LS Polls: समस्याएं अपार फिर भी खामोश नजर आ रही है नई दिल्ली सीट, आप को वोट ट्रांसफर होने पर बना हुआ है संशय!
नई दिल्ली लोकसभा सीट देश की सबसे पुरानी वीआईपी सीटों में से एक है। इस सीट की अहमियत इसी बात से लगाई जा सकती है कि राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास और सांसदों के बंगले, सुप्रीम कोर्ट के अलावा इंडिया गेट, अमृत उद्यान, प्रधानमंत्री संग्रहालय जैसे दर्शनीय स्थल इसी के अंतर्गत आते हैं। इस संसदीय क्षेत्र में बड़ी संख्या में केंद्र और राज्य सरकार के दफ्तर और कालोनियां हैं।
विस्तार
दिल्ली की दूसरी लोकसभा सीटों के मुकाबले नई दिल्ली लोकसभा सीट पर चुनावी माहौल शांत नजर आ रहा है। वीवीआईपी इलाके वाली सीट पर न तो राजनीतिक दलों के पोस्टर नजर आ रहे हैं, न ही प्रत्याशियों के प्रचार का शोर-गुल सुनाई दे रहा है। भाजपा-आम आदमी पार्टी सहित अन्य राजनीतिक दलों ने वीवीआईपी क्षेत्रों को छोड़ रहवासी क्षेत्र, बस्तियों और व्यापारिक क्षेत्रों में प्रचार को केंद्रित रखा हुआ है। नई दिल्ली के पॉश इलाकों को छोड़कर करोल बाग, राजेंद्र नगर, मोती नगर, पटेल नगर, मालवीय नगर, कस्तूरबा नगर और आरके पुरम में उम्मीदवार जनसंपर्क का एक दौर पूरा कर चुके हैं। अब सभी का फोकस दिग्गज नेताओं के रोड शो और सभाओं पर बना हुआ है। अंतिम दिन तक राजनीतिक दल स्टार प्रचारकों की रैलियों के जरिए इस सीट पर माहौल बनाने की कोशिशों में जुटे हुए दिखाई दिए।
दरअसल, नई दिल्ली लोकसभा सीट देश की सबसे पुरानी वीआईपी सीटों में से एक है। इस सीट की अहमियत इसी बात से लगाई जा सकती है कि राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री आवास और सांसदों के बंगले, सुप्रीम कोर्ट के अलावा इंडिया गेट, अमृत उद्यान, प्रधानमंत्री संग्रहालय जैसे दर्शनीय स्थल इसी के अंतर्गत आते हैं। इस संसदीय क्षेत्र में बड़ी संख्या में केंद्र और राज्य सरकार के दफ्तर और कालोनिया हैं। यही वजह है कि यहां के मतदाताओं में ज्यादातर तादाद सरकारी कर्मचारियों की है। इस सीट के मतदाताओं में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा के अलावा कई बड़े नेता शामिल हैं।
वीआईपी सीट पर ये मुद्दे है हावी
संसद में पहली बार क्षेत्र की नुमाइंदगी 1952 में उत्तर प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी ने की थी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी दो बार और फिल्म अभिनेता राजेश खन्ना इस सीट से एक बार सांसद रह चुके हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री जगमोहन तीन बार और कांग्रेस नेता अजय माकन भी दो बार यहां से सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर मीनाक्षी लेखी जीत दर्ज कर इस क्षेत्र की सांसद बनीं। इस बार भाजपा ने दिवंगत केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, इंडिया गठबंधन ने दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती को चुनाव मैदान में उतारा है।
नई दिल्ली लोकसभा सीट के मुद्दे और मतदाताओं का मिजाज अलग-अलग है। इस लोकसभा क्षेत्र में सड़क, सीवर, बिजली और यातायात की सुविधाएं भले ही अन्य लोकसभा क्षेत्रों से बेहतर हैं, लेकिन कनॉट प्लेस, खान मार्केट और बंगाली मार्केट बड़े व्यावसायिक क्षेत्र में दुकानों की सीलिंग सबसे बड़ा मुद्दा है। अमर उजाला से चर्चा में इन बाजारों के स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पानी और वाहन पार्किंग की सुविधाओं की भी कमी है। कई व्यावसायिक क्षेत्र ऐसे हैं, जिनमें पार्किंग न होने की वजह से कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। लोग राजनीतिक दलों के माध्यम से इन समस्याओं से निजात चाहते हैं। उनका कहना है कि जो राजनीतिक दल इन समस्याओं से निजात दिलाएगा, उसी के प्रत्याशी को वोट देंगे।
उम्मीदवारों से लोगों ने भरवाया मांग पत्र
नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के व्यापारी एनडीएमसी की ओर से की जाने वाली सीलिंग पर रोक लगवाना चाहते हैं और पूर्व में सील हो चुकी दुकानों को डी-सील कराना चाहते हैं। व्यापारियों का कहना है कि जो भी प्रत्याशी हमसे वोट मांगने आए, हमने उनसे अपना मांग पत्र भरवाया है। हमने अपनी समस्याएं मांग पत्र में विस्तार से बताई हैं। दोनों बड़ी पार्टियों के उम्मीदवारों से हमने ये मांग पत्र भरवाया है। उम्मीदवारों से आश्वासन भी मिला है कि अगर वे जीतेंगे तो हमारी समस्या का हल प्राथमिकता के आधार पर करेंगे। राजेंद्र नगर स्थित शंकर रोड़ पर कपड़ों के व्यापारी जयेश गर्ग का कहना है कि व्यापारी वर्ग को सबसे बड़ी दिक्कत एनडीएमसी से है। प्रॉपर्टी टैक्स के लिए बड़े स्तर पर सीलिंग की गई है। अपने प्रतिष्ठानों के स्ट्रक्चर में मामूली बदलाव के लिए भी एनडीएमसी से अनुमति लेनी पड़ती है और यहां व्यापारियों का उत्पीड़न किया जाता है।
सफाई और पार्किंग सबसे बड़ी समस्या
एनडीएमसी क्षेत्र को छोड़कर अन्य क्षेत्रों के लोग सफाई की व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं। इन क्षेत्रों में पानी की कमी है। दिन भर में थोड़े समय के लिए पानी की आपूर्ति हो पाती है। मोती नगर में रहने वाली विक्रम सिंह का कहना है कि क्षेत्र में पार्किंग की बड़ी समस्या है। कई बार पार्किंग के नाम पर झगड़े तक हो जाते हैं। पार्किंग के अलावा दूसरी बड़ी दिक्कत सड़कों की है। यहां मेन रोड से कॉलोनियों के अंदर जाने वाली सड़कों की हालत बहुत ही खराब है। करोलबाग निवासी सुधा शर्मा कहती हैं कि हर दिन इस क्षेत्र में जाम लगता हैं। शाम को सबसे ज्यादा हालत खराब हो जाती है। देश के विभिन्न हिस्सों लोग यहां खरीदारी करने आते हैं, लेकिन उनके लिए पार्किंग की व्यवस्था ठीक नहीं है। बाजारों के कारण रहवासी गलियों तक में जाम लगा रहता है।
मालवीय नगर निवासी विनोद चोपड़ा कहते हैं कि इस बार दिल्ली में भले ही आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रहे हों, लेकिन हकीकत यही है कि मुस्लिम वोट को छोड़कर दोनों ही पार्टियों के लिए अपने खुद के कट्टर समर्थकों के वोट एक-दूसरे के लिए ट्रांसफर करवाना बड़ी चुनौती होगी। सीएम केजरीवाल के जेल से बाहर आने के बाद भले ही दोनों दल एक-साथ प्रचार करते नजर आएं, लेकिन हकीकत ये है कि कुछ दिनों पहले तक दोनों पार्टियां के बीच ग्राउंड पर कोई तालमेल नजर नहीं आ रहा था। ऐसे में आप उम्मीदवार सोमनाथ भारती के लिए ये चुनाव किसी चुनौती से कम नहीं है।
इस बार भाजपा-आप में है कड़ी टक्कर
नई दिल्ली लोकसभा सीट पर अब तक 16 बार चुनाव हुए हैं। इनमें से सात बार कांग्रेस और नौ बार भाजपा ने जीत दर्ज की है। इस लोकसभा क्षेत्र में करोल बाग, पटेल नगर, मोती नगर, दिल्ली कैंट, राजेंद्र नगर, नई दिल्ली, कस्तूरबा नगर, मालवीय नगर, आरके पुरम, ग्रेटर कैलाश विधानसभा क्षेत्र आते हैं। नई दिल्ली, कस्तूरबा नगर, आरके पुरम और दिल्ली कैंट इलाकों में सरकारी कर्मचारियों का दबदबा है। इसके अलावा इस क्षेत्र में नारायणा, टोडापुर, चिराग दिल्ली, जमरूदपुर, पिलंजी, शाहपुर जट जैसे गांव हैं, जिनमें गुर्जरों के साथ जाट समुदाय के लोगों की भी अच्छी खासी संख्या है। इसी तरह से ग्रेटर कैलाश, मोती नगर, राजेंद्र नगर, पटेल नगर और मालवीय नगर इलाकों में रहने वालों में विभाजन के समय पाकिस्तान से आकर यहां बसने वालों और व्यापारियों की संख्या ज्यादा है।
इन सभी सीटों पर आम आदमी पार्टी के विधायक जीते हैं। आम आदमी पार्टी का यहां स्थानीय स्तर पर बड़ा जनाधार है। नई दिल्ली विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल विधायक हैं। वहीं, बीते दो चुनाव में भाजपा ने यहां जीत हासिल कर मजबूत स्थिति बना ली है। भाजपा ने इस बार मीनाक्षी लेखी का टिकट काटकर सुषमा स्वराज की बेटी को उतारा है। इससे पहले इस सीट पर लगातार दो चुनाव में कांग्रेस का कब्जा रहा है। ऐसे में यहां दोनों दलों के लिए वर्चस्व की लड़ाई भी है। इस लोकसभा सीट पर शहरी मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। शहरी मतदाताओं का रुख तय करेगा कि भाजपा इस सीट पर जीत की हैट्रिक लगा पाएगी या गठबंधन इस सीट को वापस अपने खाते में ला पाएगा।