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Fact Check: उत्तर प्रदेश के चार महीने पुराने वीडियो को पश्चिम बंगाल का बताकर किया जा रहा भ्रामक दावा

Fri, 08 May 2026 06:20 PM IST
Asmita Tripathi फैक्ट चेक डेस्क , अमर उजाला
फैक्ट चेक डेस्क , अमर उजाला Published by: Asmita Tripathi Updated Fri, 08 May 2026 06:20 PM IST
सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा पश्चिम बंगाल में पुलिस हर मुस्लिम और ईसाई को बांग्लादेशी अप्रवासी बताकर बेदखल कर रही है। हमने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। 


 

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Fact Check: A four-month-old video from Uttar Pradesh is being shared as from West Bengal
फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में एक झुग्गी में कुछ पुलिसकर्मी नजर आ रहे हैं। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में भारतीय सेना और पुलिस हर मुस्लिम और ईसाई के घर में जाकर उन्हें बांग्लादेशी अप्रवासी बताकर बेदखल कर रही है।

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अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल वीडियो को चार महीने पुराना और उत्तर प्रदेश का है। इस वीडियो का पश्चिम बंगाल से कोई संबंध नहीं है।

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क्या है दावा 

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में भारतीय सेना और पुलिस हर मुस्लिम और ईसाई को  बांग्लादेशी अप्रवासी बताकर बेदखल कर रही है।

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ईरान अपडेट नाम के फेसबुक यूजर ने लिखा, ’पश्चिम बंगाल में भारतीय सेना और पुलिस हर मुस्लिम और ईसाई घर में जाकर उन्हें बांग्लादेशी अप्रवासी बताकर बेदखल कर रही है। भारत में अल्पसंख्यकों को मानवाधिकारों के उल्लंघन का यही सामना प्रतिदिन करना पड़ता है। ईसाई गिरजाघर और मुस्लिम मस्जिदें प्रतिदिन ध्वस्त की जा रही हैं।’ पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।

पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें एनडीटीवी की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 1 जनवरी 2026 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली के पास गाजियाबाद में उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों द्वारा असंभव को संभव कर दिखाने के बाद सोशल मीडिया पर पुलिस की आलोचना और उपहास हो रहा है। वायरल वीडियो में एक पुलिसकर्मी को सुपरमार्केट के बारकोड रीडर की तरह लोगों की पीठ छूकर मोबाइल फोन से स्कैन करते हुए दिखाया गया है। आम तौर पर, नागरिकता सत्यापन में पासपोर्ट जैसे दस्तावेज या आधार कार्ड जैसे बायोमेट्रिक्स की जांच की जाती है। लेकिन पुलिसकर्मी को एक रहस्यमय मशीन का इस्तेमाल करते हुए देखा गया, जो दावा करती है कि वह व्यक्ति की पीठ छूकर उसके जन्मस्थान का पता बता सकती है।
 

 

आगे की पड़ताल में हमेंं सीएनएन न्यूज -18 की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 2 जनवरी 2026 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि गाजियाबाद पुलिस ने एक पुलिसकर्मी द्वारा एक व्यक्ति की राष्ट्रीयता की जांच करने और झुग्गी बस्ती के निवासियों को डराने-धमकाने का वीडियो वायरल होने के बाद जांच के आदेश दिए हैं। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से वायरल हुए एक वीडियो ने लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है, जिसमें एक पुलिस अधिकारी को कथित तौर पर एक व्यक्ति की राष्ट्रीयता सत्यापित करने के लिए अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए देखा गया है। सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे इस वीडियो ने पुलिस के आचरण, प्रोफाइलिंग, प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग और नागरिकों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

 

 

पड़ताल का नतीजा 

हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को उत्तर प्रदेश का पाया है। 

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