोग की जानकारी दी।
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शोध व ट्रेनिंग पर हुई पोस्टर प्रतियोगिता
गोरखपुर। एमएमयूटी में शाम को सभी विभागों में पीएचडी, एमटेक, एमबीए, एमसीए के छात्रों के शोध व ट्रेनिंग पर आधारित पोस्टर प्रतियोगिता हुई। विशेषज्ञों ने विभागवार पोस्टरों का मूल्यांकन किया और प्रत्येक विभाग से सर्वश्रेष्ठ पोस्टर चुना। समापन समारोह में विजेता प्रतिभागियाें को पुरस्कृत किया जाएगा।
कार्यक्रम में आज
रिसर्च कॉन्क्लेव के तीसरे दिन विशेषज्ञ स्नातक की कक्षाओं का भ्रमण कर छात्रों से मुलाकात करेंगे। दिन में 11.30 बजे आर्यभट्ट सभागार में ‘भारतीय अनुसंधान की वर्तमान दशा एवं भविष्य’ विषयक परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा। परिचर्चा के बाद प्रश्नकाल होगा।
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