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गोविवि: अब दोबारा कॉपी जंचवा सकेंगे विद्यार्थी, देना होगा मामूली शुल्क
Wed, 04 Mar 2020 10:20 AM IST
vivek shukla
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 04 Mar 2020 10:20 AM IST
सार
- स्नातक शिक्षकों को भी मिला शोध कराने का अधिकार
- गोविवि: विद्या परिषद की बैठक में लिए गए अहम निर्णय
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परीक्षा देकर निकलती छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उम्मीद से कम अंक पाने पर अब विद्यार्थी अपनी कॉपी दोबारा जंचवा सकेंगे। उनके चुनौती मूल्यांकन आवेदन को स्वीकार किया जाएगा। इसके लिए विद्यार्थी को तीन हजार रुपये शुल्क जमा करना होगा। वहीं, स्नातक शिक्षक भी अब शोध करा सकेंगे।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के संवाद भवन में मंगलवार को कुलपति की अध्यक्षता में हुई विद्या परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
तीन घंटे तक चली बैठक में सबसे पहले पुनर्मूल्यांकन का मामला उठा। सदस्यों ने कहा कि आरटीआई के तहत विद्यार्थी कॉपी के मूल्यांकन को देख तो सकते हैं लेकिन अगर मूल्यांकन में कहीं कमी है तो उसे सुधार नहीं करा सकते हैं। इसलिए विद्यार्थियों के हित को देखते हुए उनके चुनौती मूल्यांकन आवेदन को स्वीकार किया जाए। इस पर सर्वसम्मति से सहमति बन गई।
तय किया गया कि आवेदन करने वाले को प्रति उत्तर पुस्तिका तीन हजार शुल्क जमा करना होगा। कुलपति दो शिक्षकों को मूल्यांकन के लिए नामित करेंगे। दोनों शिक्षकों के मूल्यांकन अंकों का औसत निकाला जाएगा और फिर उसे मान्य किया जाएगा। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी। इसके अलावा स्नातक शिक्षकों को शोध कराने का अधिकार देने का मामला भी उठाया गया। तय किया गया कि जिन कॉलेजों में सिर्फ स्नातक शिक्षक ही कार्यरत हैं परास्नातक शिक्षक नहीं है, वहां स्नातक शिक्षक शोध करा सकते हैं। लेकिन शिक्षक पूर्णकालिक होने चाहिए। इससे शिक्षकों के पदोन्नति में लाभ होगा। बैठक में प्रति कुलपति प्रो. हरीशरण, प्रो. रजनीकांत पांडेय, कुलसचिव डॉ ओमप्रकाश आदि मौजूद रहे।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के संवाद भवन में मंगलवार को कुलपति की अध्यक्षता में हुई विद्या परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
तीन घंटे तक चली बैठक में सबसे पहले पुनर्मूल्यांकन का मामला उठा। सदस्यों ने कहा कि आरटीआई के तहत विद्यार्थी कॉपी के मूल्यांकन को देख तो सकते हैं लेकिन अगर मूल्यांकन में कहीं कमी है तो उसे सुधार नहीं करा सकते हैं। इसलिए विद्यार्थियों के हित को देखते हुए उनके चुनौती मूल्यांकन आवेदन को स्वीकार किया जाए। इस पर सर्वसम्मति से सहमति बन गई।
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तय किया गया कि आवेदन करने वाले को प्रति उत्तर पुस्तिका तीन हजार शुल्क जमा करना होगा। कुलपति दो शिक्षकों को मूल्यांकन के लिए नामित करेंगे। दोनों शिक्षकों के मूल्यांकन अंकों का औसत निकाला जाएगा और फिर उसे मान्य किया जाएगा। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी। इसके अलावा स्नातक शिक्षकों को शोध कराने का अधिकार देने का मामला भी उठाया गया। तय किया गया कि जिन कॉलेजों में सिर्फ स्नातक शिक्षक ही कार्यरत हैं परास्नातक शिक्षक नहीं है, वहां स्नातक शिक्षक शोध करा सकते हैं। लेकिन शिक्षक पूर्णकालिक होने चाहिए। इससे शिक्षकों के पदोन्नति में लाभ होगा। बैठक में प्रति कुलपति प्रो. हरीशरण, प्रो. रजनीकांत पांडेय, कुलसचिव डॉ ओमप्रकाश आदि मौजूद रहे।
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तृतीय श्रेणी पर शोध मामले में यूजीसी से मांगेंगे दिशा-निर्देश
शोध में पंजीकृत स्नातक तृतीय श्रेणी के विद्यार्थियों के मामले में डीन एडवाइजरी कमेटी की सिफारिश पर चर्चा हुई। जिसमें कहा गया है कि विश्वविद्यालय की परिनियमावली में द्वितीय श्रेणी या यूजीसी से समय-समय मिले दिशा-निर्देश ही लागू होंगे। इस पर सदस्यों ने कहा कि यूजीसी को कोई गाइड लाइन नहीं मिली है। लेकिन विद्यार्थियों का हित प्रभावित नहीं होने पाए इसलिए यूजीसी को पत्र लिखकर दिशा निर्देश मांगा जाएगा।
प्री-पीएचडी की परीक्षाएं मई में
विद्या परिषद की बैठक में प्री-एचडी की कक्षाओं के विलंब से शुरू होेने का मामला उठा। सदस्यों ने कहा कि कंप्यूटर की कक्षाएं चलाकर मई में परीक्षा करा ली जाएं। तय किया गया कि विज्ञान की कक्षाएं गणित विभाग में, कला संकाय के विद्यार्थी गणित विभाग में ही जाएंगे। शिक्षा संकाय के विद्यार्थी प्रौण एवं सतत शिक्षा विभाग में कक्षाएं करेंगे।
प्री-पीएचडी की परीक्षाएं मई में
विद्या परिषद की बैठक में प्री-एचडी की कक्षाओं के विलंब से शुरू होेने का मामला उठा। सदस्यों ने कहा कि कंप्यूटर की कक्षाएं चलाकर मई में परीक्षा करा ली जाएं। तय किया गया कि विज्ञान की कक्षाएं गणित विभाग में, कला संकाय के विद्यार्थी गणित विभाग में ही जाएंगे। शिक्षा संकाय के विद्यार्थी प्रौण एवं सतत शिक्षा विभाग में कक्षाएं करेंगे।