क्या सेंसर के सहारे चलेगी बार बार देखो?
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सेंसर बोर्ड को लेकर विवाद पैदा कर देना इन दिनों फिल्म के प्रचार का फैशन बन गया है। सिद्धार्थ-कैटरीना स्टारर बार बार देखो के बारे में इंडस्ट्री में यही चर्चा है। प्रचार के सीमित बजट और फिल्म में निर्माताओं का भरोसा कम होने की वजह से ऐसा किया जा रहा है...
-सेंसर बोर्ड को इन दिनों हर वह निर्माता-निर्देशक निशाने पर रख रहा है जिसे अपनी फिल्म पर कम और विवादों से सफलता का ज्यादा भरोसा है। शुक्रवार को रिलीज हो रही निर्देशक नित्या मेहरा की बार बार देखो भी इसी श्रेणी में बताई जा रही है। सूत्रों की मानें तो सिद्धार्थ मल्होत्रा और कैटरीना कैफ स्टारर यह फिल्म कंटेंट में कमजोर है। इसीलिए सेंसर को मुद्दा बना कर विवाद खड़े करने की कोशिशें हो रही हैं। पिछले दिनों सेंसर ने फिल्म से एक ब्रेसरी शॉट और एनिमेशन पोर्न किरदार सविता भाभी से जुड़ा संवाद हटाने को कहा था, जिसे निर्माताओं ने यू/ए प्रमाणपत्र पाने के लिए स्वीकार कर लिया। इसे अर्सा बीत गया है परंतु शुक्रवार को ही रिलीज होने जा रही फ्रीकी अली का प्रमाणपत्र आने के बाद बार बार देखो से जुड़े सूत्र फिर ब्रेसरी सीन काटने की बात उठा कर विवाद बढ़ाने की कोशिश में हैं।
सेंसर ने फ्रीकी अली को बिना कट के यू/ए सेर्टिफिकेट दिया है। बार बार देखो से जुड़े सूत्र अब कह रहे हैं कि क्या सेंसर बोर्ड बताना चाहता है कि पुरुषों के इनरवीयर का डिस्प्ले और चिल्ला-चिल्ला कर उन्हें बेचता हीरो (नवाजुद्दीन सिद्दिकी) पर्दे पर चल सकते हैं परंतु महिलाओं के गारमेंट्स नहीं दिखाए जा सकते? फिल्म से जुड़े लोगों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में जब यह दिखाया जा सकता है तो हिंदी फिल्मों में क्यों नहीं?
सूत्रों की मानें तो हकीकत यह है कि बार बार देखो के निर्माता फिल्म को लेकर घबराए हैं। सिद्धार्थ मल्होत्रा को स्टूडेंट ऑफ द ईयर जैसी कामयाबी बाद की चार फिल्मों में नहीं मिली और कैटरीना की पिछली दो फिल्में फैंटम और फितूर फ्लॉप थीं। बार बार देखो में 31 साल के युवा सिद्धार्थ को 60 साल के बूढ़े तक का रोल दिया गया है। वह गणित के टीचर बने हैं। फिल्म में बताया गया विषय कई फिल्मों में आ चुका है कि आज के युवा रिश्ते में कमिटेंट से डरते हैं। सूत्र बता रहे हैं कि कि इस फिल्म की कहानी में लंबी छलांगें हैं, जो कई जगहों पर गले नहीं उतरती। यहां कहीं फ्लैश बैक है तो कहीं फ्लैश फॉरवर्ड। फिल्म की रफ्तार भी बहुत धीमी बताई जा रही है।
फिल्म में होता है सविता भाभी का जिक्र
सूत्रों के मुताबिक फिल्म में शादी से डरा हुआ हीरो मंडप में ही सपना देखने लगता है कि सात फेरों के बाद उसकी जिंदगी का क्या होगा और उसकी नींद सीधे हनीमून पर खुलती है। वह जब तक यह समझे कि उसकी शादी कब हुई, कुछ ही मिनट में उसके बच्चे भी आ जाते है। दस साल का बेटा और एक छोटी बेटी। कहानी में तर्क को जगह नहीं दी गई है और तारतम्यता (सीक्वेंसिंग) की भी समस्या बताई जा रही है। जब हीरो का सपना खत्म होता है तो मंडप में ही पंडित उसे समझाता है कि जिंदगी गणित नहीं है। चूंकि फिल्म का हीरो आने वाला कल देखता है इसलिए फिल्म का नाम शुरुआत में ‘कल जिसने देखा’ रखा गया था।
सूत्रों का कहना है कि फिल्म की इन्हीं बातों की वजह से निर्देशक को भी मीडिया से दूर रखा गया कि कहीं साक्षात्कारों में कहानी के सिरे न खुल जाएं। सितारों द्वारा शहरों में घूम-घूम कर फिल्म के प्रमोशन के बावजूद इसकी वैसी चर्चा नहीं दिख रही है, जिसकी उम्मीद निर्माता कर रहे थे। निर्माता के आर्थिक संकट भी प्रमोशन में कमी की वजह बताए जा रहे हैं। फिल्म का बजट 45 से 50 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।
ऐसे में जानकारों मान रहे हैं कि बार बार देखो से जुड़े लोग फिल्म को विवादित बता कर चलाने की कोशिश में हैं। सूत्रों की मानें तो सेंसर ने इस फिल्म में चार छोटे कट सुझाए, जिनकी लंबाई एक मिनट से भी कम है। इसमें सविता भाभी वाला डायलॉग शामिल है। असल में यू/ए प्रमाणपत्र वाली फिल्म सीधे सैटेलाइट प्रसारण के लिए जाती है, अतः पोर्न किरदार की तरफ इशारा करता संवाद और ब्रेसरी से संधित दृश्य हटाए गए।