किकः समझ में आए तो अच्छा, न आए तो भी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सलमान खान ने साफ-साफ कह दिया है कि मैं दिल में आता हूं, समझ में नहीं आता। लेकिन जब बात जेब से पैसा जाने की हो तो दिल के बजाय दिमाग से सोचना हमेशा समझदारी भरा होता है। अगर सलमान से आपका दिल लगा है तो ‘किक’ के बारे में सुनने-जानने का कोई मतलब नहीं। मगर आप दिमाग से सोचते हैं और अपने पैसे की कद्र करते हैं तो विश्वास कीजिए कि इस फिल्म से आपको ‘किक’ नहीं मिलने वाली। ‘किक’ यानी सीधे-सादे अर्थों में आह... वाह... टाइप पैसा वसूल मजा! सलमान की त्रासदी यह है कि उनकी जिंदगी और फिल्में किसी रीयलिटी शो की तरह हो चुकी हैं।
किक में भी वैसे ही हैं
दोनों गड्डमड्ड हैं। असल जिंदगी में सलमान पर्दे पर दिखने वाले हीरो के जैसी हरकतें-बातें करते हैं और फिल्मों में उन हरकतों-बातों की सफाई देते फिरते हैं। हाल के वर्षों में वह अपनी फिल्मों में निजी जिंदगी के तमाम एजेंडे प्रमोट करते दिखे हैं। यही ‘किक’ में है। इसलिए फिल्म में एक ऐक्टर उनके बारे में कहता है, ‘वह ह्यूमन बीइंग नहीं हैं, बीइंग ह्यूमन हैं।’ बाजार की दृष्टी से भले ही यह सफल संवाद लगे, मगर कला की दृष्टि से यह चुटकुला है। जो सलमान को हंसी का पात्र बना देता है। सलमान अपनी हर फिल्म में इमेज चमकाने के प्रयास करते हैं। उनकी कोशिश मसीहा या दरवेश दिखने की होती है। उनके समानांतर शाहरुख और आमिर खान अपनी फिल्मों में अलग से कुछ नहीं करते, बल्कि ऐसे रोल करते हैं कि इमेज खुद-ब-खुद चमक जाती है।
देवी लाल बन गया डेविल
किक की कहानी देवी लाल सिंह (सलमान) की है, जिसे जिंदगी में जोखिम भरे काम करने में ही मजा आता है अर्थात किक मिलती है। इसलिए वह कहीं नौकरी नहीं कर पाता। उसकी मुलाकात एक मनोचिकित्सक शायना (जैकलीन) से होती है और हां-ना के बाद उनमें प्यार हो जाता है। लड़की का पिता बड़ा ब्यूरोक्रेट है और देवी पर तंज कसता है कि उसकी हालत देख कर लगता है कि वह शादी के बाद घर जमाई बन जाएगा। नाराज देवी शायना से कहता है कि अगर पैसा कमाना ही कामयाबी है तो फिर आज से उसकी ‘किक’ सिर्फ पैसा बनाना है। वह करोड़ों-अरबों का अंबार लगा देगा। देवी लाल सिंह, डेविल बन जाता है। अमीरों को लूटता है। डेविल को पकड़ने का काम पुलिस अधिकारी हिमांशु त्यागी (रणदीप) को मिला है। लेकिन डेविल हमेशा उसे मात दे जाता है। क्या त्यागी कभी डेविल को पकड़ सकेगा या फिर हमेशा ही उसे हार मिलेगी?
