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Hindi News ›   Election ›   Lok Sabha ›   Tamluk: Mamata Banerjee will be able to take revenge from Adhikari brothers for defeat in Nandigram

तमलुक ग्राउंड रिपोर्ट: अधिकारी बंधुओं से नंदीग्राम का बदला ले पाएंगी ममता!; भर रहीं जनसभाओं में हुंकार

Wed, 22 May 2024 06:51 AM IST
विजय त्रिपाठी विजय त्रिपाठी
Updated Wed, 22 May 2024 06:51 AM IST
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सार
प. बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में बसा तमलुक ऐतिहासिक शहर है, जो दक्षिण में बंगाल की खाड़ी और पश्चिम में सुवर्णरेखा नदी से घिरा है। प्राचीन समय में इसे ताम्रलिप्ति या ताम्रलिप्ता के नाम से जाना जाता था। करीब 82% हिंदू, 17% मुस्लिमों की आबादी वाली सीट पर वोटिंग का जज्बा गजब का है। पिछली बार 85% से ज्यादा वोट पड़े।
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Tamluk: Mamata Banerjee will be able to take revenge from Adhikari brothers for defeat in Nandigram
सुवेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी - फोटो : पीटीआई

विस्तार

जिस नंदीग्राम की जमीन से ममता बनर्जी ने साल 2007 में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन की शक्ल में ऐसा तूफान खड़ा किया कि 34 साल से जमी वामपंथी सत्ता उखड़ गई, उसी नंदीग्राम में ममता को पिछले विधानसभा चुनाव में अपने ही पुराने भरोसेमंद साथी शुभेंदु अधिकारी के हाथों शिकस्त खानी पड़ी। हालांकि ममता ने धांधली का आरोप लगाते हुए फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु को करीब दो हजार वोटों के अंतर से विजेता घोषित किया गया था। यों, मतगणना के दौरान पहले राउंड से ही ममता आगे थीं।



इसी कथित हार का बदला लेने के लिए ममता जनसभाओं में हुंकार भर रही हैं। दरअसल, तमलुक संसदीय क्षेत्र में ही नंदीग्राम विधानसभा सीट आती है। यहां प्रचार के दौरान ममता लोगों को 2021 के नंदीग्राम चुनाव की याद दिलाते हुए कहती हैं कि उस दिन गड़बड़ी कर मुझे हराया गया, मैं उसे नहीं भूली हूं। अब इसका बदला लूंगी। ममता का बदला क्या हाईकोर्ट छोड़ भाजपा के टिकट पर जनता की अदालत में उतरे जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय को हराकर पूरा हो सकेगा...फैसला जनता को करना है।


उम्रदराज अभिजीत से मुकाबिल दोनों प्रमुख प्रतिद्वंद्वी युवा हैं। तृणमूल की सभाओं में गूंजने वाले प्रसिद्ध गीत खेला होबे...को रचने वाले युवा तुर्क देबांशु भट्टाचार्य को तृणमूल ने यहां से उतारा है। सीपीएम ने आंदोलनकारी सयान बनर्जी को टिकट दिया है।

प. बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में बसा तमलुक ऐतिहासिक शहर है, जो दक्षिण में बंगाल की खाड़ी और पश्चिम में सुवर्णरेखा नदी से घिरा है। प्राचीन समय में इसे ताम्रलिप्ति या ताम्रलिप्ता के नाम से जाना जाता था। करीब 82% हिंदू, 17% मुस्लिमों की आबादी वाली सीट पर वोटिंग का जज्बा गजब का है। पिछली बार 85% से ज्यादा वोट पड़े।

साल 1952 के पहले चुनाव से साल 2009 तक कभी कांग्रेस, तो कभी कम्युनिस्ट यह सीट जीतते रहे। इसके बाद ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने दोनों दलों को मैदान से बाहर कर अपना झंडा फहरा दिया। उनके अति विश्वस्त शुभेंदु अधिकारी 2009 और 2014 का चुनाव जीते। 2016 में वे तृणमूल से भाजपा की ओर खिसक गए, तो उनके भाई दिब्येंदु अधिकारी ने 2016 के उपचुनाव में बतौर तृणमूल प्रत्याशी यहां का चुनाव रिकॉर्ड करीब 60 फीसदी वोट हासिल कर जीता। बाद में वे भी भाजपा में शामिल हो गए। लोकसभा क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से तीन पर भाजपा और चार पर तृणमूल का कब्जा है।

