11 रुपए में काम करने की वजह हैः सोनम कपूर

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Published by: Updated Fri, 12 Jul 2013 09:34 AM IST
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interview of sonam kapoor

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सुपरहिट फिल्म 'रांझणा' के बाद सोनम कपूर एक बार फिर नॉन ग्लैमरस रोल में दिखने जा रही हैं। 12 जुलाई को रिलीज हो रही राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म 'भाग मिल्खा भाग' में सोनम कपूर फरहान अख्तर की प्रेमिका बनी हैं।
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यह फिल्म सोनम कपूर के लिए कितनी जरूरी है इसका अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि इस फिल्म में काम करने के लिए सोनम ने फिल्म के निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा से महज 11 रूपए लिए। सोनम ने क्यों ऐसा किया वह खुद विस्तार से बता रही हैं।


'रांझणा' की सफलता के बाद आपसे उम्मीदें बढ़ गयी हैं। 'भाग मिल्खा भाग' में आप कितना अलग नजर आनेवाली हैं?

'रांझणा' वाकई एक अभिनेत्री के तौर पर मुङो एक कदम आगे ले जाती है। 'भाग मिल्खा भाग' में मैं मिल्खा सिंह की प्रेमिका के किरदार में हूं। जो उन्हें फौज में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करती है। छोटा किरदार जरूर है लेकिन स्पेशल है। यह मेरे प्रशंसकों को जरूर पसंद आएगा।  

इस फिल्म को 11 रुपए में साइन करने की क्या वजह रही ?

मैं आज जो कुछ भी हूं वो राकेश ओम प्रकाश की वजह से ही हूं। मुङो याद है 'दिल्ली 6' करने से पहले मैं बेहद शर्मिली थी। ज्यादा बातचीत करने से हिचकती थी। ज्यादातर सलवार कमीज ही पहनती थी लेकिन इस फिल्म की शूटिंग के दौरान राकेश ने मुङो मेरे अंदर की सोनम से मिलवाया। जो मुखर है, जो अपने दिल की बात कहने से डरती नहीं है। आज जो आत्मविश्वासी सोनम आपके सामने है उसे मुझसे मिलवाने वाले राकेश सर ही है। इसलिए मैं उनकी फिल्म में मुफ्त में भी काम कर सकती हूं। 

फरहान के साथ यह आपकी पहली फिल्म है उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

इस फिल्म में उनके साथ काम करने की एक वजह फरहान अख्तर भी हैं। इस फिल्म के बाद तो मैं उनकी बहुत बड़ी फैन हो गयी हूं। अभिनय के प्रति उनका सर्मपण और जज्बा काबिलेतारीफ है। मैं जल्द ही उनके साथ एक फिल्म करना चाहूंगी।

क्या वजह रही जो आपने 'खूबसूरत' के रीमेक को हां कहा? रेखाजी से आपने कोई टिप्स ली?

मुङो लगता है आज की जेनरेशन पुरानी सदाबहार फिल्मों की बजाय कार्टून नेटवर्क और गेम्स में इंट्रस्टेड हैं। सो मैं चाहती थी कि मैं ऐसा कुछ करूं। 'खूबसूरत' के निर्देशक शशांक घोष मेरे पास इससे पहले भी एक फिल्म के साथ आये थे लेकिन मैंने उन्हें मना कर दिया था। जब वह 'खूबसूरत' के साथ आए तो मैंने तुरंत हां कर दी। हालांकि शशांक की पिछली फिल्मों को देखते हुए मैं उनके साथ वाकई काम करना चहती थी।

'खूबसूरत' की कहानी शशांक ने आज के दौर के अनुरूप बनाई है। उनका कहना था कि आज वह वक्त नहीं जब एक बहन दूसरी बहन के घर जाकर रहती है और सारे घर की कायापलट कर देती है। इस फिल्म की कहानी भले ही शशांक ने बदल दी हो लेकिन रेखा की आत्मा को इस फिल्म में उसी तरह सुरिक्षत रखा गया है जैसी 'खूबसूरत' में थी।

हां, मैं रेखा आंटी से मिलीं तो वे भी बेहद खुश थीं। उन्होंने कहा कि मैं इस किरदार को अच्छे तरीके से निभा पाऊंगी और उन्होंने मुङो कई टिप्स भी दिये। जैसे काम को गंभीरता से लेना चाहिए। लेकिन फिल्म इंडस्ट्री को ही अपनी जिंदगी नहीं बना लेना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि काम करो और अपने साथ हमेशा अपने अच्छे दोस्तों को रखो।

अभिनेत्नी बनने के बाद जिंदगी में में क्या बदलाव पाती हैं?

