सुर्खियों में है ऑस्कर, यहां हैं अवॉर्ड से जुड़े आपके तमाम सवालों के जवाब
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूरे विश्व में कोरोना का असर अलग अलग क्षेत्रों पर देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां इसका बड़ा असर शूटिंग पर हुआ है तो वहीं कई कार्यक्रमों को भी टाला और कैंसिल किया जा रहा है। इन इवेंट्स की लिस्ट में ऑस्कर का भी नाम शामिल हो गया है। ऑस्कर अवॉर्डस शुरू से ही लोगों में चर्चा का विषय रहा है और इसको लेकर कई सवाल फैंस के मन में रहते हैं। जैसे अवॉर्ड की शुरुआत कब से हुई? अवॉर्ड का वास्तविक नाम क्या है? इसका नाम ऑस्कर क्यों रखा गया है। आपके इन तमाम सवालों का जवाब लेकर हम आए हैं। इस पैकेज में आपको ऑस्कर से जुड़ी तमाम बातें बताएंगे।
ऑस्कर के लिए दी जाने वाली ट्रॉफी को 1928 में डिजाइन किया गया था। इसे मेट्रो गोल्डविन मेयर (MGM) के चीफ आर्ट डायरेक्टर स्व. सेड्रिक गिब्बन्स ने डिजाइन किया था। खास बात ये है कि इस ट्रॉफी को डिजाइन करने वाले गिब्बन्स ने खुद भी ये अवॉर्ड जीता था। वे अपने करियर में 38 बार ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हुए और 11 बार ये अवॉर्ड जीता। ये ट्रॉफी 13.5 इंच लंबी और करीब 3.74 किलोग्राम वजनी होती है। ऑस्कर की ट्रॉफी सॉलिड तांबे की बनी होती है, जिसके ऊपर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ाई जाती है। ऑस्कर की आधिकारिक साइट के अनुसार, बीते करीब नौ दशकों में 3100 से ज्यादा ऑस्कर दिए जा चुके हैं। हर साल अवॉर्ड समारोह के लिए 50 ट्रॉफी बनाई जाती हैं। इन्हें बनाने में तीन महीने का समय लगता है।
कई लोगों के जेहन में ये सवाल भी आता है कि क्या कोई स्टार ऑस्कर अवॉर्ड को बेंच भी सकता है? तो इस सवाल का जवाब यहां है। तकनीकी रूप से ऑस्कर विजेताओं के पास पहली बार में उनकी ट्रॉफी बेचने का अधिकार नहीं होता है। अगर वे ऐसा करना चाहते हैं तो नियमानुसार उन्हें पहले ऑस्कर देने वाली संस्था एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज को एक डॉलर में ट्रॉफी खरीदने का मौका देना होगा।
ऑस्कर का असली 'एकेडमी अवॉर्ड ऑफ मेरिट (Academy Award of Merit)' है। एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज के अनुसार, इस अवॉर्ड के लिए ऑस्कर नाम की चर्चा इसकी शुरुआत के करीब पांच साल बाद 1934 में हुई थी। अवॉर्ड को 'ऑस्कर' नाम देने के पीछे जो कहानी सबसे चर्चित है, वो है कि 'एकेडमी की तत्कालीन लाइब्रेरियन मार्गरेट हेरिक ने जब पहली बार अवॉर्ड की ट्रॉफी (statue) को देखा तो कहा कि ये उनके अंकल ऑस्कर से मिलती है। इसके बाद ही एकेडमी अवॉर्ड ऑफ मेरिट को ऑस्कर निकनेम दिया गया।' आज ये इसी नाम से प्रसिद्ध है। बाद में मार्गरेट एकेडमी की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भी बनीं।
पढ़ें: भूमि पेडनेकर को फिर याद आए सुशांत सिंह राजपूत, लिखा- 'तुम बहुत याद आओगे SSR'