इन 10 बेहतरीन फिल्मों को ऑस्कर में नहीं मिला एक भी नामांकन, डायरेक्टर के साथ-साथ फैंस भी हुए हैरान
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सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लग सकता है लेकिन सच है। महज ऑस्कर में नामांकन मिल जाने से ही कोई फिल्म बेहतरीन नहीं बन जाती है। सालों से ऐसी कई शानदार फिल्में आई हैं, जिन्हें अकादमी द्वारा नजरअंदाज कर दिया गया। 'द अकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स ऑर्टस एंड साइंसेस' की अपनी 6000 मेंबर्स की एक रिसर्च टीम है, जो फिल्मों के नॉमिनेशन को हर पैमाने पर मापने के बाद ही ओके करती है। कई बार इन 6000 मेंबर्स की एक रिसर्च टीम भी ऑस्कर के नामांकन में भूल कर बैठती है। इसके पीछे वजह चाहे जो भी हो लेकिन एक वजह ये तो जरूर है कि अक्सर ऑस्कर मतदाता उस फिल्म से प्रभावित नहीं हो पाते।
अब भारतीय फिल्म मदर इंडिया को ही ले लीजिए। विदेशी भाषा में बनी श्रेष्ठ फिल्म श्रेणी में भारत की ओर से 'मदर इंडिया' भेजी गई थी। फिल्म के तकनीकी पक्ष और निर्देशक द्वारा बनाई भावना की लहर से चयनकर्ता प्रभावित थे परंतु उन्हें यह बात खटक रही थी कि पति के पलायन के बाद महाजन द्वारा दिया गया शादी का प्रस्ताव वह क्यों अस्वीकार करती है जबकि सूदखोर महाजन उसके बच्चों का भी उत्तरदायित्व उठाना चाहता है। दरअसल, चयनकर्ता को उस वक्त यह किसी ने नहीं स्पष्ट किया कि भारतीय नारी अपने सिंदूर के प्रति कितनी अधिक समर्पित होती है। फिल्म भारत के सदियों पुराने आदर्श के प्रति समर्पित थी।
बात करें 'सुसाइड स्क्वाड' की तो बेशक इस फिल्म को क्रिटिक्स की तरफ से आलोचनाओं का सामना करना पड़ा लेकिन फिल्म ने न सिर्फ अकादमी में नामांकन हासिल किया बल्कि इसे जीता भी। पिछले 91 साल से दुनिया की बेहतरीन फिल्मों और कलाकारों को ऑस्कर अवॉर्ड दिया जा रहा है लेकिन कुछ फिल्में ऐसी भी हैं जो ऑस्कर में नामांकन हासिल करने में चूक गईं।
आइए बात करते हैं उन्हीं में से कुछ फिल्मों की।
अमेरिकन साइको- साल 2000
क्रिश्चियन बेल अभिनीत इस फिल्म की काफी तारीफ की गयी थी। यहां तक कि आलोचक भी इस फिल्म को देखकर प्रभावित हुए थे। अमेरिकन साइको, ब्रेट एस्टन एलिस द्वारा लिखा गया एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर और व्यंग्यात्मक उपन्यास पर आधारित फिल्म थी। जिसमें एक युवा इन्वेस्टमेंट बैंकर पैट्रिक बेटमैन की तकरीबन तीन वर्षों की जिंदगी की कहानी बयां की गई थी। इस फिल्म को बनाने में 8 साल लगे थे। हालांकि तारीफ मिलने के बाद भी इस फिल्म ने आस्कर में नामांकन हासिल नहीं किया। हालांकि क्रिश्चियन बेल को इस साल 'वाइस' के लिए बेस्ट एक्टर का ऑस्कर मिला है।
बिफोर सनराइज- 1995
अमेरिकन फिल्ममेकर रिचर्ड लिंकलेटर के डायरेक्शन में बनी 'बिफोर सनराइज' रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी। फिल्म एक फ्रेंच महिला और अमेरिकन पुरुष के एक रात साथ में वियना घूमने की यात्रा पर आधारित थी। जो ट्रेन में मिलते हैं और फिर एक दूसरे के साथ समय बिताते हैं। दोनों के दिमाग में ये बात चलती है कि दोनों की एक दूसरे के साथ आखिरी रात है। जाते समय दोनों 6 महीने बाद उसी स्टेशन पर मिलने का वादा कर अलग हो जाते हैं। दोनों एक दूसरे से मिल पाते हैं या नहीं इसे जानने के लिए तो आपको फिल्म देखनी पड़ेगी। वो फिल्म जिसने आपको भविष्य के कपल से मिलवाया वो अकादमी द्वारा नजरअंदाज कर दी गई थी।
