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विचार: गन्ना किसानों के चेहरों पर लौटी मुस्कान
Sat, 30 May 2026 08:09 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
आलोक चंद्रा, अमर उजाला
आलोक चंद्रा, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 30 May 2026 08:09 PM IST
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गन्ना किसान
- फोटो : ANI
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राज्य की नीतियां जब किसान केंद्रित होती हैं, तो यह पूरे राष्ट्र की आत्मा को सशक्त करती हैं। ऐसा इसलिए कि खेती सिर्फ उत्पादन की प्रक्रिया ही नहीं है, बल्कि जीवन, संस्कृति और सभ्यता की निरंतरता का आधार है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालने के बाद ही किसानों की कर्ज माफी कर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी थीं। गन्ना किसानों के हित में जो भी फैसले किए गए, उन्होंने राज्य को पूरे देश में अग्रणी पंक्ति में ला खड़ा किया।
3.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक रिकॉर्ड भुगतान
उत्तर प्रदेश ने गन्ना किसानों को 3.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया। देश के किसी भी राज्य ने गन्ना किसानों को इतना भुगतान नहीं किया। एक दशक पहले प्रदेश के गन्ना किसानों का इतिहास किसी त्रासदी से कम नहीं था। मिलें बंद, गन्ना मूल्य बकाया, किसान कर्ज़ में डूबे थे। पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक, गन्ना किसान की पीड़ा एक सामान्य परिदृश्य बन चुकी थी। गन्ना किसानों को 3.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लाखों परिवारों की आर्थिक जीवन-रेखा है। आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान उत्साह और गर्व से चीनी मिलों तक पहुंचते हैं। वे साफ तौर पर कहते हैं कि पहले चीनी मिलें उनके पैसे लटकाए रखती थीं। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था कि गन्ना किसानों का घर कैसे चलेगा। अब समय पर भुगतान मिल जाता है तो हमें अपने बच्चों की पढ़ाई और शादी-ब्याह की चिंता नहीं होती।
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3.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक रिकॉर्ड भुगतान
उत्तर प्रदेश ने गन्ना किसानों को 3.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया। देश के किसी भी राज्य ने गन्ना किसानों को इतना भुगतान नहीं किया। एक दशक पहले प्रदेश के गन्ना किसानों का इतिहास किसी त्रासदी से कम नहीं था। मिलें बंद, गन्ना मूल्य बकाया, किसान कर्ज़ में डूबे थे। पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक, गन्ना किसान की पीड़ा एक सामान्य परिदृश्य बन चुकी थी। गन्ना किसानों को 3.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लाखों परिवारों की आर्थिक जीवन-रेखा है। आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान उत्साह और गर्व से चीनी मिलों तक पहुंचते हैं। वे साफ तौर पर कहते हैं कि पहले चीनी मिलें उनके पैसे लटकाए रखती थीं। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था कि गन्ना किसानों का घर कैसे चलेगा। अब समय पर भुगतान मिल जाता है तो हमें अपने बच्चों की पढ़ाई और शादी-ब्याह की चिंता नहीं होती।
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चुनावी वादा नहीं, सरकार की प्राथमिकता
