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डिस्कवरी चैनल खोलेगा सुभाष चंद्र बोस से जुड़े राज

Fri, 15 Jul 2016 01:09 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 15 Jul 2016 01:09 PM IST
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Discovery channel make a programme on subhash chandra bose

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक सुभाश चंद्र बोस की मृत्यु या उनके अचानक गायब हो जाने को लेकर बना हुआ रहस्य सात दषकों से कई भावनात्मक और गर्मागरम बहसों, हजारों कल्पनाओं, विवादों और अद्भूत उत्सुकता का विशय बना हुआ है।

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डिस्कवरी चैनल लेकर आया है सुभाश चंद्र बोस यानी नेताजी के साथ घटित घटनाओं की जांच पड़ताल करने वाली एक फिल्म सुभाश चंद्र बोसः द मिस्ट्री। यह सवाल विभिन्न चरित्रों, जगहों और अंतरराश्ट्रीय राजनीति के ईर्दगिर्द घूमता रहता है। क्या बोस की मृत्यु ताइपेई में एक विमान दुर्घटना में ही हुई, जैसा कि आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया गया?
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क्या यह सच है कि बोस भारत वापस आए और अपनी पहचान छिपाकर एक साधु की तरह जीवन व्यतीत करते रहे? क्यों भारत सरकार ने उनकी मृत्यु के रहस्यों से जुड़ी फाइलों को 70 वर्शों तक गोपनीय रखा? जनवरी, 2016 में सार्वजनिक की गई फाइलों में क्या है?

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नेताजी विमान दुर्घटना में नहीं मारे जा सकते

Discovery channel make a programme on subhash chandra bose
subha

सोमवार, 18 जुलाई को रात 9 बजे प्रसारित होने वाले डिस्कवरी चैनल के एक घंटे के खास कार्यक्रम सुभाश चंद्र बोसः द मिस्ट्री में एक युवा प्रवासी भारतीय उद्यमी सिद्धार्थ सतभाई के बारे में बताया गया है जिन्होंने ब्रिटिष सेना के रॉयल सिग्नल्स रेजीमेट के एक पूर्व सैनिक नील मेलर की मदद से एक अनजान इंटरनेट ग्रुप द्वारा मुहैया कराई गई एक वीडियो और फोटोग्राफी सामग्री का इमेज एनालिसिस किया।

इस फुटेज में ’’द ताशकंद मैन’’ नामक एक व्यक्ति की ओर इशारा किया गया है जो 10 जनवरी, 1966 को हुए भारत-पाक ताषकंद घोषणा के दौरान मौजूद थे। आधुनिक वैज्ञानिक और चेहरे के विष्लेशण के आधार पर इस जांच में बताया गया कि चश्मा लगाया वह व्यक्ति नेताजी हो सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अगर नेताजी 1966 में हुए ताषकंद घोषणा में मौजूद थे तो वह 18 अगस्त, 1945 को हुए विमान दुर्घटना में मारे नहीं जा सकते, जैसा कि आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया गया।

नेताजी से जुड़ी कई बातें सामनें आएंगी

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विभिन्न विषेशज्ञों के किए गए साक्षात्कार के माध्यम से डिस्कवरी चैनल ने इस रहस्य के बारे में विशेष सूचनाओं का परीक्षण किया। इस फिल्म के दौरान मास्को स्टेट यूनिवर्सिटी की विजिटिंग प्रोफेसर और लेखक डॉ. पुरबी रॉय और वर्साय पैक्ट के सेवानिवृत्त मेजर जनरल एलेक्जेंडर कोलिसनिकोव से मुलाकात भी होती है जो दूसरे विष्वयुद्ध के बाद के रूस में नेताजी की मौजूदगी के संबंध में रूस में उपलब्ध जानकारियों के बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारियां देते हैं।

इस फिल्म में भारतीय राष्ट्रीय सेना के इतिहास के भुला दिए जा चुके अध्याय लियोन प्रॉचैंडी की कहानी का भी खुलासा होता है। उनके पोते प्रषांत मोरे द्वारा बताई गई उनकी कहानी सुभाष चंद्र बोस के रहस्य के बारे में एक और सवाल खड़ा करती है। पेशे से लेखक एवं इतिहासकार प्रषांत मोरे के मुताबिक जिस दिन ताइपेई में हुई विमान दुर्घटना में बोस को मरा हुआ बताया जाता है, उस दिन तो वह सैगॉन (अब वियतनाम) में प्रॉचैंडी मैंषन में थे। उनका मानना है कि बोस ने आईएनए के वित्त संबंधी काम का जिम्मा लियोन प्रॉचैंडी को सौंपा था जो बोस के दक्षिण पूर्व एशिया के अभियान में उनके प्रमुख सहयोगी थे।

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फिल्म में इससे आगे द सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज़ (सीएसडीएस) में एसोसिएट प्रोफेसर और इतिहासकार डॉ. प्रथम बनर्जी ने आजादी से पहले के भारत में रहस्यमय समाजों के उदय के बारे में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर बोस के वामपंथी झुकाव और कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों के साथ उनके जुड़ाव के बारे में जानकारी दी।

इस फिल्म में नेताजी के सहयोगियों और उनके पोते आशाष राय और अभिजीत राय सहित उनके परिवार के सदस्यों से भी बात की गई है। अभिजीत नेताजी की कोशिशों को याद करते हैं और 1941 में एक नई इटैलियन पहचान के साथ अपने पैतृक आवास एल्गिन रोड, कलकत्ता से बर्लिन तक जाने और जर्मन सेना में वेरमैट रेजिमेंट की शुरूआत करने की बात बताते हैं।

विभिन्न पहलुओं को एक खांचे में ढालकर डिस्कवरी चैनल की फिल्म सुभाश चंद्र बोसः द मिस्ट्री कई विवादों की ओर इशारा करती है और यह निश्कर्श निकालने की कोषिष करती है कि बोस का रहस्य क्या मौन रहने का एक अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र था या भारत सरकार के पास पहले से इसका जवाब था? एक सच की तलाष की कोशिश देखिए डिस्कवरी चैनल के सुभाश चंद्र बोसः द मिस्ट्री में सोमवार, 18 जुलाई को रात 9 बजे।

फिल्म सुभाश चंद्र बोसः द मिस्ट्री की शुरूआत की है डिस्कवरी चैनल इंडिया ने और इसका निर्माण किया है इकबाल मल्होत्रा, एआईएम टेलीविजन प्राइवेट लिमिटेड ने।

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