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Pooja Pal Birthday Special: शादी के नौ दिन बाद पति को खोया, अतीक के खिलाफ लड़ी लंबी लड़ाई, अब BJP उपाध्यक्ष

Mon, 20 Jul 2026 06:19 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 20 Jul 2026 06:19 PM IST
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Pooja Pal Birthday special Atiq Ahmad Case UP BJP Vice President news and updates
विधायक पूजा पाल। - फोटो : amar ujala
राजनीति में कई ऐसे चेहरे हैं, जो विरासत से नहीं बल्कि अपने संघर्ष के दम पर अपनी पहचान बनाते हैं। पूजा पाल भी उन्हीं नेताओं में से एक हैं। उनकी कहानी उस महिला की कहानी है जिसने शादी के महज नौ दिन बाद पति खो दिया, माफिया के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी, जान से मारने की धमकियों का सामना किया, विधानसभा पहुंचीं और उत्तर प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष के पद तक का सफर तय किया। 
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वर्तमान में पूजा पाल कौशांबी की चायल विधानसभा सीट से विधायक हैं। उनके पति और प्रयागराज पश्चिमी विधानसभा सीट से बसपा विधायक राजू पाल की 25 जनवरी 2005 को प्रयागराज में अतीक अहमद और उसके गुर्गों ने सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। उस वक्त पूजा पाल और राजू पाल की शादी के सिर्फ 9 दिन ही हुए थे। 
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पहले चुनाव में मिली निराशा 
राजू पाल की हत्या के बाद प्रयागराज पश्चिमी विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ तो बहुजन समाज पार्टी ने पूजा पाल को प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में एक तरफ पति की हत्या के बाद राजनीति में उतरीं पूजा पाल थीं, तो दूसरी ओर प्रत्याशी के तौर पर अशरफ था और उसके भाई माफिया अतीक अहमद का प्रभाव था। पूजा पाल अशरफ के सामने चुनाव नहीं जीत सकीं। 

डटकर लड़ीं, फिर अतीक को हराया
2007 के विधानसभा चुनाव हुए तब बसपा ने एक बार फिर पूजा पाल को प्रत्याशी बनाया और इस बार उन्होंने जीत भी दर्ज की। इसी के साथ पूजा पाल पहली बार विधानसभा पहुंची। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने प्रयागराज पश्चिमी सीट से लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। इस चुनाव में उनके सामने अशरफ नहीं बल्कि खुद अतीक अहमद था। अतीक अहमद को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि 2017 में मोदी लहर में पूजा पाल जीत न सकीं लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कौशांबी की चायल विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर तीसरी बार विधायक बनीं।

न्याय की लड़ाई लड़तीं रहीं
पूजा पाल बसपा और समाजवादी पार्टी जैसे दलों में भले ही रहीं, लेकिन अपने पति के हत्यारों के खिलाफ उनकी लड़ाई कभी कमजोर नहीं हुई। इस दौरान उन्हें अतीक की तरफ से गवाही न देने और केस वापस लेने के लिए धमकियां भी मिलीं। इस मामले की जांच कर रही सीबीआई ने जब अतीक अहमद और अन्य आरोपियों के खिलाफ लखनऊ की सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की, तभी से पूजा पाल पर गवाही न देने का दबाव बनाया जाने लगा।

19 साल बाद मिला इंसाफ
29 मार्च 2024 को राजू पाल हत्याकांड में फैसला सुनाते हुए लखनऊ स्थित सीबीआई कोर्ट की विशेष न्यायाधीश कविता मिश्रा ने सात आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 147, 148, 149, 302 और 307 के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, इस मामले में आरोपी माफिया अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ फैसला आने से पहले ही मारे जा चुके थे। पति के हत्यारों को सजा मिलने के बाद पूजा पाल ने इसे न्याय की जीत बताया।
 
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योगी सरकार को धन्यवाद देने के बाद बढ़ीं सपा से दूरियां
सूबे में योगी सरकार आने के साथ ही जिस तरह के अतीक के आतंक राज के खात्मे को लेकर एक्शन लिए गए उसको लेकर पूजा पाल ने जीरो टॉलरेंस नीति की जमकर सराहना भी की और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार भी जताया। यहीं से पूजा पाल और सपा नेतृत्व में दूरियां बढ़ने लगीं। आखिरकार पूजा पाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद पूजा पाल भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गईं। अब भाजपा ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देते हुए उत्तर प्रदेश भाजपा का उपाध्यक्ष नियुक्त किया है।
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