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Lok Sabha Elections : दिल्लीवालों को चाहिए जाम से मुक्ति, भाजपा नुमाइंदों के लिए आसान न होगा यह वादा पूरा करना

Thu, 21 Mar 2024 05:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 21 Mar 2024 05:36 AM IST
सार

चार दशक पहले सरकारों ने फ्लाईओवर को आवाजाही बेहतर करने का तरीका माना था, लेकिन यहां वाहन रेंगते नजर आते हैं। आलम यह है कि व्यस्त समय में वाहनों की रफ्तार दस किमी प्रति घंटा भी नहीं रहती। ऐसे में जाम इस बार सियासी मुद्दा बना है। 

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Lok Sabha Elections: People of Delhi want relief from jam
दिल्ली-एनसीआर में भीषण जाम file pic - फोटो : ANI

विस्तार

वाहनों के दबाव से कराह रही दिल्ली को अब जाम से मुक्ति चाहिए। चार दशक पहले सरकारों ने फ्लाईओवर को आवाजाही बेहतर करने का तरीका माना था, लेकिन यहां वाहन रेंगते नजर आते हैं। आलम यह है कि व्यस्त समय में वाहनों की रफ्तार दस किमी प्रति घंटा भी नहीं रहती। ऐसे में जाम इस बार सियासी मुद्दा बना है। पहली बार भाजपा के सातों उम्मीदवारों ने चुनाव जीतने के बाद के 100 दिनों के भीतर इसका समाधान करने का वायदा किया है। वहीं, आप व कांग्रेस भी इसे कोर इश्यू मान रही हैं। यातायात प्रबंधन करने वाली पुलिस का भी कहना है कि फ्लाईओवर आज आवाजाही के लिए कारगर साबित नहीं हो रहे हैं। वाहनों के दबाव से फ्लाईओवर पर भी जाम आम है। अतिक्रमण और निर्माण कार्य ने भी समस्या को बढ़ाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई योजनाएं लाने के बाद भी आवाजाही बेहतर नहीं हुई है। अब वक्त यातायात व्यवस्था में बुनियादी बदलाव लाने का है। इसके लिए बड़े स्तर पर सरकारों को काम करना पड़ेगा। पेश है पुरुषोत्तम वर्मा की रिपोर्ट...

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जाम में फंसे बड़े फ्लाईओवर
गीता कॉलोनी, आजादपुर चौक, मुकरबा चौक, हनुमान सेतू, रानी झांसी, पालम व द्वारका, सरिता विहार, बंदा बहादुर वैरागी मार्ग, पीरागढ़ी व पंजाबी बाग फ्लाइओवर पर वाहनों की भारी आवाजाही रहती है। इससे यहां वाहन रेंगते नजर आते हैं।
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दिल्ली की मौजूदा स्थिति
दिल्ली के मानचित्र का 23 फीसदी हिस्से पर रोड नेटवर्क है। फ्लाईओवर की संख्या भी करीब 100 है। अंडरपास और रेल ओवर ब्रिज भी जरूरत के हिसाब से हैं। देश का सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क व ई-बसों का बेड़ा दिल्ली में है। इसके बावजूद सड़कें जाम रहती हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि जहां काम करना है, वहां ध्यान नहीं दिया गया, तभी सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या बहुत ज्यादा है। 
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किस रेंज में कितनी जगहों पर जाम

  • पूर्वी रेंज : इस रेंज के शाहदरा जिले में 5, पूर्वी जिले में 5 और उत्तर-पूर्व जिले में 10 जगहों पर जाम लगता है। बाकी जगहों पर निर्माण कार्य, अतिक्रमण और अन्य कारण हैं। वाहनों की भारी आवाजाही से पूर्वी जिले में चार, उत्तर-पूर्वी जिले में 5 जगह और शाहदरा जिले में रोड नंबर 6 पर जाम लगता है। 
  • नार्थ रेंज : उत्तर-पश्चिमी जिले में 6, रोहिणी में 13 और बाहरी-उतरी जिले में 8 जगहों पर जाम लगता है। भारी वाहनों के कारण उत्तरी-पश्चिमी जिले में चार, रोहिणी में सात, बाहरी-उत्तरी जिले में 12 जगहों पर जाम लगता है।
  • सेंटर रेंज : मध्य जिले में 10 और उत्तरी जिले में 11 जगहों पर सबसे ज्यादा जाम लगता है। भारी वाहनों की आवाजाही से मध्य जिले में 12 और उत्तरी जिले में 7 जगहों पर जाम लगता है। 
  • सर्दन रेंज : दक्षिण जिले में 12 व दक्षिण-पूर्व जिले में 10 ऐसी जगह हैं जहां सबसे ज्यादा जाम लगता है। 
  • नई दिल्ली रेंज : नई दिल्ली जिले में पांच और दक्षिण-पश्चिमी जिले में तीन जगहों पर सबसे ज्यादा जाम लगता है। नई दिल्ली में सिर्फ वाहनों की भारी आवाजाही से जाम लगता है। 
  • वेस्टर्न रेंज : बाहरी जिले में 6, द्वारका में 8 व पश्चिमी जिले में 5 जगहों पर सबसे ज्यादा आए दिन जाम लगता है। 

