गुलबर्गा: सियासी जंग में उतरे दामाद, दांव पर खरगे की प्रतिष्ठा; कांग्रेस अध्यक्ष के सामने हैं ये दो चुनौतियां
विपक्षी गठबंधन के अध्यक्ष के ताज में भरे कांटे निकालने की चुनौतियों से जूझ रहे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रतिष्ठा गृहनगर में भी दांव पर है। वह खुद मैदान में नहीं हैं, पर दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, डॉ. उमेश जाधव से पिछली हार का हिसाब बराबर करने की। और, दूसरी कड़े मुकाबले में फंसे दामाद राधाकृष्ण डोड्डामणि को जिताकर परदे के पीछे की सियासत से मुख्यधारा में लाने की। नीरज तिवारी की रिपोर्ट
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गुलबर्गा सीट पर इस बार लड़ाई कड़ी, बड़ी और रोचक भी है। शहर में बंध रहे कांग्रेस और खरगे की तारीफों के पुल गांव पहुंचते-पहुंचते दरकने लगते हैं। वजह है लोकसभा क्षेत्र में लगभग 20 फीसदी मुस्लिम मतदाताओं का होना। इनकी बड़ी आबादी शहर में रहती है। अन्य शहरों के मुकाबले यहां के मुस्लिम मतदाता अधिक मुखर हैं और खुलकर बात करते हैं। इसलिए सिर्फ शहर से चुनाव के रुख की थाह लेना आसान नहीं। ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचते ही शहर के सारे समीकरण बिगड़ने लगते हैं और चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर आकर टिक जाता है।
भाजपा ने पिछले चुनाव में मल्लिकार्जुन खरगे को हैट्रिक जीत से रोकने वाले सांसद डॉ. उमेश जाधव को फिर मैदान में उतारा है। डॉ. जाधव ने खरगे को 95 हजार से अधिक मतों से शिकस्त दी थी। गठबंधन की कमान हाथ में लेने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ी सक्रियता के चलते खरगे खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उनके क्षेत्र से दूर होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी भी है। हालांकि, गृहनगर की सियासत अपने घर में ही रखने की नीयत से उन्होंने दामाद राधाकृष्ण डोड्डामणि को प्रत्याशी बनाया है। बताते हैं कि राधाकृष्ण तैयार नहीं थे, मगर खरगे के दबाव में चुनाव लड़ने को तैयार हो गए।
यहां सिर्फ तीन चुनाव हारी कांग्रेस
भाजपा इस सीट से महज दो बार चुनाव जीती है। पहली बार वर्ष 1998 में बासवराज पाटिल ने जीत दर्ज की थी। दो दशक बाद 2019 में डॉ. उमेश जाधव जीते थे। वर्ष 1996 में जनता दल ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस वर्ष 1952 से अब तक महज तीन चुनाव ही हारी। खरगे 2009 और 2014 में लगातार दो बार सांसद चुने गए।
खरगे का किला ढहाने वाले पुराने कांग्रेसी
डॉ. उमेश जाधव पुराने कांग्रेसी हैं। खरगे से अनबन के चलते वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा का दामन थामा था। वह वर्ष 2013 और 2018 में बीदर की चिंचौली (सुरक्षित) सीट से कांग्रेस के विधायक रहे।
राधाकृष्ण कारोबारी, डॉ. जाधव हैं सर्जन
कांग्रेस प्रत्याशी राधाकृष्ण डोड्डामणि कारोबारी हैं। वह कई शैक्षणिक संस्थानों का संचालन करते हैं। कलबुर्गी के रहने वाले राधाकृष्ण परदे के पीछे से खरगे के चुनाव अभियान को संचालित करने और रणनीति बनाने में उनकी मदद करने में सक्रिय रहे। इसके चलते पार्टी कार्यकर्ताओं में उनकी अच्छी पैठ भी है। पेशे से चिकित्सक भाजपा प्रत्याशी डॉ. उमेश जाधव सर्जन हैं।
