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डीवीएन पीजी कॉलेज में बोले- प्रो. यूपी सिंह, पीड़ित व्यक्ति को शरण देना हमारी सांस्कृतिक पहचान

Sun, 16 Feb 2020 09:49 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: vivek shukla Updated Sun, 16 Feb 2020 09:49 PM IST
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Citizenship Amendment Act discussion seminar organised in DVN PG college gorakhpur
डीवीएन पीजी कॉलेज में आयोजित गोष्ठी में मंचासीन अतिथिगण। - फोटो : अमर उजाला
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के पूर्व कुलपति प्रो. यूपी सिंह ने कहा कि दुखी, पीड़ित व्यक्ति को शरण देना हमारी सांस्कृतिक पहचान है। नागरिकता संशोधन अधिनियम हमारी इसी सांस्कृतिक विचारधारा को अक्षुण्य रखने का कानून है।
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प्रो. सिंह रविवार को डीवीएन पीजी कॉलेज के गोरखनाथ साहित्यिक केंद्र सभागार में ‘नागरिकता संशोधन अधिनियम: एक परिचर्चा’ विषय पर हुई गोष्ठी को बतौर कार्यक्रम अध्यक्ष संबोधित कर रहे थे।
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आयोजन अखिल भारतीय साहित्य परिषद, गोरक्षप्रांत एवं महाविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से किया गया था। उन्होंने कहा कि आज शाहीनबाग के नाम पर वहां के लोगों का जो उत्पीड़न हो रहा है उससे लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। उनके मानवाधिकारों का उत्पीड़न हो रहा है। मुख्य अतिथि डॉ. पृथ्वीराज सिंह ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून भारतीय होने की पहचान है। इसके विरोध में भारतीय संस्कृति, अस्मिता को कुचला जा रहा है। आज वैचारिक लड़ाई समाप्त हो चुकी है।
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विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक नारायण धर दूबे ने कहा कि यह एक छोटा सा कानून है, लेकिन अधिनियम बहुत पुराना है। नागरिकता कानून में विभेदकारी जैसी कोई बात ही नहीं है। डॉ. प्रदीप राव ने कहा कि भारतीय संस्कृति शरण देने वाली संस्कृति रही है। शरण देने के लिए आत्मबलिदान की भी परंपरा रही है। स्वागत भाषण अखिल भारतीय साहित्यिक परिषद, गोरक्षप्रांत अध्यक्ष रणविजय सिंह ने दिया। संचालन प्रो. प्रत्यूष दुबे ने किया। इस अवसर पर डॉ. राजशरण शाही, डॉ. भगवान सिंह, डॉ. राकेश सिंह, डॉ. अमोद राय, ओपी सिंह, टीएन मिश्र, प्रो. विमलेश मिश्र, डॉ. महेंद्र राय आदि उपस्थित रहे।
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