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गोविवि: दफ्तर में काम के साथ सतर्कता भी बरकरार, ऐसे सता रहा कोरोना का डर

Thu, 23 Apr 2020 01:56 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: vivek shukla Updated Thu, 23 Apr 2020 01:56 PM IST
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DDU Gorakhpur officers alert for Coronavirus
gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के संबद्धता अनुभाग में बुधवार को एक दिलचस्प वाकया उस वक्त सामने आया, जब वहां पहुंचे एक लिपिक ने चाय पीने के प्रस्ताव पर कहा- भईया! चाय-पानी रहे द... इस समय त कोरोना चलत बा न। उनके इस इंकार में कोरोना के बाद के बदलने वाले समाजिक समीकरणों के न केवल संकेत थे, बल्कि कोरोना से बचाव की सजगता भी थी।
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हुआ यह कि बुधवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे प्रभारी डॉ. बीएन सिंह और प्रधान सहायक निर्भय नारायन सिंह कुछ दूरी पर बैठकर शासन से आए एक पत्र का जवाब बना रहे थे। इसी बीच कुलसचिव दफ्तर से लिपिक जेपी गौतम वहां पहुंच गए।
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उन्हें देखते हुए डॉ. बीएन सिंह मुस्कुराए, फाइल मेज पर रख दी और खैरियत पूछी। फिर निर्भय की ओर देखते हुए बोले- इनके चाय-पानी पिलवा द...। निर्भय ने जैसे ही थर्मस की ओर हाथ बढ़ाया। गौतम ने हाथ जोड़ लिया। बोले, भईया चाय-पानी रहे द... ।
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यह संवाद सुनकर हॉल में बैठे में शोभित पांडेय, शमशेर सिंह और सतीश द्विवेदी हंस पड़े, लेकिन गौतम की तारीफ भी की। बोले, आप तो बहुत ज्यादा सजग हैं। इसी दफ्तर में थोड़ी ही देर बाद प्रशांत चौधरी भी डाक फाइल लेकर पहुंचे। दूर से ही मेज पर फाइल रखकर बोले, साहब देख लीजिए।

तपाक से एक लिपिक बोले पड़े, अरे यार तू दूरवे से फाइल रख देत हव। हमनों के भी कोरोना से डर बा। ठीक बा थोड़ी देर बाद देख लेब। उनकी बात सुनकर निर्भय ने कमेंट किया, सही कह रहे हैं आप। हमने भी पढ़ा था कि कागजों में भी कुछ घंटे वायरस का असर रहता है। छूना मत।


इसके बाद सभी लोग ठहाके लगाकर हंसने लगे। ये दो वाकये बताने को काफी हैं कि सरकारी दफ्तर भले ही खुल गए हैं, लेकिन लोगों के मन में कोरोना को लेकर डर कायम है। सुकून वाली बात है कि लोग सजग भी हैं।
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