दिल्ली में 1971 में बना था पहला फ्लाईओवर
आजादी के बाद राजधानी को पहला फ्लाईओवर शादीपुर में बना था। यह फ्लाईओवर रेलवे फाटक की वजह से जाम की समस्या को खत्म करने के लिए दिल्ली नगर निगम ने बनाया था। मुख्य कार्यकारी पार्षद विजय कुमार मल्होत्रा ने 14 फरवरी 1971 को इसका उद्घाटन किया था। वर्तमान में दिल्ली में 100 से ज्यादा फ्लाईओवर हैं, जबकि चार से पांच फ्लाईओवर निर्माणाधीन हैं।

निर्माण कार्य व अतिक्रमण भी समस्या
ट्रैफिक पुलिस का हालिया अध्ययन बताता है कि पूरी दिल्ली की 117 प्रमुख सड़कों पर जाम लगता है। यहां वाहनों का दबाव क्षमता से ज्यादा रहता है। वहीं, अलग-अलग कॉरिडोर पर चलने वाले निर्माण कार्य व अतिक्रमण भी आवाजाही बाधित करते हैं। अगर सड़क पर कोई वाहन खराब हो जाता है तो समस्या और भी बढ़ जाती है।

एनडीएमसी क्षेत्र में जाम के कारण

  • सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली उच्च न्यायालय और पटियाला हाउस कोर्ट परिसर के पास पार्किंग की कमी से जाम लगता है।
  • कर्तव्य पथ, इंडिया गेट, नेशनल आर्ट गैलरी, राष्ट्रपति भवन, जंतर मंतर, कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, चिडिय़ाघर, पुराना किला, राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय के नजदीक पर्यटकों की भीड़ रहती है।
  • नेशनल स्टेडियम, विज्ञान भवन, ताल कटोरा स्टेडियम, सुषमा स्वराज सदन और आईटीपीओ में आयोजन समस्या बढ़ाते हैं।
  • विरोध प्रदर्शन, जुलूस, रैलियां, आंदोलन जाम की वजह बनती हैं।

ट्रैफिक पुलिस के इंतजाम

  • अलग-अलग प्वाइंट पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी की तैनाती।
  • नियम तोड़ने वालों पर कानूनी कार्रवाई।
  • वाहन चालकों में जागरूकता।
  • सड़क के डिजाइन में सुधार।
  • बेहतर तकनीक का इस्तेमाल।


ट्रैफिक पुलिस दिल्ली में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) भी लागू करने जा रही है। आईटीएमएस सिस्टम दिल्ली में सिग्नल को सिंक्रोनाइज करेगा, जिससे यातायात के प्रवाह को सुचारू बनाने में मदद मिलेगी। जाम वाली जगहो कारण पता कर उसे हटाने का प्रयास किया जा रहा है।  
-  एचजीएस धालीवाल, विशेष पुलिस आयुक्त, यातायात पुलिस

बुनियादी ढांचा होने के बाद भी आवाजाही खराब है तो इसका सीधा मतलब यही है कि जहां जरूरत है, वहां काम नहीं हुआ। सबसे पहले सार्वजनिक परिवहन सेवा मजबूत करनी पड़ेगी। बसों का वेटिंग टाइम कम करना होगा।
-डॉ. अनुमिता रॉय चौधरी, कार्यकारी निदेशक, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट और पर्यावरण 

यातायात नियमों के प्रति वाहन चालकों को जागरूक होना होगा। जब भी वाहन लेकर सड़कों पर निकलें तो ट्रैफिक एडवाइजरी को जरूर देखना चाहिए, ताकि वाहन चालकों को पहले से पता रहे कि किस मार्ग पर ज्यादा ट्रैफिक होगा और कौन सा मार्ग  यातायात के लिए बंद है। 
-अतुल रणजीत कुमार ट्रांसपोर्ट एक्सपर्ट

 

सियासी किस्से : वर्मा ने विरोधी शर्मा की तारीफ में पढ़े कसीदे 

वर्ष 1999 का दिलचस्प किस्सा है। बाहरी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर साहिब सिंह वर्मा व कांग्रेस से दीपचंद शर्मा चुनाव लड़ रहे थे। दोनों दिल्ली देहात से आते थे। साहिब सिंह मुंडका गांव से थे, जबकि दीपचंद शर्मा किराड़ी गांव से। चुनाव प्रचार के लिए जब साहिब सिंह अपने विरोधी प्रत्याशी के गांव किराड़ी पहुंचे तो उन्होंने दीपचंद शर्मा पर कतई भी कटाक्ष नहीं किया।

इसकी जगह उनकी तारीफ में जमकर कसीदे पढ़े। वर्मा ने शर्मा को देहात का ही नहीं, पूरी दिल्ली का मशहूर नेता बताया। उन्होंने कहा कि शर्मा का पूरी दिल्ली में बहुत सम्मान है। एमसीडी में बहुत काम किया है। विभिन्न पदों पर रहकर दिल्ली की सेवा की है। दिल्लीवाले इन्हें हमेशा याद रखेंगे। हम सब हैरान। समझ में नहीं आया कि साहिब सिंह किसके लिए वोट मांगने आए हैं। थोड़ी देर और तारीफ के बाद साहिब सिंह ने पलटी मारी। वह बोले, लेकिन आज शर्मा की उम्र 75 साल हो गई है। वे बुजुर्ग हो गए हैं।

उनके लिए बाहरी दिल्ली के 30 लाख मतदाताओं की जिम्मेदारी उठाने के लिए दौड़ धूप करना मुश्किल है। उन्हें अब राजनीति छोड़ देनी चाहिए। इसकी जगह मुझ जैसे लोगों को आशीर्वाद देना चाहिए। इतना सुनकर सबने ठहाके लगाए। मतगणना के दौरान इसका असर भी दिखा। किराड़ी गांव में उन्हें दीपचंद शर्मा से ज्यादा वोट मिले और दो लाख से ज्यादा मतों से जीत भी हासिल की।
(भाजपा नेता व पूर्व पार्षद पुष्पराज से बातचीत आधारित ) 

यादों में : दिल्ली की महिलाओं की आवाज बनीं तीरथ
द्र और दिल्ली सरकार में मंत्री रहीं कृष्णा तीरथ ने दिल्ली में लोकसभा और विधानसभा को मिलाकर कुल 10 चुनाव लड़े। कार्यकर्ताओं के विश्वास और जोश के भरोसे उन्होंने चुनाव जीते। वर्ष 1983 में दिल्ली मेट्रोपोलिटन काउंसिल के चुनाव से अपने राजनीतिक भविष्य की शुरुआत की और 2004 तक दिल्ली विधानसभा की सदस्य रहीं।

वर्ष 1998 में शीला दीक्षित के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार में समाज कल्याण, एससी, एसटी, श्रम और रोजगार मंत्री रहीं। दिल्ली विधानसभा उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली। 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचीं। वह उत्तर पश्चिम दिल्ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए मनमोहन सिंह के दूसरे मंत्रिमंडल में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहीं। उन्होंने कहा बताया कि 20-25 साल पहले वह घर-घर जाकर चुनाव प्रचार करती थीं।

कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर वाल पेंटिंग व हाथ से बैनर-पोस्टर भी बनाती थीं। उस समय 4-5 लाख पर्चियां हाथ से ही बनती थीं। घर-घर जाकर झंडे-बिल्ले बांटे जाते थे। हमारी ही तरह बाकी प्रत्याशियों के कार्यकर्ता पोलिंग स्टेशनों पर पर्चियां बांटते थे। बैठकों में क्षेत्र विशेष के बड़े नेताओं को बुलाया जाता था। उत्तराखंड, पूर्वांचल वोटरों के लिए ऐसा होता था। 3-4 विधानसभा क्षेत्र की एकाध पब्लिक बैठक होती थी। इसमें पैसे खर्च नहीं होते थे। 

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