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Fact Check: असम की घटना को पश्चिम बंगाल का बताकर किया जा रहा सांप्रदायिक दावा, पड़ताल में जानें सच

Fri, 22 May 2026 07:54 PM IST
Sandhya Kumari फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला
फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला Published by: Sandhya Kumari Updated Fri, 22 May 2026 07:54 PM IST
सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर पुलिस के साथ हिंसा का एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि भाजपा के आने के बाद बंगाल में  हिंदू मवेशी विक्रेता भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। हमारी पड़ताल में यह दावा गलत निकला है।  

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Fact Check Communal Claim Made by Misrepresenting an Incident from Assam as Occurring in West Bengal
फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में लोगों की भीड़ नजर आ रही है। उनके सामने पुलिस की भीड़ भी नजर आ रही है। इस वीडियो को शेयर करके इसे बंगाल का बताया जा रहा है। वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो पश्चिम बंगाल का है। यह भाजपा के आने के बाद उनसे तंग होकर मुसलमानों ने बीफ का बहिष्कार कर दिया। इसके बाद हिंदू मवेशी विक्रेताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। 

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अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। जांच में सामने आया कि वीडियो पश्चिम बंगाल का नहीं है। पड़ताल में पता चला कि वीडियो असम का है। यहां कथित वन भूमि अतिक्रमण से संबंधित गिरफ्तारियों के बाद तनाव उत्पन्न हुआ था। 

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क्या है दावा 

इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है किया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की गुंडा गर्दी से परेशान होकर मुसलमानों ने बीफ का बहिष्कार किया। इसके कारण हिंदू मवेशी विक्रेताओं को नुकसान हुआ। जिसकी वजह से उन्होंने भाजपा का विरोध किया। 

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ताज इंडिया (@taj_india007) नाम के एक एक्स यूजर ने इस वीडियो को शेयर करके लिखा, “भाजपा-आरएसएस के गुंडों के अत्याचारों के कारण मुसलमानों ने बीफ़ का बहिष्कार किया। बंगाली मुसलमानों द्वारा बीफ का बहिष्कार किए जाने के बाद, हिंदू पशु विक्रेताओं ने BJP सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया, और हिंदुत्ववादी सरकार ने हिंदू पशु विक्रेताओं पर लाठीचार्ज कर दिया! वीडियो में केंद्रीय बलों को हिंदू महिलाओं पर पत्थर फेंकते हुए दिखाया गया है।" पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 

 

 

इस तरह के कई और दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 

पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें यह वीडियो My Opinion Official नाम के यूट्यूब चैनल पर 20 अप्रैल 2026 को पोस्ट किया हुआ मिला। यहां इस वीडियो के साथ कैप्शन लिखा गया था “रानीकाटा वन रेंज कार्यालय पर हमले का वीडियो” यह वीडियो 10 मिनट लंबा है लेकिन इसमें आप 2:00 मिनट से वायरल हो रहा वीडियो शुरू होते देख सकते हैं। 

 

आगे जब हमने इससे जुड़े कीवर्ज को सर्च किया। यहां हमें टेलीग्रफ की एक रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट को 19 अप्रैल 2026 को प्रकाशित किया गया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि असम के चिरांग ज़िले के रुनिखाता में भीड़ की हिंसा के सिलसिले में पंद्रह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस हिंसा में एक वन कार्यालय और उसके कर्मचारियों को निशाना बनाया गया था। यह तनाव आदिवासी और नेपाली समुदाय के 25 लोगों को हिरासत में लिए जाने के कारण पैदा हुआ है, जिन पर कथित तौर पर वन भूमि पर अतिक्रमण करने का आरोप था।

 

पड़ताल का नतीजा 

हमारी पड़ताल से यह साफ है कि यह घटना असम की है जिसे पश्चिम बंगाल का बताकर सांप्रदायिक दावा किया जा रहा है। 

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