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Lok Sabha Elections : यूपी की नई सूची में भाजपा ने चेहरे तो बदले पर बिरादरी वही, तीन सांसदों के टिकट कटे
Thu, 11 Apr 2024 06:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सुधीर कुमार सिंह, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 11 Apr 2024 06:13 AM IST
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भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक। file
- फोटो :
ani
विस्तार
प्रदेश में अपने कोटे की 75 में से 70 सीटों पर उम्मीदवार उतार चुकी भाजपा ने हर सीट पर जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है। कई सीटों पर नए चेहरों को मौका देकर पार्टी ने कार्यकर्ताओं की उम्मीदें भी जगाई हंै। इसी फाॅर्मूले पर बुधवार को जारी 7 सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची में पार्टी ने चेहरे तो बदले हैं, पर उसी बिरादरी को मौका देकर किसी भी तरह के विरोधी स्वर से बचने का भी प्रयास किया है।
भाजपा ने पहली सूची की तरह ही इसमें भी जातीय समीकरण का विशेष ख्याल रखा है। इस सूची में भी तीन मौजूदा सांसदों के टिकट पर कैंची चलाई गई है, लेकिन किसी प्रकार के संभावित विरोध से बचने के लिए उसी बिरादरी के उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे मौजूदा सांसद ताल्लुक रखते हैं। मसलन-बलिया से क्षत्रिय के स्थान पर क्षत्रिय, तो गाजीपुर में भूमिहार के स्थान पर इसी बिरादरी का प्रत्याशी उतारा गया है।
फूलपुर में पटेल के स्थान पर पटेल उम्मीदवार दिया गया है। इसी प्रकार इलाहाबाद में ब्राह्मण के स्थान पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी के पुत्र को टिकट देकर भी ब्राह्मण मतदाताओं की नाराजगी से बचने का रास्ता निकाला है। शेष चार सीटों में से सिर्फ मैनपुरी सीट पर ही चेहरे के साथ बिरादरी बदली है। 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर प्रेम सिंह शाक्य चुनाव लड़े थे, लेकिन इस बार यहां से प्रदेश सरकार में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ठाकुर को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, मछलीशहर और कौशांबी सीट पर जातीय समीकरण साधने के लिए पुराने चेहरों को ही मौका दिया गया है।
ऐसे तय हुआ गाजीपुर का प्रत्याशी
भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बने गाजीपुर सीट पर नए भूमिहार चेहरे के तौर पर पारसनाथ राय को मौका दिया गया है। सूत्रों के अनुसार इस सीट के लिए कराए गए सर्वे में सबसे ऊपर मनोज सिन्हा और दूसरे नंबर पर उनके बेटे अभिनव सिन्हा का नाम था। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील राज्य की जिम्मेदारी संभालने की वजह से भाजपा मनोज सिन्हा को वहां से हिलाना नहीं चाहती थी। वहीं बेटे अभिनव को टिकट नहीं देने से साफ है कि भाजपा परिवारवाद के आरोपों से बचना चाहती थी। संघ की ओर से पारस राय का नाम प्रस्तावित किया गया। पारसनाथ शिक्षा जगत के जाने-माने नाम हैं। भाजपा का मानना है कि उनकी साफ सुथरी छवि मुख्तार अंसारी परिवार की माफिया छवि के मुकाबले जनता में भारी पड़ेगी ।
अब तक कुल 12 मौजूदा सांसदों के टिकट कटे : भाजपा की ओर से जारी अब तक कुल 70 उम्मीदवारों की सूची में 12 मौजूदा सांसदों के टिकट कटे हैं। पहले जारी 63 उम्मीदवारों की सूची में 9 और इसमें 3 मौजूदा सांसदों का टिकट काटा गया है। जिन सांसदों के टिकट काटे गए हैं, उनमें जनरल वीके सिंह (गाजियाबाद), राजेंद्र अग्रवाल (मेरठ), वरुण गांधी (पीलीभीत), उपेंद्र रावत (बाराबंकी), संतोष गंगवार (बरेली), संघमित्रा मौर्य (बदायूं), अक्षयबर लाल गोंड (बहराइच), सत्यदेव पचौरी (कानपुर), राजवीर सिंह दिलेर (हाथरस), वीरेंद्र सिंह मस्त (बलिया), रीता बहुगुणा जोशी (इलाहाबाद) व केशरी देवी पटेल (फूलपुर) शामिल हैं।
बलिया में चेहरा बदला
मौजूदा सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त का टिकट काटने के पीछे वैसे तो उम्र को वजह बताया जा रहा है, लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा है कि माहौल उनके अनुकूल नहीं था। पूर्व पीएम चंद्रशेखर का पुत्र होने की वजह से नीरज उनपर भारी पड़े।
मैनपुरी : सपा को मजबूत चुनौती
दरअसल इस सीट पर उतारे गए जयवीर सिंह का लंबा समय बसपा और सपा में बीता है। दोनों सरकारों में वह मंत्री भी रहे हैं। वह मैनपुरी सदर सीट से विधायक हैं। माना जाता है कि वे न केवल इलाके से, बल्कि सपा के दांवपेच से भी परिचित हैं।