यह अनवरत प्रक्रिया का हिस्सा है। पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि की गई है। जब देश के कई राज्य गन्ने का उचित समर्थन मूल्य देने में संकोच करते हैं, उत्तर प्रदेश ने साबित कर दिया कि किसान की आय बढ़ाना महज चुनावी वादा नहीं, सरकार की प्राथमिकता है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में जहां करोड़ों कुंतल गन्ने की पेराई होती है, इसका कुल आर्थिक प्रभाव अरबों रुपये में है। प्रत्येक रुपये की वृद्धि का सीधा लाभ उस किसान तक पहुंचता है जो कभी तपती दोपहरी में खेत जोतता है और कभी कड़कड़ाती ठंड में फसल काटता है।
किसानों में जगा भरोसा, मिले परिणाम
उत्तर प्रदेश आज देश में सर्वाधिक गन्ना उत्पादन करने वाला राज्य है। यह केवल कृषि भूमि के विस्तार का नतीजा नहीं, यह उन नीतियों का प्रतिफल है जिनसे किसान को खेती में भरोसा मिला। जब किसान को यह विश्वास होता है कि उसकी फसल का उचित दाम मिलेगा और समय पर भुगतान होगा, तो वह अधिक भूमि पर, अधिक लगन से खेती करता है। इसके परिणाम भी प्रत्यक्ष हैं। उत्तर प्रदेश अब औसत चीनी परता में महाराष्ट्र और कर्नाटक, दोनों को पीछे छोड़ चुका है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। बेहतर बीज, वैज्ञानिक खेती, समय पर सिंचाई, और मिलों की बेहतर कार्यकुशलता, इन सबने मिलकर इस आंकड़े को संभव किया है।
यह अनवरत प्रक्रिया का हिस्सा है। पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि की गई है। जब देश के कई राज्य गन्ने का उचित समर्थन मूल्य देने में संकोच करते हैं, उत्तर प्रदेश ने साबित कर दिया कि किसान की आय बढ़ाना महज चुनावी वादा नहीं, सरकार की प्राथमिकता है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में जहां करोड़ों कुंतल गन्ने की पेराई होती है, इसका कुल आर्थिक प्रभाव अरबों रुपये में है। प्रत्येक रुपये की वृद्धि का सीधा लाभ उस किसान तक पहुंचता है जो कभी तपती दोपहरी में खेत जोतता है और कभी कड़कड़ाती ठंड में फसल काटता है।
किसानों में जगा भरोसा, मिले परिणाम
उत्तर प्रदेश आज देश में सर्वाधिक गन्ना उत्पादन करने वाला राज्य है। यह केवल कृषि भूमि के विस्तार का नतीजा नहीं, यह उन नीतियों का प्रतिफल है जिनसे किसान को खेती में भरोसा मिला। जब किसान को यह विश्वास होता है कि उसकी फसल का उचित दाम मिलेगा और समय पर भुगतान होगा, तो वह अधिक भूमि पर, अधिक लगन से खेती करता है। इसके परिणाम भी प्रत्यक्ष हैं। उत्तर प्रदेश अब औसत चीनी परता में महाराष्ट्र और कर्नाटक, दोनों को पीछे छोड़ चुका है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। बेहतर बीज, वैज्ञानिक खेती, समय पर सिंचाई, और मिलों की बेहतर कार्यकुशलता, इन सबने मिलकर इस आंकड़े को संभव किया है।
बिचौलियों की भूमिका समाप्त
किसान क्रेडिट कार्ड, फसली ऋण उपलब्ध कराने जैसे फैसलों ने यह सुनिश्चित किया कि किसान को खाद और सिंचाई के लिए साहूकारों के पास न जाना पड़े। प्रदेश में 2024-25 से मार्च 2026 तक 2.03 करोड़ फार्मर आईडी जारी की गईं। यह आईडी किसान का वह डिजिटल दस्तावेज है जो सुनिश्चित करता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उसके खाते में पहुंचे, बिचौलिया न खाए।
(अस्वीकरण: ये लेखक के निजि विचार हैं। लेखक आलोक चंद्रा भारतीय प्रबंध संस्थान, कलकत्ता के पूर्व मुख्य प्रशासनिक अधिकारी हैं।)
किसान क्रेडिट कार्ड, फसली ऋण उपलब्ध कराने जैसे फैसलों ने यह सुनिश्चित किया कि किसान को खाद और सिंचाई के लिए साहूकारों के पास न जाना पड़े। प्रदेश में 2024-25 से मार्च 2026 तक 2.03 करोड़ फार्मर आईडी जारी की गईं। यह आईडी किसान का वह डिजिटल दस्तावेज है जो सुनिश्चित करता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उसके खाते में पहुंचे, बिचौलिया न खाए।
(अस्वीकरण: ये लेखक के निजि विचार हैं। लेखक आलोक चंद्रा भारतीय प्रबंध संस्थान, कलकत्ता के पूर्व मुख्य प्रशासनिक अधिकारी हैं।)