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LS Polls: वरुण मान नहीं रहे हैं, तो प्रियंका को कैसे घेरेगी BJP? BSP ने ठाकुर प्रसाद यादव को उतारा मैदान में

Mon, 29 Apr 2024 12:28 AM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Mon, 29 Apr 2024 12:28 AM IST
सार

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के पत्र के बाद भाजपा नेताओं को कोई संदेह नहीं है। पत्र में सोनिया गांधी ने रायबरेली के लोगों को अपने परिवार के सदस्य के चुनाव लड़ने का भरोसा दिया है। भाजपा के नेता मानकर चल रहे हैं कि वह नाम प्रियंका गांधी वाड्रा का होगा। अमेठी से राहुल गांधी के चुनाव लड़ने की पूरी संभावना है।

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Varun Gandhi is refusing to contest elections from Rae Bareli seat, in such a situation what option does BJP
प्रियंका गांधी-वरुण गांधी। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व महासचिव, पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी लक्ष्मण रेखा को खूब समझते हैं और अपनी बड़ी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के मुकाबले में रायबरेली से नहीं खड़ा होना चाहते। उन्होंने दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित भाजपा मुख्यालय में बैठने वाले शीर्ष नेता के प्रस्ताव को बड़ी विनम्रता से लौटा दिया है। भाजपा में वरुण के दोस्त नेताओं ने भी उन्हें मनाने की कोशिश की है, लेकिन वरुण इस मामले में लोहे से लोहा काटने की भाजपा की नीति पर कुर्बान नहीं होना चाहते। हालांकि भाजपा में अभी कोई इस खबर की पुष्टि नहीं कर रहा है।

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उत्तर प्रदेश के एक बड़ा भाजपा नेता ने कहा कि वरुण गांधी की मां, मेनका गांधी सुल्तानपुर से प्रत्याशी हैं। वरुण गांधी के बारे में भाजपा के शीर्ष नेताओं और रणनीतिकारों ने कुछ अच्छा और बड़ा सोच रखा है। वरुण गांधी भाजपा के युवा, ओजस्वी नेता हैं। जैसे ही उनके बारे में कोई निर्णय होगा, मीडिया को पता चल जाएगा। वरुण गांधी पीलीभीत से 2019 में चुने गए सांसद हैं। इस बार वह पीलीभीत से चुनाव लड़ना चाहते थे। नामांकन के दस्तावेज का सेट खरीद रखा था। लगातार पीलीभीत में लोगों के संपर्क में थे, लेकिन एन वक्त पर भाजपा ने वहां से प्रत्याशी के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री, पूर्व कांग्रेसी जितिन प्रसाद के नाम की घोषणा की। इसे वरुण के लिए बड़ा झटका माना जा रहा था। खैर, पीलीभीत में मतदान भी हो चुका है।  
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वरुण नहीं तो भाजपा के पास रायबरेली से क्या विकल्प हैं?
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के पत्र के बाद भाजपा नेताओं को कोई संदेह नहीं है। पत्र में सोनिया गांधी ने रायबरेली के लोगों को अपने परिवार के सदस्य के चुनाव लड़ने का भरोसा दिया है। भाजपा के नेता मानकर चल रहे हैं कि वह नाम प्रियंका गांधी वाड्रा का होगा। अमेठी से राहुल गांधी के चुनाव लड़ने की पूरी संभावना है। इस तरह से अमेठी और रायबरेली से राहुल-प्रियंका के मैदान में उतरने के बाद इसका असर आसपास की कई सीटों पर पड़ने की संभावना है। रणनीतिकारों को पता है कि इससे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में जान आ जाएगी। इंडिया गठबंधन के पक्ष में चुनावी हवा बनने लगेगी। इसलिए भाजपा लोहे से लोहा काटने की नीति के तहत वरुण को मना रही है। वरुण ने दीन दयाल उपाध्याय मार्ग के बड़े नेता को अपनी मजबूरी बता दी है। अपने दोस्तों को भी कारण बता दिया है। भाजपा के नेता उन तक संदेश पहुंचा चुके हैं कि वरुण को अपने राजनीतिक भविष्य की चिंता भाजपा के शीर्ष नेताओं पर छोड़ देनी चाहिए। वरुण अपने प्रियजनों को विनम्रता से संदेश दे रहे हैं कि वह कोई दूध पीते बच्चे नहीं हैं। हालांकि अभी यह चैप्टर पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि वरुण गांधी न माने, तो भाजपा विकल्प के तौर किन चेहरों पर मंत्रणा कर रही है। इनमें कोई हिंदुत्व की राजनीति से जुड़ा चेहरा हो सकता है।


वरुण गांधी के सामने सबसे बड़ा असमंजस क्या है?
प्रियंका गांधी वरुण के बड़े पिता पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुत्री हैं। हालांकि वरुण गांधी की मां मेनका गांधी ने 1984 में अमेठी से दूसरी बार चुनाव लड़ने जा रहे अपने ज्येष्ठ राजीव गांधी के खिलाफ निर्दलीय पर्चा भर दिया था। वरुण को गोद में लेकर संजय गांधी की विधवा के चेहरे पर चुनाव भी लड़ीं। इस दौरान तमाम कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह गंदे नारों से दीवार को रंगीन कर दिया था, लेकिन राजीव गांधी ने इन्हें हटवाया। समर्थकों को झिड़की भी लगाई। दोनों दो परिवार के रूप में रहे और रिश्ते बहुत सामान्य नहीं रहे। लेकिन पिछले कई दशक से सोनिया गांधी और मेनका गांधी के परिवार ने अपनी मर्यादा का ख्याल रखा। एक दूसरे के खिलाफ मर्यादा के विपरीत बोलने, आचरण करने से बचते हैं। इस जिम्मेदारी को प्रियंका गांधी वाड्रा ने अधिक समझदारी से आगे बढ़ाया। वह वरुण से स्नेह रखती हैं। कहा जाता है कि संवाद भी करती हैं। राहुल गांधी और वरुण गांधी भी आपस की संजीदगी को समझते हैं। समझा जा रहा है कि यही संजीदगी और संवेदना वरुण गांधी के सामने आ रही है। वह खून से खून की राजनीतिक लड़ाई का मोहरा बनने में हिचक रहे हैं।  

भाजपा के पास चेहरे की कमी नहीं है
दिल्ली में भाजपा के एक नेता और हैं। उत्तर प्रदेश में राजनीति करते थे। वह कहते हैं कि उन्हें रायबरेली में प्रियंका के खिलाफ उतरने वाले चेहरे के बारे में जानकारी नहीं है। इसके लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कुछ सोचा होगा। सूत्र का कहना है कि अमेठी में भाजपा की उम्मीदवार स्मृति ईरानी हैं। ईरानी ने 2019 में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी को चुनाव में हराया था। इसलिए रायबरेली में प्रियंका गांधी वाड्रा चुनौती देना महत्वपूर्ण हैं। कांग्रेस के नेताओं को भी इसका अंदाजा है। उन्हें पता है कि रायबरेली, अमेठी सें प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के उतरने की घोषणा के बाद भाजपा उन्हें (प्रियंका) दमदारी से घेरेगी। अमेठी और रायबरेली में 29 अप्रैल से 06 मई के बीच में नामांकन होना है। समझा जा रहा है कि इस रहस्य से दो मई तक पर्दा उठ सकता है।   

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