ब्रियान डी पाल्मा बेशक पुरस्कार जीतने के लिए फिल्में न बनाते हों, लेकिन उनकी राजनीतिक थ्रिलर 'ब्लो आउट' ऑस्कर की हकदार थी। लेकिन दुर्भाग्य से इस फिल्म को नामांकन भी नहीं मिला। इस फिल्म को सिनेमा के इतिहास की बेहतरीन फिल्मों में शामिल किया जाता है। फिल्म एक साउंडमैन की कहानी थी जिसके हाथ एक रिकॉर्डिंग लग जाती है जिससे उसे पता चलता है कि वह हत्या थी।
ब्रीदलैस का एक भी नामांकन न हासिल करना इस बात का प्रमाण है कि ऑस्कर पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। दुनिया में सबसे अधिक अध्ययन वाली फिल्मों में से एक होने के बावजूद इस फिल्म को किसी भी कैटेगरी में नामिनेशन नहीं मिला था। फिल्म को Jean-Luc Godard ने निर्देशित किया था। ये फिल्म जब फ्रांस में रिलीज हुई तो उस वक्त इसने 2 मिलियन से अधिक दर्शकों को आकर्षित किया था।
Nicolas Roeg द्वारा निर्देशित इस फिल्म की कहानी Daphne du Maurier की लघु कहानी से ली गई थी। जूली क्रिस्टी और डोनाल्ड सदरलैंड फिल्म में एक विवाहित जोड़े के किरदार में हैं जो अपनी बेटी की हाल ही में हुई आकस्मिक मृत्यु के बाद वेनिस की यात्रा करते हैं। फिल्म दु: ख के मनोविज्ञानिक असर पर केंद्रित थी जो बच्चे की मौत के बाद पड़ती है। इस फिल्म को काफी प्रभावशाली माना गया।
Michael Mann द्वारा निर्दशित और रॉबर्ट डे नीरो स्टारर फिल्म हीट के साथ भी अकादमी ने बड़ा अन्याय किया है। फिल्म की कहानी शिकागो के एक पूर्व पुलिस अधिकारी द्वारा एक अपराधी का पीछा करने पर आधारित थी। कमाई के मामले में हीट एक महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई थी। इस फिल्म ने अमेरिका में 67 मिलियन डॉलर और दुनिया भर में कुल 187 मिलियन डॉलर की कमाई की थी। फिल्म 60 मिलियन डॉलर में बनकर तैयार हुई थी।
जॉन कारपेंटर द्वारा निर्देशित हैलोवीन 1978 में रिलीज हुई थी। फिल्म की कहानी सीरियल किलर माइकल मायर्स के इर्द-गिर्द बुनी गई थी। जो हैलोवीन की रात अपनी बड़ी बहन की चाकू से गोदकर हत्या कर भाग जाता है। इस साइको थ्रिलर फिल्म को देख दर्शक हैरान रह गए थे।
वन्स अपॉन अ टाइम इन अमेरिका- 1984
इस फिल्म के साथ भी अकादमी ने कुछ ऐसा ही अन्याय किया। फिल्म को दर्शकों की तरफ से खूब सराहना मिली थी। रिलीज के बाद से ही इसकी चर्चा थी माना जा रहा था कि फिल्म ऑस्कर हासिल करेगी लेकिन फिल्म को नामांकन भी हासिल नहीं हुआ। ऐसा क्यों हुआ इसका जवाब तो जूरी के पास ही होगा लेकिन अगर आपने 1984 में आई इस क्राइम ड्रामा फिल्म को नहीं देखा है तो देख लीजिए।
पैटरसन- 2016
साल 2016 में रिलीज हुई पैटरसन एक ड्रामा फिल्म थी। जिसे Jim Jarmusch ने लिखा और निर्देशित किया है। फिल्म में एडम ड्राइवर पैटरसन की भूमिका में थे। फिल्म में उनकी पत्नी का किरदार निभाया था Golshifteh Farahani ने जो देश का सबसे बड़ा म्यूजिक स्टार बनने और कप केक का व्यवसाय खोलने का सपना देखते हैं। 5 मिलियन डॉलर में बनी इस फिल्म ने दोगुना कलेक्शन किया था।
अकादमी द्वारा पिछले कुछ सालों में कई फिल्मों को नजरअंदाज किया गया है लेकिन यहां जिस फिल्म की बात करनी जरूरी हो जाती है वो है यू वर नेवर रियली हियर। फिल्म का प्रीमियर 2017 के कान्स फिल्म फेस्टिवल में हुआ था। जहां रौमसे ने सर्वश्रेष्ठ पटकथा का पुरस्कार जीता और फीनिक्स ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीता था। लेकिन साल 2017 में रिलीज हुई इस फिल्म को ऑस्कर में एक भी नामंकन नहीं मिला। फिल्म के एक्टर Joaquin Phoenix की खूब तारीफ हुई थी। हालांकि साल 2017 की सबसे ज्यादा चर्चित फिल्म 'ला ला लैंड' को 14 श्रेणियों में नामांकित किया गया था।