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डीवीएन पीजी कॉलेज में ‘21 वीं सदी में गांधी दर्शन की प्रासंगिकता’ विषय पर संगोष्ठी
Thu, 23 Jan 2020 11:30 AM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Thu, 23 Jan 2020 11:30 AM IST
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दिग्विजय नाथ स्नाकोत्तर महाविद्यालय के राजनीति शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी में मंचासीन प्राचार्य डॉ शैलेंद्र प्रताप सिंह अन्य।
- फोटो : अमर उजाला
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गोरखपुर विश्वविद्यालय राजनीति विज्ञान विभाग के सहायक आचार्य डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान संदर्भ में महात्मा गांधी न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर महामानव के रूप में प्रतिष्ठित हैं, जिनके आदर्श, विचार, जीवन मूल्य और दर्शन को संपूर्ण विश्व ने स्वीकार किया। गांधी जी ने अपने जीवन में सत्य, अहिंसा को तो आधार माना ही, साथ ही अपरिग्रह के सिद्धांत को भी नैतिक जीवन का एक हिस्सा माना।
डॉ महेंद्र सिंह ने बुधवार को डीवीएन पीजी कॉलेज में ‘21 वीं सदी में गांधी दर्शन की प्रासंगिकता’ विषय पर संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वह किसी भी कार्य को करने से पहले उसे स्वयं पर प्रयोग करते थे और उनके इस विचार में किसी प्रकार का दुराग्रह नहीं होता था। विशिष्ट वक्ता सीआरपीडी कॉलेज के सहायक आचार्य डॉ विवेक शुक्ला ने कहा कि सामाजिक समरसता तथा मानवीय एकता के लिए गांधी जी ने विशेष आंदोलन चलाया और अहिंसा को एक ऐसा अस्त्र माना जिसके बल पर शक्तिशाली ताकतों का भी झुकाया जा सकता है।
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डॉ महेंद्र सिंह ने बुधवार को डीवीएन पीजी कॉलेज में ‘21 वीं सदी में गांधी दर्शन की प्रासंगिकता’ विषय पर संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वह किसी भी कार्य को करने से पहले उसे स्वयं पर प्रयोग करते थे और उनके इस विचार में किसी प्रकार का दुराग्रह नहीं होता था। विशिष्ट वक्ता सीआरपीडी कॉलेज के सहायक आचार्य डॉ विवेक शुक्ला ने कहा कि सामाजिक समरसता तथा मानवीय एकता के लिए गांधी जी ने विशेष आंदोलन चलाया और अहिंसा को एक ऐसा अस्त्र माना जिसके बल पर शक्तिशाली ताकतों का भी झुकाया जा सकता है।
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अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. वीणा गोपाल मिश्र ने कहा कि आज के परिवेश में मानवता इस मोड़ पर आ गई है कि मानव अपने नैतिक मूल्यों को भूलता जा रहा है और आर्थिक मूल्य उस पर प्रभावी होते जा रहे हैं। भौतिकवाद अपने चरम पर है जिसके कारण हम अपनी संस्कृति और विरासत को भी भूलते जा रहे हैं। हिंद स्वराज, महात्मा गांधी का एक ऐसा मूल मंत्र है जिसमें आधुनिक विश्व की सभी समस्याओं का समाधान निहित है।
तकनीकी सत्र में 16 प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी की प्रस्ताविकी डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने तथा संचालन एमए प्रथम वर्ष की छात्रा कीर्ति द्विवेदी ने किया। प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह ने सभी प्रतिभागियों और आयोजकों के प्रति धन्यवाद दिया। इस अवसर पर डॉ. रविंद्र कुमार गंगवार, निधि राय, जागृति विश्वकर्मा, अवधेश शुक्ल, डॉ. रुक्मिणी चौधरी, डॉ. अखंड प्रताप सिंह, डॉ. सुनील कुमार सिंह सहित शिक्षक और छात्र उपस्थित थे।
तकनीकी सत्र में 16 प्रतिभागियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी की प्रस्ताविकी डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने तथा संचालन एमए प्रथम वर्ष की छात्रा कीर्ति द्विवेदी ने किया। प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह ने सभी प्रतिभागियों और आयोजकों के प्रति धन्यवाद दिया। इस अवसर पर डॉ. रविंद्र कुमार गंगवार, निधि राय, जागृति विश्वकर्मा, अवधेश शुक्ल, डॉ. रुक्मिणी चौधरी, डॉ. अखंड प्रताप सिंह, डॉ. सुनील कुमार सिंह सहित शिक्षक और छात्र उपस्थित थे।