फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Review ›   film review of kaabil

Film Review: 'काबिल' में दो निगेटिव मिलकर भी पॉजिटिव नहीं कर पाए

Wed, 25 Jan 2017 04:45 PM IST
रवि बुले
रवि बुले Updated Wed, 25 Jan 2017 04:45 PM IST
विज्ञापन
film review of kaabil
काबिल

-निर्माताः राकेश रोशन

विज्ञापन


-निर्देशकः संजय गुप्ता

-सितारेः ऋतिक रोशन, यामी गौतम, रोनित रॉय, रोहित रॉय

रेटिंग **1/2


प्यार और कानून में यह समानता है कि दोनों अंधे होते हैं। फिल्म की नायिका कहती है कि दो नेगेटिव मिलकर पॉजिटिव कैसे बन सकते हैं? काबिल की कहानी में भी इन दो नेगेटिव को मिलाकर पॉजटिव बनाने की कोशिश है। बात बन नहीं पाती। कहानी में प्यार आधे रास्ते में खत्म हो जाता है और कानून शुरू से अंत तक लचर बना रहता है। ऋतिक रोशन का परफॉरमेंस छोड़ दें तो काबिल में ऐसा कुछ नहीं जो काबिल-ए-तारीफ हो। परंतु अकेले ऋतिक क्या कर सकते हैं जब स्क्रिप्ट कच्ची हो और निर्देशन तथा दृश्य संयोजन में तालमेल न बैठे। काबिल की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि फिल्म किसी कोण से संजय गुप्ता की बनाई नहीं लगती। या तो वह चुक गए हैं या फिर मन मार कर निर्माता राकेश रोशन की दखलंदाजी सहते हुए फिल्म बनाई। निर्माता भूल गए कि दर्शक जेब से खर्च कर खुली आंखों से फिल्म देखता है।

टीवी के क्राइम धारावाहिकों के नजदीक दिखी फिल्म

film review of kaabil
kaabil

जब ब्रांड नेम संजय गुप्ता हैं तो पैकेट में राकेश रोशन का माल कैसे चलेगा? यह प्रेम, रेप और बदले की कहानी है। नायक-नायिका नेत्रहीन हैं। उनके प्यार और शादी के बाद खलनायक (रोहित रॉय) की एंट्री होती है, जो स्थानीय कारपोरेटर (रोनित रॉय) का लाडला भाई है। वह और उसका एक दोस्त नायिका का दो बार रेप करते हैं। वह आत्महत्या कर लेती है। खलनायक के बाद कानून का सताया नायक खुद बदला लेने निकल पड़ता है। वह अपराधियों को एक-एक कर ठिकाने लगाता है। पुलिस कुछ नहीं कर पाती। मामला इतना फिल्मी हो जाता है कि टीवी के क्राइम धारावाहिकों के नजदीक जा पहुंचता है! हीरो के बदला लेने का अंदाज न असर छोड़ता है और न विश्वसनीय लगता है। यामी गौतम ने ऋतिक का अच्छा साथ निभाया, परंतु बदलापुर और सनम रे की तरह उनका किरदार यहां भी बीच फिल्म में मृत्यु को प्राप्त होता है। प्यार-रोमांस और गीत-संगीत आकर्षक नहीं हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

काबिल न तो रोमांटिक है, न आपराधिक

film review of kaabil
kaabil

उर्वशी रौतेला पर आइटम डांस बिना कलात्मकता के चलताऊ वीडियो एलबम जैसा शूट किया गया है। काबिल न तो रोमांटिक है, न आपराधिक और न बदले का थ्रिल इसमें है। कुल मिलाकर जो बनता है, वह दर्शक के एंटरटेन होने के काबिल नहीं रहता। उड़ान, बॉस, टू स्टेट्स और गुड्डू रंगीला जैसी फिल्मों में खलनायकी का रंग जमाने वाले रोनित रॉय और उनके भाई रोहित रॉय फिल्म पर बोझ लगते हैं। रोनित मराठी लहजे में नाना पाटेकर की नकल उतारते हैं। रोहित बड़े पर्दे के काबिल न पहले कभी थे और न इस फिल्म में लगे। इन बातों के बाद आप खुद यह तय कर सकते हैं कि फिल्म आपके समय, धन और ध्यान के काबिल है या नहीं?

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें Entertainment News से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और Movie Reviews आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed