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सीबीएसई: अब कंप्यूटर सॉफ्टवेयर जांचेगा कठिन सवालों के जवाब, ऐसे मिलेगा नंबर
Wed, 22 Jan 2020 03:13 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Wed, 22 Jan 2020 03:13 PM IST
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं के दौरान अब विद्यार्थियों को कठिन सवालों से घबराने की कोई जरूरत नहीं होगी। विद्यार्थी अपनी समझ के साथ जो भी जवाब लिखेंगे, उसी अनुसार उन्हें नंबर मिलेगा। विद्यार्थियों की समझ को दरकिनार कर शिक्षक नंबर नहीं काट पाएंगे। इसके लिए थ्योरी इवैल्यूएशन एंड एनालिसिस (ट्रेटा) नाम के सॉफ्टवेयर से कठिन सवालों के जवाब पर नंबर देने में मदद ली जाएगी। इसका आदेश सीबीएसई से संचालित जिले के 104 विद्यालयों में पहुंच गया है।
बोर्ड के अनुसार, परीक्षा के बाद कई बार बच्चे कठिन सवाल के जवाब पर मिले नंबर को लेकर असमंजस में रहते हैं। अब ऐसा नहीं होगा। ट्रेटा सॉफ्टवेयर के साथ प्रश्न पत्र की शिकायत के लिए शिकायत प्रकोष्ठ बनाई गई है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 2018 के बैच गणित और 12वीं के अर्थशास्त्र के दोबारा मूल्यांकन के दौरान ट्रेटा सॉफ्टवेयर की मदद ली गई थी। इससे रिजल्ट बेहतर हुआ था। इसके बाद 2019 में गणित, अर्थशास्त्र के साथ भौतिकी, रसायनशास्त्र, जीव विज्ञान के विषयों में भी ट्रेटा की मदद से नंबर दिया गया था। पहले चरण की सफलता को देखते हुए बोर्ड ने इसे लागू करने को हरी झंडी दी है।
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बोर्ड के अनुसार, परीक्षा के बाद कई बार बच्चे कठिन सवाल के जवाब पर मिले नंबर को लेकर असमंजस में रहते हैं। अब ऐसा नहीं होगा। ट्रेटा सॉफ्टवेयर के साथ प्रश्न पत्र की शिकायत के लिए शिकायत प्रकोष्ठ बनाई गई है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 2018 के बैच गणित और 12वीं के अर्थशास्त्र के दोबारा मूल्यांकन के दौरान ट्रेटा सॉफ्टवेयर की मदद ली गई थी। इससे रिजल्ट बेहतर हुआ था। इसके बाद 2019 में गणित, अर्थशास्त्र के साथ भौतिकी, रसायनशास्त्र, जीव विज्ञान के विषयों में भी ट्रेटा की मदद से नंबर दिया गया था। पहले चरण की सफलता को देखते हुए बोर्ड ने इसे लागू करने को हरी झंडी दी है।
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क्या है ट्रेटा साफ्टवेयर
थ्योरी इवैल्यूएशन ट्रेंड एनालसिस (ट्रेटा) के नाम का यह साफ्टवेयर है। इसे हर मूल्यांकन केंद्र पर इस्तेमाल किया जाएगा। जिस आंसर शीट में छात्र किताबी भाषा नहीं बल्कि अपनी भाषा और समझ के अनुसार उत्तर देंगे, उसमें आंसरशीट के औसतन अंक इस सॉफ्टवेयर की मदद से दिए जाएंगे। यानी अगर किसी छात्र ने किसी प्रश्न का उत्तर अपनी समझ के अनुसार दिया तो ऐसे जितने भी उत्तर रहेंगे, उसके लिए एक औसत अंक निर्धारित होंगे। वे अंक
इस सॉफ्टवेयर की मदद से दिए जाएंगे।
किताब से पूछे गए सवाल को कठिन मानते हैं छात्र
बोर्ड की मानें तो कई बार छात्र बोर्ड पर सिलेबस के बाहर से प्रश्न पूछे जाने का आरोप लगाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि वे प्रश्न किताब से ही होते हैं। किताब में दिए गये कुछ प्रश्नों की सूची से प्रश्न न होकर ये प्रश्न चैप्टर के अंदर से होेते हैं। चूंकि छात्र रटकर प्रश्न का उत्तर तो तैयार कर लेते हैं, लेकिन वे चैप्टर पूरी तरह से समझ कर नहीं पढ़ते हैं। ऐसे प्रश्न उन्हें कठिन लगते हैं और उसे वे सिलेबस के बाहर का मानते हैं।
इस सॉफ्टवेयर की मदद से दिए जाएंगे।
किताब से पूछे गए सवाल को कठिन मानते हैं छात्र
बोर्ड की मानें तो कई बार छात्र बोर्ड पर सिलेबस के बाहर से प्रश्न पूछे जाने का आरोप लगाते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि वे प्रश्न किताब से ही होते हैं। किताब में दिए गये कुछ प्रश्नों की सूची से प्रश्न न होकर ये प्रश्न चैप्टर के अंदर से होेते हैं। चूंकि छात्र रटकर प्रश्न का उत्तर तो तैयार कर लेते हैं, लेकिन वे चैप्टर पूरी तरह से समझ कर नहीं पढ़ते हैं। ऐसे प्रश्न उन्हें कठिन लगते हैं और उसे वे सिलेबस के बाहर का मानते हैं।
नंबर की मिलेगी जानकारी
अपनी भाषा और समझ के साथ कॉपी में जवाब लिखने का क्या फर्क पड़ा, बोर्ड इसकी जानकारी भी विद्यार्थियों को देगा। रिजल्ट के बाद सभी विद्यार्थी को उनकी आंसर शीट की फोटो कॉपी मिलेगी। इससे विद्यार्थियों को हर सवाल में कितने अंक मिले, इसे जान पाएंगे। इससे वे अपना आकलन भी कर पाएंगे।
कॉपियों के मूल्यांकन के लिए ट्रेटा सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों की तरफ से लिखे सभी जवाबों के मूल्यांकन में आसानी होगी। आदेश मिला है, इसे लागू किया जाएगा।
अजय शाही, अध्यक्ष, गोरखपुर पब्लिक स्कूल एसोसिएशन
कॉपियों के मूल्यांकन के लिए ट्रेटा सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों की तरफ से लिखे सभी जवाबों के मूल्यांकन में आसानी होगी। आदेश मिला है, इसे लागू किया जाएगा।
अजय शाही, अध्यक्ष, गोरखपुर पब्लिक स्कूल एसोसिएशन