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Mayadhar Raut Death: ओडिसी डांसर-कोरियोग्राफर मायाधर राउत का निधन, 92 की उम्र में ली आखिरी सांस

Sat, 22 Feb 2025 01:47 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Sat, 22 Feb 2025 01:47 PM IST
सार

Mayadhar Raut Death: लोकप्रिय ओडिसी डांसर-कोरियोग्राफर मायाधर राउत का 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने आज शनिवार को अपने दिल्ली स्थित आवास में अंतिम सांस ली।
 

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Renowned Odissi dancer Mayadhar Raut at his Delhi home his son Manoj Raut said
मायाधर राउत का निधन - फोटो : पीटीआई

विस्तार

मशहूर ओडिसी डांसर मायाधर राउत ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। उन्होंने आज शनिवार को अपने दिल्ली स्थित घर में आखिरी सांस ली। मायाधर राउत की उम्र 92 वर्ष थी। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक मायाधर राउत के निधन की पुष्टि उनके बेटे मनोज राउत ने की है। 

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आज होगा अंतिम संस्कार
मनोज राउत ने पीटीआई को बताया, 'उन्होंने आज सुबह अपने पोते-पोतियों और परिवार के बाकी सदस्यों के साथ नाश्ता किया। उन्हें कोई बीमारी नहीं थी। बुजुर्गावस्था के चलते उनका निधन हो गया'। उनका अंतिम संस्कार शनिवार को लोधी रोड श्मशान घाट पर किया जाएगा।

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सात साल की आयु से लिया नृत्य प्रशिक्षण
06 जुलाई 1933 को ओडिशा में जन्मे पद्मश्री पुरस्कार विजेता मायाधर राउत को 'ओडिसी नृत्य का जनक' माना जाता है। उन्होंने शास्त्र-आधारित ज्ञान के साथ 1950 के दशक में ओडिसी के पुनरुद्धार का नेतृत्व किया था। वे नृत्य शैली के अग्रणी कलाकारों में शुमार रहे। मायाधर राउत का प्रशिक्षण सात वर्ष की आयु में 'गोटीपुआ' नृत्य शैली सीखने से शुरू हुआ।

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'गोटीपुआ नृत्य' प्रस्तुत करने वाले प्रथम व्यक्ति
मायाधर राउत 1944 में मंच पर 'गोटीपुआ नृत्य' प्रस्तुत करने वाले पहले व्यक्ति थे। बाद में, उन्होंने ओडिसी नृत्य को सहेजने और आगे बढ़ाने का काम किया, ताकि इसे शास्त्र-आधारित शास्त्रीय नृत्य शैली का दर्जा मिल सके। राउत 1952 में कटक में कला विकास केंद्र के संस्थापक सदस्य थे। यह भारत का पहला संस्थान था, जहां ओडिसी पढ़ाई जाती थी।

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जयन्तिका एसोसिएशन की स्थापना की
मायाधर राउत ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर 1959 में जयन्तिका एसोसिएशन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य ओडिसी नृत्य के संहिताकरण और विकास पर काम करना था। राउत को ओडिसी के अध्ययन में 'संचारी भाव', 'मुद्रा विनियोग' और 'रस सिद्धांत' को शामिल करने का श्रेय दिया जाता है। 

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