कहानी कम, कलम घसीटी ज्यादा
किक की कहानी में कई सिरे ऐसे हैं जिनमें कोई तर्क नहीं मिलता। जो कहानी में गैर जरूरी होते हैं। चूंकि किरदारों को ढंग से गढ़ा नहीं गया है और न ही उनकी भावनाओं को उभारा गया है, ऐसे में वे सस्ते चाइनीज माल की तरह लगते हैं। फिल्म के लेखकों ने सलमान को चमकाने के चक्कर में कलम घसीट-घसीट कर उनके दृश्यों को खूब खींचा है। फिल्म में सलमान के ‘इंट्रोडक्शन सीन’ की ही बात करें तो वह ऐसे चलता है मानो दुनिया पहली बार सलमान को देख रही है।
धूम 3 जैसा बचकानापन
धूम-3 में अभिषेक बच्चन और उदय चोपड़ा ऑटो रिक्शा में पर्दे पर एंट्री करते हैं, उसी अंदाज में सलमान किक में आए हैं। आगे से बाइक और पीछे से कार नुमा गाड़ी में वह एक दूल्हा-दुल्हन को भगा रहे हैं, ताकि उनकी शादी करा सकें। सीन इतना खींचा गया है कि जैसे खत्म ही नहीं होगा। इसी तरह से पुलिस थाने का दृश्य जब सलमान अंदर कर दिए जाते हैं, क्लब में सलमान और उनके पिता बने मिथुन के दृश्य... ऐसे तमाम उदाहरण हैं। आप चकित होते हैं कि चेतन भगत समेत चार-चार लोगों ने मिल कर स्क्रिप्ट पर काम किया है। निर्देशन की दुनिया में कदम रखने वाले साजिद नाडियाडवाला के बारे में कहा जा सकता है कि फिल्म पर उनकी कोई विशिष्ट छाप नहीं दिखती, लेकिन अनेक मायनों में वह इतने समर्थ हैं कि फिल्म बना सकते हैं।
नवाज हैं सबसे अलग
पूरी फिल्म में अगर कुछ सुखद है तो नवाजुद्दीन सिद्दीकी की मौजूदगी। वह इंटरवेल के बाद आते हैं। लेकिन बमुश्किल ढाई दृश्य उनके हिस्से में हैं। इनमें वे दर्शकों के दिमाग पर छा जाते हैं। शतरंज की बिसात पर जैसे घोड़ा ढाई घर चल कर सामने वाले मोहरे को पीट देता है, वही नवाज करते हैं। सलमान समेत सब उनके सामने फीके हैं। संभवतः निर्देशक को मालूम था कि नवाज के हिस्से में ज्यादा रोल आने पर फिल्म उनकी होकर रह जाएगी। इसलिए छोटा सा रोल उन्हें दिया गया। फिल्म में नवाज की मौजूदगी बताती है कि उनके जैसे कलाकार मसाला फिल्मकारों की जरूरत हैं। नसीरूद्दीन शाह और ओम पुरी जैसे ऐक्टरों के उम्र की ढलान पर होने के कारण उनकी खाली जगह को नवाज भर पाने में सक्षम हैं। बस, इतना हो कि यह कलाकार ऐसी ही भूमिकाओं में खो न जाए।
आइटम डांस और बाकी सब
फिल्म चूंकि मसालेदार है, अतः इसमें आइटम डांस भी होना था। नर्गिस फाखरी ने यह डांस किया है और हाल के वर्षों में आए ऐसे सबसे खराब डांस में इसे शुमार किया जाएगा। गीत-संगीत कोई उल्लेखनीय नहीं हैं। फिल्म में न ठीक-ठीक कॉमेडी है, न रोमांस। हां, चमक-दमक है। एक्शन के कुछ दृश्य भी हैं लेकिन एक भी सीन फिल्म खत्म होने के बाद याद नहीं रहता। रणदीप हूडा के लिए फिल्म इसलिए उल्लेखनीय होगी कि यह बॉक्स ऑफिस पर सौ करोड़ के ऊपर कमा लेगी। लेकिन लोग उन्हें इस फिल्म के लिए याद नहीं करेंगे। जैकलीन फर्नांडिज को अब बॉलीवुड से इतर कैरियर की तलाश करनी चाहिए। करीब आधा दर्जन मौके उन्हें मिल चुके हैं और वह न ऐक्टिंग कर पाती हैं और न अभी तक उन्हें हिंदी बोलना आई है। सलमान खान अपने अंदाज में चल रहे हैं और शायद चलते रहेंगे। उनके लिए वापसी का कोई रास्ता नहीं है। वह समझ में आएं तो ठीक, न आएं तो भी ठीक।