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Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में हिंदी, मराठी, ओडिया, भोजपुरी, तेलुगु में नेता क्यों मांग रहे वोट? जानें वजह

Thu, 11 Apr 2024 06:55 PM IST
शिव शरण शुक्ला डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 11 Apr 2024 06:55 PM IST
सार

कांकेर लोकसभा सीट का क्षेत्र हिस्सा महाराष्ट्र और ओडिशा की बार्डर से लगा हुआ है। कांकेर में जनप्रतिनिधि हिंदी के अलावा छत्तीसगढ़ी के अलावा गोंडी बोली में अपना चुनाव प्रचार कर रहे हैं। महासमुंद में 50 से अधिक गांवों में उड़िया भाषा का प्रभाव है, जहां पर वोट मांगने के लिए उड़िया भाषा का उपयोग किया जा रहा है।

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Why are leaders asking for votes in Hindi, Marathi, Odia, Bhojpuri, Telugu in Chhattisgarh? Know reason
लोकसभा चुनाव 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लोकसभा चुनाव 2024 के प्रचार में अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में से सीत सीटें ऐसी हैं, जहां पर जनप्रतिनिधि वोट मांगने के लिए अलग-अलग भाषाओं का इस्तेमाल करते हुए नजर आ रहे हैं। दरअसल, छत्तीसगढ़ की सीमा सात राज्यों से जुड़ी हुई है। इनमें मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और झारखंड शामिल हैं। प्रदेश को एतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के साथ ही भाषाई विविधता के लिए भी जाना जाता है। बस्तर, सरगुजा, कांकेर, रायगढ़ और कोरबा लोकसभा में आदिवासी समाज के लोग बड़ी तादाद में रहते हैं। ऐसे में नेताओं को वोट मांगने के लिए गोंडी, हल्बी, कु़डुक, सरगुजिहा के साथ ही पड़ोसी राज्यों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भोजपुरी, तेलुगु और उड़िया भाषा का भी इस्तेमाल करते हुए नजर आ रहे हैं।
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हिंदी, गोंडी और हल्बी में प्रचार
प्रदेश के बस्तर, सरगुजा, कांकेर, रायगढ़ और कोरबा लोकसभा क्षेत्र में हिंदी के अलावा स्थानीय बोली और भाषा के बोलने और समझने वालों की संख्या लाखों में है। बस्तर में आठ विधानसभा सीटें आती हैं। इस सीट पर हिंदी के अलावा गोंडी और हल्बी बोली का उपयोग ज्यादा होता है। इस सीट पर भाजपा, कांग्रेस के अलावा बसपा और सीपीआई का उम्मीदवार भी मैदान में है। यहां प्रत्याशी स्थानीय बोली का ध्यान रखते हुए प्रचार प्रसार करते हुए दिख रहे है।
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कांकेर लोकसभा सीट का क्षेत्र हिस्सा महाराष्ट्र और ओडिशा की बार्डर से लगा हुआ है। कांकेर में जनप्रतिनिधि हिंदी के अलावा छत्तीसगढ़ी के अलावा गोंडी बोली में अपना चुनाव प्रचार कर रहे हैं। महासमुंद में 50 से अधिक गांवों में उड़िया भाषा का प्रभाव है, जहां पर वोट मांगने के लिए उड़िया भाषा का उपयोग किया जा रहा है।
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सरगुजा में सरगुजिहा बोली में प्रचार
सरगुजा सीट के शहरी इलाकों में हिंदी-छत्तीसगढ़ी के अलावा गांवों में सरगुजिहा बोली में प्रचार-प्रसार हो रहा है। सरगुजा का शहरी इलाका उत्तर प्रदेश और झारखंड की सीमा से लगा हुआ है। अंतिम छोर पर बसे गांवों में भोजपुरी और झारखंडी भाषा में प्रचार होते दिख रहा है। राजनांदगांव सीट की सीमा के कुछ गांव महाराष्ट्र की सीमा से जुड़े हैं। इन गांवों में मराठी भाषा जानने वाले लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। इसलिए यहां के कुछ हिस्सों में मराठी भाषा के अलावा हल्बी, गोंडी बोली का उपयोग भी प्रचार-प्रसार में देखा जाता है


रायगढ़ लोकसभा सीट सीट वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय चार बार सांसद रह चुके हैं। इस सीट पर आदिवासी समुदाय के लोग बड़ी तदाद में हैं। ऐसे में यहां पर प्रचार के लिए गोंडी, हल्बी भाषा में चुनाव प्रचार के साथ ही उड़िया में प्रचार किया जाता है। कोरबा सीट का कुछ हिस्सा मध्यप्रदेश की सीमा से लगा हुआ है। इसके अधिकांश क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ी और हिंदी भाषा का ही उपयोग होता है। यहां के कुछ गांवों में भोजपुरी और झारखंडी भी बोली जाती है। इसलिए यहां पर इन भाषाओं में प्रचार हो रहा है।
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