फुकरेः एक नई किस्म की मजेदार कॉमेडी

रोहित मिश्र Updated Fri, 14 Jun 2013 03:56 PM IST
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film review of fukrey

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'फुकरे' फिल्म में लाली नाम का एक किरदार इसलिए गहरी मोहब्बत में डूब जाता है क्योंकि उसको एकाउंट पढ़ाने वाली एक लड़की उसकी घनी दाढ़ी में फंसा भुजिया का एक कतरा निकाल देती है। एक और किरदार रात में सपने देखता है और उसका दोस्त उस सपने के आधार पर लाटरी का एक नंबर खरीदता है।
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दो लड़के एक ही रात में पुलिस से बचकर एक ही लड़की के घर में पहुंच जाते हैं और दोनों ही एक-दूसरे से पूछ रहे होते हैं तुम यहां क्या कर रहे हो। ये फिल्म के कुछ किस्से हैं जो बताते हैं कि हम एक नई किस्म की कॉमेडी देख रहे हैं। मेकिंग स्टाइल से यह फिल्म कहीं-कहीं 'डेल्ही बेली' से प्रेरित जरूर है लेकिन यह उसकी नकल नहीं करती।
फिल्म की सबसे बड़ी खूबी उसका नया-नया लगना है। इस फिल्म में न तो स्टारों का आभामंडल हैं, न ही बड़े और नामी निर्देशक का इंटलैक्चुअल इफेक्ट और न ही कोई प्रचार। फ्रेश कहानी, नए तरीके के अभिनय और मजेदार डायलॉग से वाली यह फिल्म हमें बताती हैं कि किस तरह बिना स्टार्स के एक अच्छी फिल्म बनायी जा सकती है।

सपने बनाते भी हैं और बिगाड़ते भी


'फुकरे' में हास्य का क्लासिक फ्लेवर है, यानी इसके किरदार के समस्याओं से निकलने की जुगत में और ज्यादा समस्याओं में फंसते जाते हैं। हनी (पुलकित सम्राट) और चूचा (वरूण शर्मा) कई साल से बारहवीं में हैं। वह किसी भी सूरत में कॉलेज जाना चाहते हैं। पढ़ने के लिए नहीं बल्कि क्लास बंक करने और लड़की ताड़ने के लिए। एक और करेक्टर लाली कॉलेज में तो है लेकिन वह मेनस्ट्रीम में न होकर इवनिंग क्लासेज में है। उसे भी कॉलेज पहुंचना है क्योंकि उसकी स्कूल गर्लफ्रेंड उस कॉलेज में है।


इन सभी को कॉलेज पहुंचने के लिए अपनी-अपनी परीक्षाएं पास करनी होती हैं। परीक्षा पास करने की कुव्वत किसी में है नहीं तो उन्हें कॉलेज पहुंचाने का जिम्मा लेता है एक कॉलेज का एक गेटकीपर पंडित (पंकज त्रिपाठी)। पंडित जी को पेपर आउट कराने के लिए पैसे चाहिए होते हैं। अब पैसे कहां से आएं। इसका हल मजेदार है। चूचा हर रात को एक सपना देखता है और हनी उस सपने को तोड़-मरोड़कर लाटरी का एक नंबर निकालता है। अब बड़ी रकम के लिए इस पर पैसे लगाने वाला चाहिए। पैसे लगाने वाले का पता जफर (अली फजल) देता है।

जफर को भी पैसे की इसलिए जरूरत है क्योंकि उसे अपने पिता का इलाज कराना है। जफर इन सब को भोली पंजाबन (ऋचा शर्मा) के पास ले जाता है। भोली पंजाबन हर तरह के अवैध काम करती है। मजा तब आता है जब चूचा का देखा हुआ सपना गलत हो जाता है और भोली पंजाबन के पैसे डूब जाते हैं। अब पैसे कैसे आते हैँ यह बताने के लिए यह फिल्म कई मजेदार किस्सों से होकर गुजरती है।

हर किरदार रोल में परफेक्ट

फिल्म का सबसे सशक्त पक्ष कलाकारों का अभिनय ही है। हर कलाकार ने अपने किरदार में डूबकर ऐक्टिंग की है। यदि सभी में सबसे अच्छा चुनने की बात हो तो चूचा का किरदार निभाने वाले वरुण शर्मा लाजवाब रहे हैं। उन्हें देखकर लगता ही नहीं कि यह वरूण की पहली फिल्म है। 'बिट्टू बॉस' फिल्म में अभिनय कर चुके पुलकित सम्राट भी अच्छे लगे हैं।

एक भोले-भाले सरदार का किरदार मनजोत सिंह ने बहुत ही नेचुरल तरीके से निभाया है। एक शांत स्वभाव के लड़के रोल में अली फजल भी अच्छे लगे हैं। 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' में ऋचा चड्ढा ने जिस तरह की दबंगई वाली ऐक्टिंग की थी इस फिल्म में वह उसी का विस्तार नजर आती है। विशाखा सिंह, प्रिया आनंद और पंकज त्रिपाठी का जितना भी रोल है वह बढ़िया है।

बेहतर निर्देशन, नए डायलॉग


फिल्म के निर्माता फरहान अख्तर हैं और फिल्म पर उनका प्रभाव साफ नजर आता है। खासकर स्क्रिप्ट के हिस्सों पर। फरहान पहले भी दोस्ती के बीच पनपने वाली कहानियों पर बेहतर फिल्में बना चुके हैं और उनका हिस्सा भी रहे हैं। एक निर्देशक के रूप में यह मृगदीप सिंह लांबा की दूसरी फिल्म है। मृगदीप की पहली फिल्म 'तीन थे भाई' भले ही व्यवसायिक रूप से बहुत सफल नहीं हुई थी लेकिन उस फिल्म ने यह एहसास करा दिया था कि मृगदीप के पास एक अलग तरह का सिनेमा रचने का हुनर है।

मृगदीप की यह फिल्म डायलॉग और निर्देशन से तो प्रभावित करती ही है फिल्म में उनका पात्र चयन जबर्दस्त है। लाली, चूचा और हनी के किरदार कमाल के हैं। मोहब्बत का एक छोटा ट्रैक भी उनके निर्देशन में दम भरता दिखता है। उनकी सबसे बड़ी खूबी नए कलाकारों से उम्दा काम करवाने की है। खासकर कलाकारों की बॉडी लैग्वेंज पर। सिचुवेशनल कॉमेडी के बड़े निर्देशक बनकर उभरे हैं मृगदीप।

एक गाना कमाल का

फिल्म का एक गाना "अम्बरसारिया" कमाल का है। यह गाना बार-बार सुनने का जी चाहता है। फिल्म का टाइटिल सॉन्ग 'फुकरे' में जरूरत के मुताबिक फिल्म में अच्छा है। बाकी के गाने भी फिल्म के मिजाज की तरह हैं।

क्यों देखें

एक नई किस्म की कॉमेडी फिल्म देखने के लिए। और वरूण शर्मा के लिए भी जिसने इस फिल्म से अपना डेब्यू किया है।

क्यों न देखें

इस कॉमेडी फिल्म में आपको गाड़ियां उड़ती हुई नहीं दिखेंगी और न ही बिना मतलब थप्पड़ बरसाए जाते हैं।
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