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Lok Sabha Elections : यूपी में रेड जोन के लिए भगवा खेमे का खास प्लान, भाजपा की नजर बूथ से लेकर यूथ तक

Wed, 20 Mar 2024 06:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा सुधीर कुमार सिंह, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 20 Mar 2024 06:02 AM IST
सार

हालांकि उपचुनाव में पार्टी ने दो सीटें जीत लीं। अब इस लोकसभा चुनाव में पार्टी का फोकस उन सीटों पर भी है, जिनपर हार-जीत का अंतर 15 हजार मतों से कम था। 

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Lok Sabha Elections: Special plan of saffron camp for Red Zone in UP
Demo Pic - फोटो : ANI

विस्तार

यूपी में 'मिशन 80' के तहत भगवा खेमे ने 2019 में हारी हुई 16 सीटों को हथियाने के लिए खास रणनीति तैयार की है।  हालांकि उपचुनाव में पार्टी ने दो सीटें जीत लीं। अब इस लोकसभा चुनाव में पार्टी का फोकस उन सीटों पर भी है, जिनपर हार-जीत का अंतर 15 हजार मतों से कम था। 

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नई रणनीति के तहत  भाजपा ने हारी के साथ ही कम अंतर से जीत वाली सीटों को भी 'रेड जोन' के रूप में चिह्नित किया है। पार्टी  रेड जोन के मतदाताओं तक पहुंच बढ़ा रही है। यहां बूथ से लेकर यूथ तक पर नजर रखी जा रही है।
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 भाजपा ने 2022 में विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद से ही 'बूथ जीतो, सीट जीतो' के मंत्र के साथ काम शुरू कर दिया था। इस बीच प्रदेश में हुए तमाम सियासी उलटफेर और विपक्षी एकता में बिखराव का फायदा उठाने के लिए भगवा खेमे ने 'मिशन 80' का फॉर्मूला तैयार किया है। विपक्ष के कब्जे और कम अंतर से जीत वाली सीटों को मिलाकर 20 से अधिक सीटों के लिए विशेष रणनीति तैयार की गई है। हालांकि विपक्षी खेमे की दो सीटों (आजमगढ़ और रामपुर) पर उपचुनाव में भाजपा ने कब्जा कर लिया था, फिर भी इस चुनाव में इन दोनों सीटों पर भी कड़ी चुनौती मिलने की संभावना को देखते हुए खास तैयारी की गई है।
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दरअसल 2014 के चुनाव में 71 सीटें जीतने वाली भाजपा को 2019 में 62 सीटें ही पा सकी थी। हालांकि 2014 की तुलना में 2019 में भाजपा के वोट शेयर में वृद्धि हुई।  सहयोगी अपना दल (एस) की सीटों को मिलाकर एनडीए ने कुल 64 सीटें जीती थीं। इसलिए भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि 2024 के चुनाव में भाजपा को विपक्ष के कब्जे वाली सीटों के अलावा उन सात सीटों पर भी कड़ी चुनौती मिल सकती है, जिन पर भाजपा की जीत का अंतर 15 हजार से कम था। इसलिए चुनौती वाली सीटों के लिए भाजपा ने अलग से रणनीति तैयार की है।


बदले सियासी समीकरण को साधने की भी कोशिश

  • इस बार के चुनाव में भाजपा बदले हुए सियासी समीकरण को भी जीत का हथियार बनाने की कोशिश  में है। 2019 में सपा, बसपा और रालोद मिलकर चुनाव लड़े थे और 15 सीटें जीती थीं। पर, इस बार बसपा अपने बल पर अकेले चुनाव मैदान में है। जबकि रालोद एनडीए का हिस्सा हो चुका है। 
  • इस बदलाव को देखते हुए भी भाजपा ने हारी सीटों को जीतने के साथ ही कम अंतर से जीत वाली सीटों पर कब्जा बरकरार रखने की रणनीति तैयार किया है। इन सीटों पर अलग से एक-एक प्रचारकों को लगाया गया है। साथ ही मंत्रियों को भी सीटों की जिम्मेदारी दी गई है।

रायबरेली सीट जीतना बड़ी चुनौती
प्रचंड लहर में भी कांग्रेस के मजबूत किले के तौर पर स्थापित रायबरेली सीट पर भाजपा जीत नहीं दर्ज कर पाई है। ऐसे में  2024 के चुनाव में कांग्रेस के तिलिस्म को तोड़ने को भाजपा ने बड़ी चुनौती के रूप में लिया है। सूत्रों के अनुसार इस सीट के लिए भाजपा एक ऐसे चेहरे की तलाश में है, जो रायबरेली सीट पर कांग्रेस के विजय रथ को रोकने में सक्षम हो।

2019 में इन सीटों पर मिली थी हार
श्रावस्ती, सहारनपुर, बिजनौर, नगीना, अमरोहा, अंबेडकरनगर, गाजीपुर, लालगंज, घोसी, जौनपुर,आजमगढ़, रामपुर, मुरादाबाद, संभल, मैनपुरी और रायबरेली।

इन सीटों पर कम था भाजपा के जीत का अंतर
               सीट                           जीत का अंतर

  • सुल्तानपुर                       14,526
  • चंदौली                            13,959
  • आजमगढ़                       8,679 (उप चुनाव)
  • मेरठ                               4,729
  • मुजफ्फरनगर                 6,526
  • कन्नौज                          12,353
  • मछलीशहर                   189
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