Lok Sabha Polls: पत्नी से तिलक, गले में मोदी फटका-बच्चों के साथ सेल्फी, नामांकन के दौरान कुछ यूं नजर आए शिवराज
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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और विदिशा लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार शिवराज सिंह चौहान 19 साल बाद फिर विदिशा के रास्ते ही राष्ट्रीय राजनीति में लौट रहे हैं। शुक्रवार दोपहर को शिवराज चौहान ने अपना नामांकन दाखिल किया। पर्चा दाखिल करने से पहले चौहान परिवार के साथ समय बिताते हुए नजर आए। उन्होंने राजधानी भोपाल के सरकारी निवास पर पूजा-अर्चना की। घर से निकलने से पहले चौहान की पत्नी साधना सिंह ने उनकी आरती उतारी, तिलक किया और दही-शक्कर से मुंह मीठा करवाया। इसके बाद साधना सिंह ने अपने मोबाइल से पूरे परिवार की एक साथ सेल्फी भी ली। इस दौरान चौहान गले में पीएम नरेंद्र मोदी की तस्वीर वाला केसरिया फटका भी पहने हुए नजर आए। प्रतिदिन की तरह पूर्व सीएम ने पौधारोपण किया। इसके बाद सह परिवार रायसेन पहुंचे। यहां वे अपनी नामांकन रैली में शामिल हुए। दोपहर में उन्होंने अपना पर्चा दाखिल किया। इस दौरान भी उनकी पत्नी साधना सिंह उनकी साथ थीं।
नामांकन के लिए जाने से पहले उन्होंने मीडिया से बात की और कहा, 'मैं सौभाग्यशाली हूं कि भाजपा ने, प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मुझे विदिशा की जनता की सेवा करने का फिर एक बार अवसर दिया है। जनता की सेवा मेरे लिए भगवान की पूजा है। मैं अपनी संपूर्ण क्षमता के साथ जनता की सेवा, क्षेत्र का विकास और अपने देश के लिए काम करने का प्रयास करूंगा।' शिवराज सिंह विदिशा संसदीय सीट से छठवीं बार चुनाव लड़ने जा रहे हैं। चौहान के सामने कांग्रेस ने दो बार के सांसद रहे प्रतापभानु शर्मा को अपना प्रत्याशी बनाया है।
शिवराज सिंह चौहान सोशल मीडिया पर लिखा, 'विदिशा-रायसेन संसदीय क्षेत्र के बहनों-भाइयों, भांजे-भांजियों! मैंने अपनी संपूर्ण क्षमता से आपकी सेवा और क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी ने आपकी सेवा का सौभाग्य प्रदान किया है। आज भाजपा के प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर रहा हूं। इस अवसर पर आपका स्नेह, सहयोग और बुजुर्गों का आशीर्वाद मिले, यही प्रार्थना है।
दरअसल, विधानसभा चुनाव 2023 में भारी जीत के बावजूद शिवराज सिंह चौहान को पुनः मुख्यमंत्री नहीं बनाने से उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर संशय की स्थिति बन रही थी। लेकिन भाजपा उम्मीदवारों की पहली सूची में विदिशा से शिवराज सिंह चौहान का नाम घोषित होने से संशय के बादल छंट गए। शिवराज के लिए विदिशा की सीट सबसे सुरक्षित सीटों में से एक है। वे वर्ष 1991 में सबसे पहले इसी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़कर लोकसभा में पहुंचे थे। यह सीट उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के इस्तीफे के बाद मिली थी।
शिवराज वर्ष 1991 से लेकर 2005 तक वे लगातार पांच बार इसी संसदीय क्षेत्र से सांसद बनते रहे। इस दौरान उन्होंने विदिशा से दिल का रिश्ता कायम कर लिया। सांसद रहते हुए उन्होंने विदिशा संसदीय क्षेत्र में पद यात्रा निकाली थी और इसी पदयात्रा के बाद उनकी पहचान पांव-पांव वाले भैया के रूप में बनी थी। जब वे वर्ष 2005 में दिल्ली की राजनीति छोड़कर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तब भी वे विदिशा से लगातार जुड़े रहे। मुख्यमंत्री रहते शिवराज ने विकास के क्षेत्र में बड़े प्रयास किए, जिसे लोग आज भी याद रखते हैं। पिछले चुनाव में जब सुषमा स्वराज का स्वास्थ्य खराब होने के कारण टिकट बदलने की बात आई, तो शिवराज के करीबी रमाकांत भार्गव को मौका मिला और उन्होंने भी पांच लाख से अधिक मतों से जीत हासिल की थी।
इसलिए भाजपा ने शिवराज को उतारा मैदान में
भाजपा ने प्रदेश में 29 में से 29 सीटें हासिल करने के लिए पिछड़ा वर्ग को साधने के लिए शिवराज को पुनः विदिशा संसदीय क्षेत्र से अपना प्रत्याशी घोषित किया है। इसके अलावा उन्हें मुख्यमंत्री न बनाने से उनके समर्थकों में जो मायूसी छाई थी, उनमें भी उत्साह का संचार होगा। विधानसभा चुनाव में विदिशा जिले की पांचों सीटों पर एकतरफा जीत हासिल करने के बाद भी भाजपा विधायक से लेकर कार्यकर्ता तक निराश थे, लेकिन शिवराज के उम्मीदवार बनते ही कार्यकर्ताओं में खुशी और उत्साह देखी गई।