2 स्टेट्सः रोमांस में टकराव भी और चुंबन भी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्यार की शुरुआत करना तो आसान है लेकिन उसे शादी के अंजाम तक पहुंचाना बहुत कठिन है। लड़के के लिए जरूरी है कि उसे लड़की के घरवाले भी पसंद करें और यही बात लड़की पर भी लागू होती है।
इन बातों के बीच अगर जाति-धर्म-भाषा-संस्कृति और राज्यों की दीवारें भी खड़ी हो जाएं तो समझ लीजिए कि यह नामुमकिन को मुमकिन बनाने जैसा कठिन काम है। ‘2 स्टेट्स’ निर्देशक अभिषेक वर्मन की पहली फिल्म है, जिसका आधार चेतन भगत का इसी नाम से प्रकाशित उपन्यास है।
बांधे रखती है यह फिल्म
निर्देशक ने उपन्यास को खूबसूरती से फिल्म में ढाला है। कहानी आपको बांधे रहती है और एक तय रफ्तार से आगे बढ़ती है।
फिल्म अनन्या और कृष की कहानी है। लड़की तमिल ब्राह्मण और लड़का पंजाबी।
आईआईएम अहमदाबाद में पढ़ते हुए दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो जाता है और वक्त बीतने के साथ वे इस नतीजे पर पहुंचते हैं कि एक-दूसरे से दूर नहीं रह सकेंगे। अतः शादी जरूरी है।
लेकिन मुश्किल यह है कि क्या लड़की के माता-पिता लड़के को स्वीकार करेंगे? और अगर यह हो गया तो क्या लड़की लड़के के मां-बाप को पसंद आएगी? हमारे यहां शादी सिर्फ दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का मिलन होता है।
उतार-चढ़ाव भी हैं इस कहानी में
इस विशाल देश में इतनी सांस्कृतिक विविधता है कि स्कूली निबंधों के अलावा अनेकता में एकता ढूंढ पाना बड़ा कठिन हो जाता है। फिल्म परिस्थितियों के उतार-चढ़ाव के साथ आगे बढ़ती है। इसमें आपकी भवनाओं की लहरें कभी किनारे लगती तो कभी वापस लौट जाती हैं।
फिल्म में आलिया भट्ट छाई हुई हैं। पिछली फिल्म ‘हाइवे’ में वह अपनी उम्र से कहीं बड़ी बातें बनाते हुए जितनी नकली लग रही थीं, इस फिल्म में उतनी ही मौलिक नजर आती हैं। अनन्या के रूप में उनका अभिनय उनके किरदार को ज्यादा खूबसूरत बनाता है। उन्होंने बहुत सहजता से किरदार को जीया है। वह इस फिल्म में भरोसा दिलाती हैं कि इस तरह के रोल चुनती रहीं तो लंबी पारी खेलेंगी।
आलिया बढ़ेंगी आगे
खास तौर पर हाल के दिनों में करीना कपूर की नाकामियों से जो जगह खाली हुई है आलिया उसे भर देंगी। दूसरी तरफ अर्जुन कपूर अपने चार फिल्मों के छोटे से कैरियर में पहली बार कहानी के आखिर में जिंदा बचे हैं।
इससे पहले ‘इश्कजादे’, ‘औरंगजेब’ और ‘गुंडे’ में दर्शकों ने उन्हें फिल्म के अंत में गोली खाकर मरते हुए देखा था! अर्जुन का यह रोल पिछली फिल्मों से बिल्कुल अलग है और वे इसमें ठीक लगे हैं। संभवतः यह उनकी नई शुरुआत हो। वे किरदार के अनुरूप खुद को ढालने में कामयाब रहे हैं।
युवाओं को आएगी रास
ऐसे में किसी को लग सकता है कि बच्चों को पढ़ने-लिखने के लिए दूर दूसरे शहरों में भेजा जाता है या फिर यह सब करने? लेकिन क्या करें... नए जमाने में शादी सेक्स और प्यार का क्रम बदल कर प्यार सेक्स और शादी हो चला है!! परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है।