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Gujarat: पीएम मोदी के ‘नेट जीरो’ विजन की दिशा में बड़ी उपलब्धि, एक साल में कार्बन उत्सर्जन में रिकॉर्ड कमी
Tue, 21 Jul 2026 08:08 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
इवेंट्स डेस्क, अमर उजाला
इवेंट्स डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 21 Jul 2026 08:08 PM IST
सार
वित्त वर्ष 2025-26 में रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों से रिकॉर्ड 67,655 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ। पिछले पांच वर्षों में कुल 179 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन को वातावरण में घुलने से रोकने में सफलता मिली है।
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कार्बन उत्सर्जन में नेट जीरो पहुंचने का लक्ष्य।
- फोटो : एक्स
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्लीन और ग्रीन इंडिया के विजन को देश के विकास का महत्वपूर्ण आधार माना है। उनका स्पष्ट दृष्टिकोण रहा है कि आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य मिल सके। प्रधानमंत्री के इसी विजन को गति देते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात ने पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
एक साल में कार्बन उत्सर्जन में सबसे बड़ी कटौती
वित्त वर्ष 2025-26 में गुजरात ने केवल एक वर्ष के भीतर 49.79 मिलियन टन (mtCO₂e) कार्बन उत्सर्जन को वातावरण में जाने से रोकने में सफलता हासिल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह राज्य के इतिहास में किसी एक वर्ष में दर्ज की गई सबसे बड़ी कार्बन कटौती है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में सौर, पवन और अन्य रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों का तेज़ी से हुआ विस्तार प्रमुख कारण रहा है। इसी के परिणामस्वरूप गुजरात ने मात्र एक वर्ष में 67,655 मिलियन यूनिट ग्रीन बिजली का रिकॉर्ड उत्पादन भी दर्ज किया है।
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एक साल में कार्बन उत्सर्जन में सबसे बड़ी कटौती
वित्त वर्ष 2025-26 में गुजरात ने केवल एक वर्ष के भीतर 49.79 मिलियन टन (mtCO₂e) कार्बन उत्सर्जन को वातावरण में जाने से रोकने में सफलता हासिल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह राज्य के इतिहास में किसी एक वर्ष में दर्ज की गई सबसे बड़ी कार्बन कटौती है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में सौर, पवन और अन्य रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों का तेज़ी से हुआ विस्तार प्रमुख कारण रहा है। इसी के परिणामस्वरूप गुजरात ने मात्र एक वर्ष में 67,655 मिलियन यूनिट ग्रीन बिजली का रिकॉर्ड उत्पादन भी दर्ज किया है।
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पांच वर्षों में 179 मिलियन टन उत्सर्जन में कमी
राज्य सरकार की ग्रीन एनर्जी पहलों, पर्यावरण हितैषी नीतियों और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में तेज़ी से हुए विस्तार के परिणामस्वरूप गुजरात पिछले पांच वर्षों में कुल 179 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन को वातावरण में घुलने से रोकने में सफल रहा है। आँकड़ों के अनुसार, राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 442 मिलियन टन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित होती है। ऐसे में बीते पांच वर्षों के दौरान कुल वार्षिक उत्सर्जन के लगभग 40 प्रतिशत के बराबर कार्बन उत्सर्जन में कमी दर्ज करना इस बात का प्रमाण है कि गुजरात ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच प्रभावी संतुलन स्थापित करते हुए सतत एवं हरित विकास का मजबूत मॉडल प्रस्तुत किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े स्तर पर ग्रीन एनर्जी के उपयोग से कोयला और अन्य जीवाश्म ईंधनों की खपत कम होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में सीधे कमी आती है। यही कारण है कि आज दुनिया भर में रिन्यूएबल एनर्जी को जलवायु परिवर्तन से मुकाबले का सबसे प्रभावी माध्यम माना जा रहा है।
राज्य सरकार की ग्रीन एनर्जी पहलों, पर्यावरण हितैषी नीतियों और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में तेज़ी से हुए विस्तार के परिणामस्वरूप गुजरात पिछले पांच वर्षों में कुल 179 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन को वातावरण में घुलने से रोकने में सफल रहा है। आँकड़ों के अनुसार, राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 442 मिलियन टन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित होती है। ऐसे में बीते पांच वर्षों के दौरान कुल वार्षिक उत्सर्जन के लगभग 40 प्रतिशत के बराबर कार्बन उत्सर्जन में कमी दर्ज करना इस बात का प्रमाण है कि गुजरात ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच प्रभावी संतुलन स्थापित करते हुए सतत एवं हरित विकास का मजबूत मॉडल प्रस्तुत किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े स्तर पर ग्रीन एनर्जी के उपयोग से कोयला और अन्य जीवाश्म ईंधनों की खपत कम होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में सीधे कमी आती है। यही कारण है कि आज दुनिया भर में रिन्यूएबल एनर्जी को जलवायु परिवर्तन से मुकाबले का सबसे प्रभावी माध्यम माना जा रहा है।
आम आदमी की जिंदगी से कैसे जुड़ा है ‘कार्बन उत्सर्जन’ का मुद्दा?