2014 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल के शुभेंदु अधिकारी ने सीपीआई (एम) के एसके. इब्राहिम अली को पराजित कर जीत हासिल की थी। इससे पहले 2009 में भी तृणमूल के टिकट पर लड़े शुभेंदु ने माकपा के लक्ष्मण सेठ को पराजित किया था। लक्ष्मण सेठ लगातार तीन बार इस सीट से सांसद रहे।

यह बंगाल का चुनाव नहीं
मेडिकल मोड़ पर चाय की दुकान पर बैठे रंजीत कहते हैं, यह बंगाल का चुनाव नहीं है। इसलिए वोट भी उसी तरह से पड़ेंगे। हवा भाजपा की तरफ है। अभिजीत कम से कम दो लाख वोटों से जीत दर्ज करेंगे। आखिर ऐसा क्यों...वे कहते हैं, देखिए देश के लिए मोदी चाहिए। सेंटर मजबूत होगा तो देश मजबूत होगा।

दीदी ने सब दिया
गांव से दवा लेने आए किसान रवि कहते हैं, दीदी ने सब कुछ दिया है। लेकिन सेंटर ने तो केवल वादा ही किया। देखिए हमारे घर में महिलाओं को लक्ष्मी भंडार दीदी देती है, कन्या श्री देती हैं और रूप श्री जैसी कई अन्य सुविधाएं देती हैं।

भ्रष्टाचार ने रिकॉर्ड तोड़े बेरोजगारी से युवा परेशान
युवा तपन मुखर्जी कहते हैं, बंगाल में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और विकास ये मुद्दे हैं। भ्रष्टाचार ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। हाल ही में 26 हजार शिक्षकों की नियुक्ति रद्द हो गई है। वे कहते हैं, बेरोजगारी बहुत है। हम जैसे पढ़े-लिखे युवकों को अगर यहीं पर नौकरी मिल जाए, तो बाहर जाना ही नहीं पड़े।

यह क्षेत्र शुभेंदु का गढ़
यहां भाजपा से ज्यादा शुभेंदु की प्रतिष्ठा दांव पर है। यह सीट अधिकारी परिवार का गढ़ माने जाने वाले पूर्व मेदिनीपुर जिले का हिस्सा है। परिवार के मुखिया शिशिर अधिकारी बगल की कांठी लोकसभा सीट से लगातार तीन बार से तृणमूल से सांसद हैं। उनके बेटे सौमेंदु अधिकारी भाजपा से इस सीट पर उतरे हैं। भाजपा मान रही है कि अधिकारी परिवार का यहां रसूख उनके प्रत्याशी की जीत की राह आसान करेगा।

तीनों प्रमुख प्रत्याशी मानते हैं कि यहां बेरोजगारी बड़ी समस्या है और उद्योगों को यहां लाने की सख्त जरूरत है। भाजपा चुनाव प्रचार में पीएम मोदी के नेतृत्व को चमत्कारी बताकर गुणगान कर रही है। केंद्र की लोक कल्याणकारी नीतियों को राज्य में लागू न होने देने के ममता के हठ को सभाओं में उभारा जा रहा है। मोदी की अपील का यहां के लोगों पर असर दिखता है और चुनाव दिल्ली की सरकार का होने से भाजपा को कुछ हद तक माइलेज भी है। पिछले कुछ साल में भाजपा ने यहां अपने संगठन को मजबूत भी कर लिया है।

तमलुक विधानसभा सीट के तृणमूल के विधायक सौमेन महापात्रा फिकरा कसते हैं कि बड़े शहरों में पले-बढ़े और इस उम्र में राजनीति में आने वाले जज साहब गरीबों की भला क्या सेवा कर पाएंगे। पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर व भाजपा विधायक अशोक डिंडा कहते हैं कि अभिजीत के पास क्षेत्र के विकास की एक से एक योजनाएं है। लोग उनसे प्रभावित हो रहे हैं।

पिछले चुनाव के नतीजे

2019
उम्मीदवार  दल मत%
दिब्येंदु अधिकारी तृणमूल 50
सिद्धार्थशंकर भाजपा 37
एसके इब्राहिम अली सीपीएम  9

  
2016 उपचुनाव परिणाम
उम्मीदवार दल मत%
दिब्येंदु अधिकारी तृणमूल 60
मंदिरा पांडा सीपीएम 22
अम्बुक्षा महंती भाजपा  15

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