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हीरोपंतीः इस हीरो को देखकर हंसेंगे तो नहीं?

Fri, 23 May 2014 03:29 PM IST
रवि बुले/अमर उजाला मुंबई
रवि बुले/अमर उजाला मुंबई Updated Fri, 23 May 2014 03:29 PM IST
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film review of heropanti

जैकी श्राफ के बेटे टाइगर की फिल्म हीरोपंती रिलीज हो गई है। समीक्षा पढ़कर तय कीजिए कि कहीं आपको हीरो पर हंसी तो नहीं आएगी।

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फिल्म ‘हीरोपंती’ के ट्रेलर देख कर आप इतना तो जान ही चुके होंगे कि वो क्या चीज है जो दूसरों को आती नहीं और टाइगर श्रॉफ की जाती नहीं! जबकि हकीकत इससे उल्टी है। अभी टाइगर को पर्दे पर हीरोपंती सीखनी पड़ेगी क्योंकि उनका नाम भी उन सितारा पुत्रों की सूची में आसानी से शुमार हो गया है, जो अपनी पहली फिल्म में इंप्रेस नहीं करते।

उनके ऐक्शन दृश्य भले ही आकर्षक हों लेकिन रोमांटिक दृश्यों और संवाद अदायगी पर उन्हें काफी काम करना पड़ेगा। ‘हीरोपंती’ में उन्होंने जितना किया वह लंबी दौड़ के लिए नाकाफी है। निर्देशक सब्बीर खान ने भी अपनी पहली फिल्म ‘कम्बख्त इश्क’ (अक्षय-करीना) से बेहतर यहां कुछ नहीं किया है।
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हीरोपंती तमिल फिल्म ‘पारुगु’की रीमेक है। अक्षय कुमार और सलमान खान साउथ की फिल्मों के रीमेक की संभावनाएं बॉक्स ऑफिस पर इतनी निचोड़ चुके हैं कि टाइगर जैसे नए ऐक्टर के लिए इसमें कुछ बचता नहीं। अतः टाइगर के लिए जरूरी है कि वह खुद को बचाएं, वर्ना ऐसी फिल्मों का आसान शिकार बन जाएंगे।
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‘हीरोपंती’ बॉलीवुड की सैकड़ों फार्मूला फिल्मों का एक और मिक्स है। देश के ‘जाटलैंड’ में बाहुबली चौधरी (प्रकाश राज) की बेटी अपने प्रेमी के साथ निकल भागी है और चारों तरफ उसकी तलाश जारी है। चौधरी के गुंडे उस लड़के के दोस्तों को पकड़ रहे हैं जिसके साथ वह लड़की गई है।

इसी धरपकड़ में उन्हें मिलता है बबलू (टाइगर)। कहानी में ट्विस्ट यह कि इसी बबलू से चौधरी की दूसरी बेटी डिंपी (कृति) को प्यार हो जाता है! यानी चौधरी के लिए फिर से ‘इज्जत का सवाल’ खड़ा हो जाता है। फिल्म के एक मोड़ पर परेशान चौधरी सवाल करता है, ‘तुम में ऐसा क्या है जो मेरी बेटी को दिखता है और मुझे नहीं दिखता’। दर्शक यहां पर जोरदार ठहाका लगाते हैं। फिल्म की कहानी में और ज्यादा कुछ जानने जैसा नहीं है। आगे का ऐक्शन और रोमांस आप बिना बताए भी समझ सकते हैं।

ऐक्शन और रोमांस की इस चाशनी में अगर कुछ ठीक है तो टाइगर के ऐक्शन सीन और दो-एक गाने। वैसे बेहतर होता की निर्देशक ने टाइगर को रोमांटिक कम और ऐक्शन हीरो ज्यादा दिखाया होता। जैकी श्रॉफ के बेटे के लिए ऐक्शन फिल्में ही कामयाबी के दरवाजे खोल सकती हैं, लेकिन उनके हिस्से ज्यादा संवाद न आएं तो बेहतर। गंभीर और रोमांटिक दृश्यों में भी वह खुद को संभाल नहीं पाते। किसी को अगर टाइगर में करीना कपूर की झलक दिखती है तो वह खास गलत भी नहीं है।

स्टार पुत्र होने का फायदा यह है कि टाइगर पर कुछ शुरुआती नाकामियों का कोई फर्क नहीं पड़ेगा और उन्हें मौके मिलते रहेंगे। जहां तक कृति सैनन का सवाल है वह सुंदर हैं और कुछ दृश्यों में मासूम भी दिखी हैं। फिल्म में वह पिता और प्रेमी के बीच झूलती रहती हैं। बॉलीवुड की टिपिकल हीरोइनों में जो खूबियां दिखती हैं, वह उनमें हैं। लेकिन ऐक्टिंग में उन्हें भी बेहतर करने की जरूरत है।


प्रकाश राज ने हमेशा की तरह प्रभावित किया है, लेकिन मुद्दा यह कि क्या उनके लिए बॉलीवुड में सिर्फ ऐसे ही रोल लिखे जा रहे हैं। फिल्म में अंत में ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ की याद आपको चौंका सकती है। स्क्रिप्ट पर और मेहनत होती तो बेहतर रहता। वैसे अगर आपको कभी सलमान की ‘बॉडीगार्ड’ पसंद आई हो तो टाइगर की यह फिल्म भी अच्छी लग सकती है। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी अच्छी है। परंतु फिल्म देखने का एकमात्र कारण यह नहीं हो सकता।

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