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फिल्म समीक्षा/अ फ्लाइंग जट: ऊंची नहीं उड़ान

Thu, 25 Aug 2016 12:57 PM IST
रवि बुले/ मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
रवि बुले/ मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला Updated Thu, 25 Aug 2016 12:57 PM IST
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Tiger shroff's Film A flying jatt review

निर्माताः एकता कपूर

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निर्देशकः  रेमो डिसूजा
सितारेः टाइगर श्रॉफ, जैकलीन फर्नांडिज, नाथन जोंस, केके मेनन, अमृता सिंह
रेटिंग **

अनेक फिल्में होती हैं जिन्हें देखते हुए समझ नहीं आता कि इन्हें क्यों बनाया गया? एंटरटेनमेंट, हालांकि आसान जवाब हो सकता है मगर फिल्म एंटरटेन भी न करे तब? अ फ्लाइंग जट ऐसी ही फिल्म है। जब लक्ष्यहीन सुपरहीरो गढ़ा जाएगा तो आप पाएंगे कि उसके पास करने को खास कुछ नहीं है। इसलिए वह इस मुश्किल समय में हंसोड़ जैसी हरकतें करता है। मां उससे घर के जाले साफ कराती है और सब्जी मंगाती है। कई बार बचपन की स्मृतियों के जाले में कोई पुराना आइडिया अटका रह जाता है।

अ फ्लाइंग जट के सह-लेखक और निर्देशक रेमो डिसूजा की स्मृति में फंसा ऐसा ही एक आइडिया है, जिसे फिल्म निर्माण में समर्थ होने के बाद उन्होंने झाड़-पोंछ कर पेश किया। परंतु वह इसे सिने-लेखन की आधुनिक तकनीक के साथ चमका पाते तो बेहतर रहता। अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुपर हीरोज को छोड़ दीजिए, फ्लाइंग जट देसी कृष से भी हर मामले में पिछड़ा है। यह बचकाना प्रयास है, जो पर्यावरण संरक्षण पर लंबे उबाऊ भाषण का सा आभास कराता है।
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फिल्म में एक नदी किनारे मन्नतें पूरी करने वाला पेड़ है। दूसरे तट पर प्रदूषण उगलने वाली फैक्ट्री है। नदी पर पुल बन जाए तो हर मिनट में लाखों कमाने वाला मल्होत्रा (केके मेनन) करोड़ों कमाएगा। मगर पेड़ जिस जमीन पर है वह भोलेभाले हीरो (टाइगर श्रॉफ) और उसकी तेज तर्रार मां (अमृता सिंह) की संपत्ति है। मां किसी कीमत पर जमीन बेचने को राजी नहीं। ऐसे में मल्होत्रा षड्यंत्र रचता है और प्रकृति का न्याय यह कि उससे अमन के भीतर सुपरहीरो वाली शक्तियां पैदा हो जाती हैं! अब वह कुछ भी कर सकता है।
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वह एयरपोर्ट पर बंधक बनाए लोगों को आतंकियों से बचाता है। सड़क दुघर्टनाएं रोकता है। दुराचारियों से लड़कियों की रक्षा करता है। वगैरह-वगैरह। मगर महत्वाकांक्षी मल्होत्रा उसे खत्म करने के लिए सुपरशक्तियों से लैस दानवाकार राका (नाथन जोंस) को मिशन पर लगा देता है! राका को गंदगी और धुएं के प्रदूषण से ताकत मिलती है, जो दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है। पल-पल बलशाली होते राका को सुपर हीरो कैसे हरा पाएगा?

ना बच्चों की फिल्म है, ना ही जवानों की

Tiger shroff's Film A flying jatt review

फिल्म में न तो कोई नया अनोखा तकनीकी जादू है और न ही कथा/पटकथा/दृश्यों में रोमांच। टाइगर में सुपर हीरो वाला अंदाज नहीं दिखता। वह उससे कई दर्जा नीचे हैं। यहां न तो उनका ऐक्शन धमाल है और न ऐक्टिंग में कमाल। यहां हीरोपंती और बागी जैसा रोमांस भी नहीं है। जिस बीट पे बूटी का खूब हल्ला हुआ, वह भी यहां टूटी हुई है। टाइगर के फैन्स में छह से दस साल के बच्चों की संख्या बड़ी है। फिल्म को उन्हीं का सहारा है।

किशोरवय भी इससे खुद को कनेक्ट कर पाने में नाकाम रहेंगे। जैकलीन फर्नांडिस प्रभावित नहीं करतीं। उनके नैन-नक्श, ऐनक और अभिनय निराशाजनक हैं। हॉलीवुड अभिनेता नाथन जोंस बेकार गए। केके मेनन अच्छे अभिनेता हैं, दो-एक दृश्यों में उनका कुटिल अंदाज यह फिर साबित करता है। जबकि अमृता सिंह मां की भूमिका में कुछ लोगों को पसंद आ सकती हैं। यह फ्लाइंग जट ऊंचाइयों से डरता है जबकि सुपर हीरो हर लिहाज से ऊंचे उड़ते हैं। फिल्म आपको किसी ऐसी उड़ान पर नहीं ले जाती तो नई या ऊंची हो।

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