कार्बन उत्सर्जन केवल पर्यावरण का विषय नहीं है, बल्कि यह सीधे आम लोगों के स्वास्थ्य, मौसम और जीवनशैली से जुड़ा मुद्दा है। वातावरण में बढ़ता कार्बन उत्सर्जन ग्लोबल वार्मिंग, अत्यधिक गर्मी, अनियमित बारिश, बाढ़ और सूखे जैसी समस्याओं को बढ़ाता है। इसके विपरीत, ग्रीन एनर्जी के उपयोग से प्रदूषण कम होता है, हवा की गुणवत्ता बेहतर बनती है और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों में भी कमी आती है। पर्यावरण विशेषज्ञ मानते हैं कि सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोत भविष्य में न केवल पर्यावरण संरक्षण का आधार बनेंगे, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के भी महत्वपूर्ण स्तंभ साबित होंगे।
संस्थागत प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण को मिली नई रफ्तार
इस शानदार उपलब्धि के ज़रिए राज्य सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि गुजरात सिर्फ निर्धारित लक्ष्य पूरे करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ नए मानक स्थापित कर रहा है। राज्य में लागू की गई इंटीग्रेटेड आरई पॉलिसी 2026, ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी और गुजरात पंप स्टोरेज पॉलिसी जैसी नीतियों ने पर्यावरण संरक्षण के अभियान को एक नई रफ्तार दी है।
कार्बन उत्सर्जन केवल पर्यावरण का विषय नहीं है, बल्कि यह सीधे आम लोगों के स्वास्थ्य, मौसम और जीवनशैली से जुड़ा मुद्दा है। वातावरण में बढ़ता कार्बन उत्सर्जन ग्लोबल वार्मिंग, अत्यधिक गर्मी, अनियमित बारिश, बाढ़ और सूखे जैसी समस्याओं को बढ़ाता है। इसके विपरीत, ग्रीन एनर्जी के उपयोग से प्रदूषण कम होता है, हवा की गुणवत्ता बेहतर बनती है और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों में भी कमी आती है। पर्यावरण विशेषज्ञ मानते हैं कि सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोत भविष्य में न केवल पर्यावरण संरक्षण का आधार बनेंगे, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के भी महत्वपूर्ण स्तंभ साबित होंगे।
संस्थागत प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण को मिली नई रफ्तार
इस शानदार उपलब्धि के ज़रिए राज्य सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि गुजरात सिर्फ निर्धारित लक्ष्य पूरे करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ नए मानक स्थापित कर रहा है। राज्य में लागू की गई इंटीग्रेटेड आरई पॉलिसी 2026, ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी और गुजरात पंप स्टोरेज पॉलिसी जैसी नीतियों ने पर्यावरण संरक्षण के अभियान को एक नई रफ्तार दी है।
ऊर्जा विभाग की कड़ी निगरानी में गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड, जीईडीए और जीपीसीएल जैसी संस्थाओं के निरंतर प्रयासों का ही नतीजा है कि आज राज्य के पावर जनरेशन मिक्स में ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है, जिससे हवा की गुणवत्ता में भारी और सकारात्मक सुधार आया है।
2030 तक 100 गीगावॉट क्षमता का लक्ष्य
वर्ष 2070 तक भारत को नेट जीरो बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साकार करने में गुजरात अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसी दिशा में राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक 100 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है। गुजरात की यह उपलब्धि केवल राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के वैश्विक जलवायु लक्ष्यों और पेरिस समझौते के तहत किए गए संकल्पों को मजबूत आधार प्रदान करती है। ग्रीन एनर्जी और सतत विकास की दिशा में गुजरात आज देश के लिए एक प्रभावशाली मॉडल बनकर उभर रहा है।
2030 तक 100 गीगावॉट क्षमता का लक्ष्य
वर्ष 2070 तक भारत को नेट जीरो बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को साकार करने में गुजरात अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसी दिशा में राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक 100 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है। गुजरात की यह उपलब्धि केवल राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के वैश्विक जलवायु लक्ष्यों और पेरिस समझौते के तहत किए गए संकल्पों को मजबूत आधार प्रदान करती है। ग्रीन एनर्जी और सतत विकास की दिशा में गुजरात आज देश के लिए एक प्रभावशाली मॉडल बनकर उभर रहा है।