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विचार: 40 हजार रुपये देने का एलान, पर कितने खरे उतरे अखिलेश के पहले के वादे?
Thu, 27 Aug 2026 07:48 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
अवनीश त्यागी
अवनीश त्यागी
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 27 Aug 2026 07:48 PM IST
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अखिलेश यादव के साथ में कई सपा सांसद।
- फोटो : अमर उजाला
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव अब उत्तर प्रदेश की महिलाओं से एक नया और बड़ा वादा लेकर आए हैं। सपा का दावा है कि उनकी सत्ता आई तो गरीब महिलाओं को 40 हजार रुपये देंगे। इस नए वादे को समझने से पहले जरूरी है कि हम उनके पुराने कार्यकाल में महिलाओं के नाम पर शुरू की गई योजनाओं और उनके अंजाम पर एक नजर डालें।
रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना
2012 में सत्ता में आते ही अखिलेश सरकार ने रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना की शुरुआत की थी। इसका मकसद गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों में महिला मुखिया को हर महीने 400 रुपये की आर्थिक मदद देना था, जो दो छमाही किस्तों में दी जानी थी। यह योजना अपने नाम से ही महिला-केंद्रित और सशक्तिकरण से जुड़ी दिखती थी। लेकिन महज दो साल के भीतर, 2014 में इसी सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया और उसकी जगह समाजवादी पेंशन योजना ले आई। तर्क दिया गया कि नई योजना का दायरा बढ़ाकर करीब 40 लाख गरीब परिवारों तक पहुंचाया जाएगा, जबकि उस समय की रिपोर्टों के अनुसार रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना से पहले ही करीब 25 लाख परिवार लाभान्वित हो रहे थे।
रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना पूर्ववर्ती मायावती सरकार की महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना का ही नाम बदला हुआ स्वरूप थी। यानी सरकार बदलते ही योजनाओं के नाम बदलने और फिर कुछ ही समय में उन्हें भी बंद कर देने का यह सिलसिला उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चला आ रहा है।
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रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना
2012 में सत्ता में आते ही अखिलेश सरकार ने रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना की शुरुआत की थी। इसका मकसद गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों में महिला मुखिया को हर महीने 400 रुपये की आर्थिक मदद देना था, जो दो छमाही किस्तों में दी जानी थी। यह योजना अपने नाम से ही महिला-केंद्रित और सशक्तिकरण से जुड़ी दिखती थी। लेकिन महज दो साल के भीतर, 2014 में इसी सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया और उसकी जगह समाजवादी पेंशन योजना ले आई। तर्क दिया गया कि नई योजना का दायरा बढ़ाकर करीब 40 लाख गरीब परिवारों तक पहुंचाया जाएगा, जबकि उस समय की रिपोर्टों के अनुसार रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना से पहले ही करीब 25 लाख परिवार लाभान्वित हो रहे थे।
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रानी लक्ष्मीबाई पेंशन योजना पूर्ववर्ती मायावती सरकार की महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना का ही नाम बदला हुआ स्वरूप थी। यानी सरकार बदलते ही योजनाओं के नाम बदलने और फिर कुछ ही समय में उन्हें भी बंद कर देने का यह सिलसिला उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चला आ रहा है।
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हमारी बेटी, उसका कल योजना
ठीक उसी दौर में, महिलाओं और बेटियों के हित में एक और बड़ा वादा 2012 में ही किया गया था जो कागज पर बेहद संवेदनशील और जरूरी दिखाई देती थी। योजना का नाम था- 'हमारी बेटी, उसका कल' योजना। इसका उद्देश्य था अल्पसंख्यक समुदाय की गरीब बेटियों को 10वीं कक्षा के बाद आगे की पढ़ाई या विवाह के लिए 30 हजार रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता देना। यह योजना सरकार ने 2013-14 में इसके तहत करीब 99,500 लड़कियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा और इसके लिए 298.50 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित किया। लेकिन यह महत्वाकांक्षी योजना ज्यादा दिन नहीं चल पाई। 'हमारी बेटी, उसका कल' और उसके साथ शुरू हुई 'पढ़ें बेटियां, बढ़ें बेटियां' योजना केवल एक साल तक ही चल सकीं।
ठीक उसी दौर में, महिलाओं और बेटियों के हित में एक और बड़ा वादा 2012 में ही किया गया था जो कागज पर बेहद संवेदनशील और जरूरी दिखाई देती थी। योजना का नाम था- 'हमारी बेटी, उसका कल' योजना। इसका उद्देश्य था अल्पसंख्यक समुदाय की गरीब बेटियों को 10वीं कक्षा के बाद आगे की पढ़ाई या विवाह के लिए 30 हजार रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता देना। यह योजना सरकार ने 2013-14 में इसके तहत करीब 99,500 लड़कियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा और इसके लिए 298.50 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित किया। लेकिन यह महत्वाकांक्षी योजना ज्यादा दिन नहीं चल पाई। 'हमारी बेटी, उसका कल' और उसके साथ शुरू हुई 'पढ़ें बेटियां, बढ़ें बेटियां' योजना केवल एक साल तक ही चल सकीं।
अब- स्त्री सम्मान समृद्धि योजना
उत्तर प्रदेश में चुनाव दिखाई दे रहा है। इसे देखते हुए अखिलेश यादव 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' के जरिए गरीब महिलाओं को 40 हजार रुपये देने का वादा कर रहे हैं, साथ ही भविष्य में इंटर पास बेटियों को लैपटॉप देने और महिला सुरक्षा में किसी तरह का समझौता न करने का भरोसा भी दिला रहे हैं। 40 हजार रुपये देने जैसा वादा वित्तीय रूप से कितना व्यावहारिक है, इसे किस बजट से पूरा किया जाएगा, और क्या यह योजना भी पिछली योजनाओं की तरह चुनाव बाद बदल दी जाएगी या बंद कर दी जाएगी, इन सवालों का कोई ठोस जवाब फिलहाल सामने नहीं है।
(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेखक अवनीश त्यागी, राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार हैं।)
उत्तर प्रदेश में चुनाव दिखाई दे रहा है। इसे देखते हुए अखिलेश यादव 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' के जरिए गरीब महिलाओं को 40 हजार रुपये देने का वादा कर रहे हैं, साथ ही भविष्य में इंटर पास बेटियों को लैपटॉप देने और महिला सुरक्षा में किसी तरह का समझौता न करने का भरोसा भी दिला रहे हैं। 40 हजार रुपये देने जैसा वादा वित्तीय रूप से कितना व्यावहारिक है, इसे किस बजट से पूरा किया जाएगा, और क्या यह योजना भी पिछली योजनाओं की तरह चुनाव बाद बदल दी जाएगी या बंद कर दी जाएगी, इन सवालों का कोई ठोस जवाब फिलहाल सामने नहीं है।
(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेखक अवनीश त्यागी, राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार हैं।)