Ram Mandir: अद्भुत संयोग...ताला खुला तब और अब प्राण प्रतिष्ठा में भी गोरक्षनगरी के ही सीएम
गोरखपुर और आसपास के जिलों की धरती क्रांतिवीरों की मानी जाती है। आजादी की लड़ाई में चौरीचौरा की घटना को भला कौन भूल सकता है। गोरक्षपीठ का योगदान भी बहुत था। बंधू सिंह ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। अब राम मंदिर बनकर तैयार हो गई, इसके पीछे भी गोरक्षनगरी की भूमिका ज्यादा है।
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सोमवार का दिन रामभक्तों के लिए अविस्मरणीय क्षण था। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में गोरक्षनगरी की भूमिका सबसे अहम थी। गोरक्षपीठ की पांच पीढि़यों ने आंदोलन को न सिर्फ दिशा दी, बल्कि जन-जन तक इसे पहुंचाने की कोशिश की।
यह अद्भुत संयोग ही है कि अयोध्या राम मंदिर का ताला 38 साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने खुलवाया और मंदिर निर्माण व प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रबंधन में पूरा हुआ। दोनों ही मुख्यमंत्री गोरखपुर से हैं। यही नहीं, ताला खुलवाने का फैसला लेने वाले जज कृष्ण मोहन पांडेय भी गोरखपुर के ही रहने वाले थे।
वैसे भी गोरखपुर और आसपास के जिलों की धरती क्रांतिवीरों की मानी जाती है। आजादी की लड़ाई में चौरीचौरा की घटना को भला कौन भूल सकता है। गोरक्षपीठ का योगदान भी बहुत था। बंधू सिंह ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। अब राम मंदिर बनकर तैयार हो गई, इसके पीछे भी गोरक्षनगरी की भूमिका ज्यादा है। अयोध्या में राम मंदिर का सपना आज 22 जनवरी 2024 को आकार ले लिया। इसके पीछे संघर्ष की एक लंबी गाथा है, जिसमें गोरक्षनगरी की भूमिका सबसे अहम है।
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अयोध्या में मंदिर की पूजा के लिए 31 जनवरी 1986 को ताला खुलवाने का लिया गया फैसला हो या फिर आज प्राण प्रतिष्ठा के बाद राम लला के विराजने का दिन। दोनों में गोरखपुर की एक बात समान है कि मुख्यमंत्री गोरखपुर के ही रहे। तब मुख्यमंत्री गोरखपुर के वीर बहादुर सिंह थे और आज प्राण प्रतिष्ठा के समय भी मुख्यमंत्री गोरखपुर के ही योगी आदित्यनाथ हैं। यही नहीं ताला खुलवाने का फैसला लेने वाले जज कृष्ण मोहन पांडेय भी गोरखपुर के ही रहने वाले थे। आंदोलन की रणनीति भी गोरखनाथ मंदिर से ही बनी थी और इसे धार भी यही से दिया गया था।
31 जनवरी 1986 में केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। उत्तर प्रदेश में भी उस वक्त कांग्रेस की सरकार थी। वीर बहादुर मुख्यमंत्री थे। यूपी के फैजाबाद के एक वकील उमेश चंद्र ने राम मंदिर का ताला खुलवाने के लिए जिला अदालत में एक याचिका दायर कर रखी थी। याचिका को मंजूर करते हुए गोरखपुर के अलहदादपुर निवासी तत्कालीन जज कृष्ण मोहन पांडेय ने मंदिर का ताला खोलने का आदेश दे दिया।
इसके बाद एक फरवरी को राम मंदिर के ताले 37 साल बाद से जो बंद पड़े थे खोल दिए गए थे। फिर मंदिर को बनवाने की के लिए चले आंदोलन की कमान गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ ने संभाल ली थी। साधु-संतों को एक मंच पर लाकर महंत अवेद्यनाथ ने पूरे देश में एक माहौल बनाया। अयोध्या में राम मंदिर के बनने पर गोरक्षनगरी के लोगों को भी गर्व है। सोमवार को दिवाली जैसा भव्य उत्सव शहर में देखने को मिला, जैसे अवध से वाकई राम आए हैं।
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आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि गुरु गोरक्षनाथ की धरती ने ऐसे वीर सपूतों को जन्म दिया है, जिन्होंने अयोध्या के आंदोलन को नई धार दी। ये सही है कि गोरक्षनगरी के ही रहने वाले जज और सीएम वीर बहादुर के समय में मंदिर का ताला खुला और आज सीएम के रूप में योगी आदित्यनाथ हैं। पूरे आंदोलन को भी देखेंगे तो गोरखपुर के लोगों का बड़ा योगदान है।
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हर आंदोलन में गोरक्षनगरी ही अहम
वरिष्ठ अधिवक्ता शंकर शरण त्रिपाठी ये हम लोगों के लिए गौरव का विषय है। अयोध्या का आंदोलन हो या फिर आजादी की लड़ाई हर बार गोरखपुर के सपूतों ने अहम भूमिका निभाई। जब हिंदुओं को मंदिर में घुसने नहीं दिया रहा था, तब गोरखपुर के जज ने फैसला लिया और सीएम भी गोरखपुर के ही थे। प्राण प्रतिष्ठा हुआ तो सीएम गोरखपुर के ही हैं।