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टोटल स्यापाः स्यापा है भी या नहीं?

Fri, 07 Mar 2014 02:34 PM IST
रवि बुले/अमर उजाला मुंबई
रवि बुले/अमर उजाला मुंबई Updated Fri, 07 Mar 2014 02:34 PM IST
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film review of total syapa

पाकिस्तानी लड़का और हिंदुस्तानी लड़की। लेकिन जमीन लंदन की। निर्देशक ई.निवास नई पीढ़ी की फिल्म लाए हैं। भारत-पाकिस्तान की उस नई पीढ़ी की जो विदेश में पली-बढ़ी है। फिल्म में निर्देशक ने दोनों देशों के बीच रिश्ते सुधारने और शांति का संदेश देने का अजीबोगरीब कॉमिक प्रयास किया है।

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आशा (यमी गौतम) अपने बॉयफ्रेंड अमन (अली जफर) को परिवार से मिलाने के लिए घर लाती है। यह परिवार खुद समस्याओं से घिरा है। दादाजी को दिखता नहीं, आशा की मां डिप्रेशन का शिकार है, पिता का बाहर अफेयर चल रहा है, आशा की बहन अपने पति को छोड़ आई है।
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उसकी एक बेटी भी है। जबकि आशा के भाई को पाकिस्तानियों से नफरत है। फिल्म एक रात की कहानी है, जिसमें अमन इस परिवार की उलझनों में खुद को फंसा पाता है।

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फिल्म में किरन खेर के अलावा कोई भी कलाकार आकर्षित नहीं करता। यमी गौतम जरूर खूबसूरत लगी हैं। निर्देशक ने अनुपम खेर जैसे ऐक्टर को जाया किया है। फिल्म की कहानी में रफ्तार नहीं है। वह एक ही जगह पर ठहरी रहती है।

भारत-पाकिस्तान के मुद्दे पर हीरो-हीरोइन के बीच छोटी सी बहस बेकार ही है। संगीत भी विशेष नहीं है। चूंकि कहानी लंदन में कही जा रही है, इसलिए देसी दर्शकों को इससे ‘कनेक्ट’ महसूस करने में कठिनाई होती है।


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