बहुत मेहनत करनी पडती है। बहुत काम करना पडता है। टफ होती हैं हमारी जिंदगी भी। लोगों को ऐसा लगता है कि हम बहुत आराम की जिंदगी जीते हैं। लेकिन हमें भी कितना हार्डवर्क करना होता है। यह सिर्फ हमें ही पता होता है। मुङो नहीं लगता कि हमारी जिंदगी सामान्य रह जाती है। हमें फिल्म के अनुसार अपना लुक रखना होता है। अपना पूरा जीवन उस फिल्म के रोल के हिसाब से।

अपने अब तक के कैरियर में आपने बहुत उतार चढ़ाव देखे हैं क्या आप अपने कैरियर से खुश हैं?

हां खुश हूं क्योंकि काम मेरी जिंदगी का हिस्सा है। जिंदगी नहीं है। मैं मानती हूं कि मेरी ज्यादातर फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रही हैं लेकिन मुङो अफसोस नहीं क्योंकि मेरी हर फिल्म मुङो कुछ सीखा गई है।

यकीन कीजिए हर सुबह उठकर मैं भगवान को शुक्रिया अदा करती हूं कि उन्होंने मुङो ऐसी जिंदगी दी है। भले ही मैं नंबर वन स्टार नहीं हूं फिर भी जो परिवार, जो फिल्में और जो लोग मुङो मिले हैं मैं उनसे काफी संतुष्ट हूं।

आपके पापा ने एक बार इंटरव्यू में कहा था कि वे कभी नहीं चाहते थे कि आप फिल्मों को अपना कैरियर बनाए?

हां पापा को परेशानी थी क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि जिस संघर्ष से वे गुजरे हैं, मैं भी वैसे ही संघर्ष को हम भी गुजरे लेकिन अब उन्हें गर्व है। हां कभी कभी वह जरूर झल्ला जाते हैं क्योंकि मैं उनसे पैसे नहीं लेती हूं। मैं जब 18 साल की थी तब से काम कर रही हूं और अपना खर्च खुद उठा रही हूं। वह हमेशा कहते हैं कि तुम्हें इतनी जल्दी काम करने की क्या ज़रूरत है।

एक दिन मैंने उन्हें समझाया कि आपने स्टार अनिल कपूर के तौर पर इतनी मेहनत से जो कमाया है वह आपका है मैं उसे खर्च नहीं करना चाहती। आपने हमारे लिए बहुत किया अब हमारी बारी है। मैं नहीं चाहती कि आपने इतनी मेहनत से जो नाम और शोहरत कमाई है उस पर हम धब्बा लगाएं। मेरी इस बात पर वह और नाराज़ हो गये लेकिन फिर मैंने उनसे एक ही बात कही कि ऐसा करने के पीछे आपको नीचा दिखाना नहीं है क्योंकि मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं और आपका सिर गर्व से ऊंचा करना चाहती हूं।

फिल्मों में अभिनेत्रियों की मौजूदा स्थिति आप कैसी पाती है?

सच यह है कि हम जिस समाज में रहते हैं वह पुरूषप्रधान है। साथ ही मुङो लगता है अब वो दौर नहीं रहा जब बिमल रॉय, विजय आनंद और गुरुदत्त जैसे निर्देशक थे जो 'सुजाता', 'बंदिनी' और 'गाइड' जैसी फिल्में बनाते थे। जिनमें महिला किरदार पुरूषों से मजबूत हुआ करते थे।

सत्तर के दशक से अब तक पुरूषों का ही राज रहा है। हां श्रीदेवी ने कुछ फिल्मों से अपनी पहचान बनाई लेकिन सभी फिल्मों में पुरूषों का ही बोलबाला रहा। फिलहाल आएशा, कहानी और डर्टी पिक्चर के ज़रिये वो दौर कुछ कुछ लौटता सा नज़र आ रहा है लेकिन अभी इसमें काफी वक्त है।

आपकी ख्वाहिश किस तरह के किरदार हैं?

मैं परदे पर अलग अलग किरदार निभाना चाहती हूं। जो भारतीय नारी की एक अलग ही छवि को प्रस्तुत कर सके। 'गाइड' में जैसा वहीदा जी का किरदार था, सरस्वतीचंद्र में नूतन का किरदार और 'उमराव जान' की रेखा का किरदार निभाना चाहती हूं काश मैं ऐसा कुछ किरदार निभा सकती थी।

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