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Movie Review: वासन बाला के कमाल से अभिमन्यु ने तोड़ा बॉक्स ऑफिस का चक्रव्यूह

Fri, 22 Mar 2019 01:08 AM IST
vivek shukla मनोरंजन डेस्क, अमर उजाला
मनोरंजन डेस्क, अमर उजाला Published by: vivek shukla Updated Fri, 22 Mar 2019 01:08 AM IST
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Movie Review: Mard ko dard nahi hota
Movie Review

पहले पहल जब इस फिल्म का नाम लोगों ने सुना तो लगा कि भला, ये क्या फिल्म है? अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म मर्द के संवाद से निकाले गए एक नए कलाकार की फिल्म के नाम को लेकर बनी ये उत्सुकता ही इस फिल्म की असली यूएसपी है। कंगना रनौत जैसे लोगों के निशाने पर ये फिल्म वंशवाद के मुद्दे को लेकर आ सकती है, लेकिन दर्शकों के निशाने पर ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इसलिए रहेगी कि आखिरकार हिंदी सिनेमा के निर्देशक भी रूटीन कहानियों से निकलकर डेडपूल वाले माहौल की फिल्में बनाने लगे हैं। वासन बाला की ये फिल्म होली के त्योहार पर युवाओं के लिए बिल्कुल सटीक तोहफा है।

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सात साल पहले कान फिल्म फेस्टिवल में अपनी पहली ही फिल्म पेडलर्स से सुर्खियों में आए वासन बाला को अनुराग कश्यप जैसे बरगद की छाया से बाहर आने में बहुत वक्त लगा है। और, इस लंबे वक्त में उनकी सीजनिंग जितनी सही हुई है, मसान के निर्देशक नीरज घेवन को उससे ईर्ष्या हो सकती है। कहानी है सूर्या और सुपरी की। सूर्या को बीमारी है किसी तरह को चोट लगने पर दर्द न होने की। लेकिन, घाव तो उसके भी रिसते ही हैं। और, फिल्म में सिर्फ घाव ही नहीं रिसते। सपने रिसते हैं। एहसास रिसते हैं। इन रिसावों में किरदारों के भराव की ही कहानी है, मर्द को दर्द नहीं होता।

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गुलशन देवैया के साथ वासन बाला ने पेडलर्स में काम किया था। यहां गुलशन की मौजूदगी ने फिल्म में दो फूल खिलाए हैं। दो फूल एक माली के चक्कर में फिल्म में तमाशा खूब होता है। और तमाशे की डोरियां जिसके हाथ में है, उस अभिमन्यु दसानी ने करियर की पहली फिल्म से जता दिया कि स्टार किड होना उनके लिए कोई तश्तरी में मिला प्रसाद नहीं है। अपना जन्म वह चुन नहीं सकते थे। लेकिन अपना कर्म उन्होंने बखूबी चुना है। ब्रूस ली और जैकी चैक के इस भक्त का जै बजरंग बली टाइप अंदाज हिट है। 

राधिका मदान के लिए वासन बाला ने ट्रेलर में री इंट्रोड्यूसिंग क्यों लिखा था, ये फिल्म देखने के बाद साबित होता है। टीवी से बड़े परदे की छलांग में जो पटाखा बीच में फुस्स हो गया था, उसने धमाका इस फिल्म ने किया है। वासन बाला ने अनुराग कश्यप स्कूल में सिनेमा पढ़ा है। इस स्कूल में अभिनेता हो या तकनीशियन घिसाई इतनी होती है इंसान हीरा जैसा दमक कर निकलता है। वासन का नंबर अब नगीना बनने का है। मर्द को दर्द नहीं होता उनके संघर्ष का इनाम है। 

वासन को फिल्म को अपने हिसाब से बनाने में जय पटेल के कैमरे की बहुत मदद मिली है। जय का कैमरा फिल्म में किसी किरदार की तरह घूमता है और जहां वह अटकता भी है, वहां प्रेमा सहगल की एडिटिंग मामला संभाल लेती है। फिल्म में म्यूजिक का स्कोप ज्यादा है नहीं, म्यूजिक अच्छा होता भी तो फिल्म देख रहे दर्शकों का फोकस खिसका सकता था। होली की मस्ती में फिल्म बिल्कुल आलू के करारे पापड़ों जैसी लगती है। अदाकारी और निर्देशक के रंग-गुलाल भी बिल्कुल सही बिखरे हैं। अमर उजाला डॉट कॉम के वीकली रिव्यू में फिल्म मर्द को दर्द नहीं होता है को मिलते हैं साढ़े तीन स्टार।

मूवी रिव्यू: मर्द को दर्द नहीं होता
कलाकार: अभिमन्यु दसानी, राधिका मदान, गुलशन देवैया, महेश मांजरेकर। 
निर्देशक: वासन बाला
बैनर: आरएसवीपी मूवीज
रेटिंग: ***1/2

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