विधानसभा के आंकड़ों में 6-2 से आगे कांग्रेस
पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, भाजपा और जदएस ने अलग-अलग अपनी किस्मत आजमाई थी। गुलबर्गा लोकसभा क्षेत्र की आठ में से छह विधानसभा सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया था। गुलबर्गा उत्तर से कांग्रेस की कनीज फातिमा ने जीत दर्ज की थी। भाजपा और जदएस के खाते में महज एक-एक सीट ही आई थी। ये दोनों दल इस बार गठबंधन में हैं। इस तरह देखें तो गुलबर्गा में कांग्रेस 6-2 से आगे है। कांग्रेस इसका कितना फायदा उठा पाएगी, इस पर सभी कि नजरें टिकी हैं।
जातिगत समीकरण
गुलबर्गा में शहरी आबादी 34 फीसदी से अधिक है। इसके मुकाबले 65 फीसदी से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों के बाशिंदे हैं। कुल मतदाताओं में लगभग 20 फीसदी मुस्लिम और 70 फीसदी से अधिक हिंदू हैं। इनमें 24 फीसदी से ज्यादा दलित और लगभग तीन फीसदी आदिवासी हैं।
मतदाताओं के मन में राम और मोदी...मुस्लिम आरक्षण भी मुद्दा
अब कलबुर्गी नाम से भी जाने जाते इस शहर में रेलवे स्टेशन से लेकर ख्वाजा बंदा नवाज दरगाह क्षेत्र तक अधिकतर व्यवसाय मुस्लिम समुदाय के हाथ है। व्यापारी इलियास और जुनैद कहते हैं, खरगे का कद अब और बड़ा हो गया है। हमारा वोट उनको ही जाएगा। प्रदेश की कांग्रेस सरकार के कामकाज से भी वह खुश हैं। मुस्लिमों को आरक्षण दिए जाने के मुद्दे पर कहते हैं कि भाजपा सियासत कर रही है। वह नहीं चाहती कि मुसलमान आगे बढ़ें। वहीं, पहली बार वोट देने जा रहे बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्र श्रीशैल कहते हैं कि देश का भविष्य मोदी के हाथ ही सुरक्षित है। कांग्रेस मुस्लिम आरक्षण जैसे फैसले लेकर बड़े वर्ग को उसके अधिकारों से वंचित करना चाह रही है।
दरगाह क्षेत्र निवासी अब्दुल खादर समर्थक तो कांग्रेस के हैं, पर डॉ. उमेश जाधव की भी तारीफ करते हैं। क्या मुस्लिम डॉ. जाधव को वोट देंगे...वह कहते हैं, उन्होंने पांच साल अच्छा काम किया है। हो सकता है कुछ लोग दे भी दें। बस स्टैंड के पास मिले ट्रांसपोर्टर विद्यानंद जौगर लिंगायत समुदाय के हैं। वह कहते हैं कि केंद्र में भाजपा और मोदी से बेहतर विकल्प कोई नहीं। इनसे अच्छा काम करने का भरोसा दे तो कांग्रेस से भी गुरेज नहीं।
शहर से लगे गांव जमशेट्टीनगर निवासी लिंगायत समुदाय के युवा बसवा कहते हैं, प्रदेश सरकार ने गारंटियां तो बहुत दीं, लेकिन लाभ सभी को नहीं मिल रहा। सरकार कोई भी हो, जनता की सहूलियतों के लिए तो काम करेगी ही। लेकिन, देश के लिए अभी भाजपा जरूरी है। कांग्रेस और खरगे क्यों नहीं? इस सवाल पर उनका कहना था, लगातार दो जीत के बाद खरगे अपना गृहनगर ही नहीं संभाल पाए। कांग्रेस के पास मोदी का कोई विकल्प नहीं है।
पिछले दो चुनावों का हाल
2019
| उम्मीदवार | दल | मत% |
| डॉ. उमेश जाधव | भाजपा | 52.14 |
| मल्लिकार्जुन खरगे | कांग्रेस | 44.12 |
2019 में 8% से अधिक के अंतर से हारे थे खरगे
2014
| उम्मीदवार | दल | मत% |
| मल्लिकार्जुन खरगे | कांग्रेस | 50.22 |
| रेवु नाइक बेलगामी | भाजपा | 43.33 |