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गोरखपुर: बुद्धा इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गीडा में आयोजित हुआ दीक्षांत समारोह
Sun, 08 Mar 2020 01:24 PM IST
vivek shukla
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 08 Mar 2020 01:24 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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बुद्धा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी गीडा में सप्तम दीक्षांत समारोह का आयोजन शनिवार को किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप जलाकर मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विश्वनाथ तिवारी और चेयरमैन डॉ. आरए अग्रवाल ने की।
प्रो. विश्वनाथ तिवारी ने कहा कि जीवन में सफल होने से ज्यादा जरूरी है चरितार्थ का चयन करना।
बिना चरितार्थ के चयन के कामयाबी संभव नहीं है। उन्होंने देव ऋण पर प्रकाश डालते हुए पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। कहा कि तकनीक का भावना से कोई संबंध नहीं है। छात्रों को सावधान करते हुए कहा कि अभियांत्रिकी सेवा में जाकर अपनी भावना एवं संवेदना को खोएं नहीं बल्कि उसका ध्यान रखें।
प्रो. तिवारी ने धर्म के अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि धर्म का अर्थ कोई धर्म विशेष न होकर विषय वस्तु या व्यक्ति की मूलभूत विशेषता से है। धर्म का अर्थ कर्तव्य से लिया जाता है जैसे राजधर्म। कहा कि दीक्षांत का उद्देश्य अत्यंत मूल्यवान है। डॉ. आरए अग्रवाल ने कहा कि यह भारत का सर्वश्रेष्ठ संस्थान है। इससे पूर्व छात्रा ऋषिका भट्ट, श्रेया गोविल ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी।
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इस मौके पर निदेशक प्रो. एचएन सिंह, दीपक अग्रवाल, प्रो. जेपी गुप्ता, प्रो. एनपी शुक्ला, डॉ. लतेंद्र श्रीवास्तव, डॉ. डीके द्विवेदी, डॉ. आशीष कुमार सिंह, डॉ. अरुन पांडेय, डीएन श्रीवास्तव, डॉ. राकेश तिवारी, प्रो. बीके श्रीवास्तव, श्रवण पांडेय, संतोष कुमार त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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प्रो. विश्वनाथ तिवारी ने कहा कि जीवन में सफल होने से ज्यादा जरूरी है चरितार्थ का चयन करना।
बिना चरितार्थ के चयन के कामयाबी संभव नहीं है। उन्होंने देव ऋण पर प्रकाश डालते हुए पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। कहा कि तकनीक का भावना से कोई संबंध नहीं है। छात्रों को सावधान करते हुए कहा कि अभियांत्रिकी सेवा में जाकर अपनी भावना एवं संवेदना को खोएं नहीं बल्कि उसका ध्यान रखें।
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प्रो. तिवारी ने धर्म के अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि धर्म का अर्थ कोई धर्म विशेष न होकर विषय वस्तु या व्यक्ति की मूलभूत विशेषता से है। धर्म का अर्थ कर्तव्य से लिया जाता है जैसे राजधर्म। कहा कि दीक्षांत का उद्देश्य अत्यंत मूल्यवान है। डॉ. आरए अग्रवाल ने कहा कि यह भारत का सर्वश्रेष्ठ संस्थान है। इससे पूर्व छात्रा ऋषिका भट्ट, श्रेया गोविल ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी।
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इस मौके पर निदेशक प्रो. एचएन सिंह, दीपक अग्रवाल, प्रो. जेपी गुप्ता, प्रो. एनपी शुक्ला, डॉ. लतेंद्र श्रीवास्तव, डॉ. डीके द्विवेदी, डॉ. आशीष कुमार सिंह, डॉ. अरुन पांडेय, डीएन श्रीवास्तव, डॉ. राकेश तिवारी, प्रो. बीके श्रीवास्तव, श्रवण पांडेय, संतोष कुमार त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।