फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Events Coverage ›   Uttar Pradesh Employment and Labour Women Workforce increase in years UP Govt news and updates

UP Employment and Labour: यूपी में कैसे आठ साल में ढाई गुना बढ़ी महिला वर्कफोर्स, जानें सरकार ने क्या उठाए कदम

Tue, 19 May 2026 05:55 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 19 May 2026 05:55 PM IST
विज्ञापन
सार
उत्तर प्रदेश में बीते वर्षों में कई ऐसी योजनाएं और नीतियां लागू की गई हैं, जिनसे श्रम बल में महिलाओं की हिस्सेदारी में तेज बढ़ोतरी हुई है। इनमें महिलाओं को रात में काम करने की अनुमति देने से लेकर घर से दूर रहकर काम करने वाली महिलाओं के लिए हॉस्टल जैसी सुविधाएं देना भी शामिल है। 
loader
Uttar Pradesh Employment and Labour Women Workforce increase in years UP Govt news and updates
उत्तर प्रदेश में श्रमबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश में बीते कुछ वर्षों में रोजगार और श्रमबल में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। अगर आंकड़ों की बात करें तो वित्त वर्ष 2017-18 के मुकाबले 2023-24 में यूपी में कार्यबल में महिलाओं का आंकड़ा करीब ढाई गुना बढ़ चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूपी की इस बदली हुई स्थिति की एक बड़ी वजह संस्थांगत और सरकारी नीतियां हैं, जिनसे महिलाओं की भागीदारी अब धीरे-धीरे उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है।  


उत्तर प्रदेश में महिला कामगारों (महिला श्रम भागीदारी दर - एफएलपीआर) की स्थिति में ऐतिहासिक और ढांचागत सुधार हुआ है, जिसके तहत महिला वर्कफोर्स की भागीदारी 2017-18 के 14.2% से तीन गुना बढ़कर 36% से ज्यादा हो गई है। राज्य में सुरक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता, गतिशीलता और कानूनी अधिकारों को केंद्र में रखकर किए गए नीतिगत बदलावों से यह मुमकिन हुआ है।

कैसे बेहतर हुई है महिला कामगारों के लिए स्थिति 

सुरक्षा और कामकाजी स्वतंत्रता

सुरक्षित नाइट शिफ्ट की अनुमति: उत्तर प्रदेश सरकार ने सुरक्षा, स्वास्थ्य और ओवरटाइम के कड़े नियमों के साथ महिलाओं को शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट शिफ्ट में काम करने की कानूनी मंजूरी दी है।

मिशन शक्ति 5.0 और सेफ सिटी प्रोजेक्ट: महिलाओं को सुरक्षित कामकाजी माहौल देने के लिए थानों में पिंक बूथ स्थापित किए गए हैं और कार्यस्थलों के रूटों पर सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत निगरानी बढ़ाई गई है।

गतिशीलता और बुनियादी ढांचा


रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना: यूपी सरकार के 2024 के बजट में स्कूल और कामकाजी महिलाओं की गतिशीलता सुधारने के लिए ₹400 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे महिलाओं के लिए घर से दूर जॉब्स या ट्रेनिंग सेंटर्स तक पहुंचना आसान हुआ है।

वर्किंग विमेन हॉस्टल्स: घर से दूर रहकर नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए राज्य के सात प्रमुख जिलों में वर्किंग वीमेन हॉस्टल्स (कामकाजी महिला छात्रावास) का निर्माण किया जा रहा है।

ग्रामीण और सूक्ष्म उद्यमिता


स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) नेटवर्क: राज्य में 10 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों के जरिए लगभग 1 करोड़ महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ा गया है।

माइक्रो-एंटरप्राइज सखी मॉडल: ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को आजीविका से आगे बढ़ाकर उद्यमी बनाने के लिए 13,000 से अधिक माइक्रो-एंटरप्राइज सखियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो आगे चलकर 6.5 लाख महिला-एलईडी सूक्ष्म उद्योगों को वित्तीय और मार्केटिंग सहायता प्रदान करेंगी।

बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी: राज्य की 57,000 ग्राम पंचायतों में बीसी सखियों की तैनाती की गई है, जिससे न केवल महिलाओं को रोजगार मिला है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर वित्तीय समावेशन भी बढ़ा है। 

वित्तीय और कानूनी अधिकार


स्वामित्व अधिकार (पीएम स्वामित्व योजना): महिलाओं के नाम पर भूमि और संपत्ति के मालिकाना हक (प्रॉपर्टी राइट्स) दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे लोन प्राप्त करने और व्यवसाय शुरू करने में उनकी स्वायत्तता बढ़ी है।

सरकारी नौकरियों में भागीदारी: महिला उत्थान नीतियों के तहत अकेले सरकारी विभागों में 1.5 लाख से अधिक महिलाओं को सुरक्षित सरकारी नौकरियां दी गई हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed