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विचार: रक्षाबंधन पर दिखी यूपी में कानून-व्यवस्था की ताकत
Sun, 30 Aug 2026 07:07 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
प्रो. सोनाली सिंह
प्रो. सोनाली सिंह
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 30 Aug 2026 07:07 PM IST
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यूपी में रक्षाबंधन पर मुफ्त बस यात्रा।
- फोटो : एआई के द्वारा जनित।
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उत्तर प्रदेश की पावन धरा पर रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के पवित्र रिश्ते, स्नेह और सुरक्षा का उत्सव है। इस पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की माताओं, बहनों और बेटियों को एक बड़ा उपहार देते हुए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) की सभी श्रेणी की बसों में तीन दिनों के लिए निशुल्क बस यात्रा की घोषणा की। सरकार ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए न केवल महिलाओं को, बल्कि उनके साथ यात्रा कर रहे एक सहयात्री (चाहे वे उनके छोटे बच्चे हों या अन्य संबंधी) को भी तीन दिनों तक मुफ्त यात्रा की सुविधा दी। इस जनहितैषी निर्णय का प्रभाव पूरे प्रदेश में व्यापक और अभूतपूर्व रूप से देखने को मिला।
सुरक्षा, सेवा व सम्मान का संगम
इस महापर्व पर सुरक्षा, सेवा और सम्मान के संगम की एक अनोखी तस्वीर उभरकर सामने आई। आंकड़ों के अनुसार, निशुल्क यात्रा के शुरुआती दो दिनों के भीतर ही लगभग 60 लाख महिलाओं और उनके सहयात्रियों ने परिवहन निगम की बसों में सफर कर इस राज्यव्यापी सुविधा का भरपूर लाभ उठाया। बस अड्डों और मुख्य मार्गों पर यात्रियों का भारी जमावड़ा रहा, लेकिन उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस महकमे की पूर्व-तैयारियों के कारण यह विशाल यातायात सुचारु और अत्यंत व्यवस्थित ढंग से संचालित हुआ। हर जिले, कस्बे और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से बहनें बिना किसी आर्थिक या व्यावहारिक चिंता के अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने आसानी से आ-जा सकीं।
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सुरक्षा, सेवा व सम्मान का संगम
इस महापर्व पर सुरक्षा, सेवा और सम्मान के संगम की एक अनोखी तस्वीर उभरकर सामने आई। आंकड़ों के अनुसार, निशुल्क यात्रा के शुरुआती दो दिनों के भीतर ही लगभग 60 लाख महिलाओं और उनके सहयात्रियों ने परिवहन निगम की बसों में सफर कर इस राज्यव्यापी सुविधा का भरपूर लाभ उठाया। बस अड्डों और मुख्य मार्गों पर यात्रियों का भारी जमावड़ा रहा, लेकिन उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस महकमे की पूर्व-तैयारियों के कारण यह विशाल यातायात सुचारु और अत्यंत व्यवस्थित ढंग से संचालित हुआ। हर जिले, कस्बे और दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से बहनें बिना किसी आर्थिक या व्यावहारिक चिंता के अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने आसानी से आ-जा सकीं।
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महिलाओं को मिली संपूर्ण सुरक्षा
इस पूरे अभियान और उत्सव की सबसे अभूतपूर्व और खास बात जो सामने आई, वह थी यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की संपूर्ण सुरक्षा। उत्तर प्रदेश की परिवहन बसों और बस अड्डों से इन दो-तीन दिनों के दौरान अपराध की एक भी अप्रिय घटना सामने नहीं आई। बसों और बस अड्डों में शून्य अपराध की यह उपलब्धि किसी संजोग का परिणाम नहीं है, बल्कि यह पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में स्थापित हुए योगी सरकार के 'क्राइम पर जीरो टॉलरेंस मॉडल' की एक बहुत भारी और प्रत्यक्ष सफलता को दर्शाती है।
तैनात रहा अभेद्य सुरक्षा चक्र
इस दौरान प्रदेश भर के प्रमुख बस टर्मिनलों, डिपो और महत्वपूर्ण चौराहों पर पुलिस प्रशासन, महिला पुलिस बल (पिंक पैंथर्स/मिशन शक्ति की टीमें) और परिवहन विभाग के अधिकारियों का एक अभेद्य सुरक्षा चक्र तैनात रहा। तकनीक का आधुनिक इस्तेमाल, सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी, इंटेलिजेंस इनपुट और बस अड्डों से लेकर यात्रा के रास्तों पर निरंतर गश्त ने अपराधियों के मन में डर और आम यात्रियों के मन में सुरक्षा की भावना पैदा की।
इस पूरे अभियान और उत्सव की सबसे अभूतपूर्व और खास बात जो सामने आई, वह थी यात्रियों, विशेषकर महिलाओं की संपूर्ण सुरक्षा। उत्तर प्रदेश की परिवहन बसों और बस अड्डों से इन दो-तीन दिनों के दौरान अपराध की एक भी अप्रिय घटना सामने नहीं आई। बसों और बस अड्डों में शून्य अपराध की यह उपलब्धि किसी संजोग का परिणाम नहीं है, बल्कि यह पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में स्थापित हुए योगी सरकार के 'क्राइम पर जीरो टॉलरेंस मॉडल' की एक बहुत भारी और प्रत्यक्ष सफलता को दर्शाती है।
तैनात रहा अभेद्य सुरक्षा चक्र
इस दौरान प्रदेश भर के प्रमुख बस टर्मिनलों, डिपो और महत्वपूर्ण चौराहों पर पुलिस प्रशासन, महिला पुलिस बल (पिंक पैंथर्स/मिशन शक्ति की टीमें) और परिवहन विभाग के अधिकारियों का एक अभेद्य सुरक्षा चक्र तैनात रहा। तकनीक का आधुनिक इस्तेमाल, सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी, इंटेलिजेंस इनपुट और बस अड्डों से लेकर यात्रा के रास्तों पर निरंतर गश्त ने अपराधियों के मन में डर और आम यात्रियों के मन में सुरक्षा की भावना पैदा की।
अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय
रक्षाबंधन के इस सफल आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि जब नीयत साफ हो, नीति स्पष्ट हो और प्रशासनिक तंत्र चुस्त-दुरुस्त हो, तो किसी भी विशाल आयोजन को बिना किसी विघ्न और अपराध के सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सकता है।
(अस्वीकरण: ये लेखिका के निजी विचार हैं। लेख में दी गई जानकारी और तथ्यों के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। लेखिका प्रो. सोनाली सिंह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में कार्यरत हैं।)
रक्षाबंधन के इस सफल आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि जब नीयत साफ हो, नीति स्पष्ट हो और प्रशासनिक तंत्र चुस्त-दुरुस्त हो, तो किसी भी विशाल आयोजन को बिना किसी विघ्न और अपराध के सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सकता है।
(अस्वीकरण: ये लेखिका के निजी विचार हैं। लेख में दी गई जानकारी और तथ्यों के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। लेखिका प्रो. सोनाली सिंह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में कार्यरत हैं।)