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Hindi News ›   Election ›   Lok Sabha ›   Ground Report: Neither the influence of Reddys nor the interference of Hindi belt on Karnataka's Bellary seat

ग्राउंड रिपोर्ट: कर्नाटक की बेल्लारी सीट पर न रेड्डियों का रसूख-न हिंदी पट्टी का दखल, 2004 से भाजपा का कब्जा

Tue, 07 May 2024 06:47 AM IST
निर्मल कांत नीरज तिवारी, बेल्लारी (कर्नाटक)
नीरज तिवारी, बेल्लारी (कर्नाटक) Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 07 May 2024 06:47 AM IST
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सार
Ground Report: बेल्लारी सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। वर्तमान सांसद देवेंद्रप्पा की जगह भाजपा ने बी श्रीरामुलु पर दांव खेला है। वहीं कांग्रेस ने दो बार के विधायक ई तुकाराम को मैदान में उतारा है। भाजपा भितरघात से जूझ रही है, तो वहीं कांग्रेस इसका फायदा उठाने की कोशिश में है।
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Ground Report: Neither the influence of Reddys nor the interference of Hindi belt on Karnataka's Bellary seat
कांग्रेस नेता ई तुकाराम और भाजपा प्रत्याशी बी श्रीरामुलु - फोटो : एक्स हैंडल @etukaram_inc और एएनआई

विस्तार

बेल्लारी लोकसभा सीट को लेकर हिंदी पट्टी की दिलचस्पी भले ही ढाई दशक पहले जैसी हो, मगर इस बार यहां वैसा सियासी घमासान नहीं है। वर्ष 1999 में अमेठी के साथ बेल्लारी से भी चुनाव लड़ीं सोनिया गांधी के खिलाफ सुषमा स्वराज का मैदान में उतरना सुर्खियों में रहा। सुषमा यह चुनाव तो हार गईं, लेकिन भाजपा के लिए जीत के दरवाजे खोल गईं। दो उपचुनावों को छोड़ दें तो 2004 से अब तक के सभी चार आम चुनावों में भाजपा ने ही जीत दर्ज की। इस बार भी यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। वर्तमान सांसद देवेंद्रप्पा की जगह भाजपा ने बी श्रीरामुलु पर दांव खेला है। वहीं कांग्रेस ने दो बार के विधायक ई तुकाराम को मैदान में उतारा है। भाजपा भितरघात से जूझ रही है, तो वहीं कांग्रेस इसका फायदा उठाने की कोशिश में है। टिकट न मिलने से असंतुष्ट सांसद देवेंद्रप्पा की चुनाव में दिलचस्पी नजर नहीं आ रही है। वर्ष 2014 में सांसद रह चुके श्रीरामुलु की जी जनार्दन रेड्डी से अच्छी नजदीकी है। रायचूर के गंगावती से विधायक जनार्दन खनन घोटाले में जिला बदर होने के कारण प्रचार से दूर हैं। उनकी पत्नी और छोटे भाई सक्रिय हैं, पर पहले जैसा रसूख देखने को नहीं मिल रहा। इधर, रेड्डी बंधुओं के चुनावी रण से एक तरह से बाहर होने को कांग्रेस अपने लिए सकारात्मक मान रही है। यह भी है कि तुकाराम लगातार दो बार से विधायक हैं और क्षेत्र में उनकी सक्रियता की चर्चा है। श्रीरामुलु पिछले साल विधानसभा चुनाव हार गए थे और रेड्डी परिवार से संबंधों की तोहमत भी उनके सिर है। 


पिछले दो चुनावों का हाल
2019
उम्मीदवार                       दल         मत%
वाई देवेंद्रप्पा                   भाजपा      49.22
वीएस उगरप्पा                 कांग्रेस      47.09

2014
बी. श्रीरामुलु                  भाजपा    51.09
एनवाई हनुमनथप्पा        कांग्रेस    42.95

भाजपा-कांग्रेस के अपने-अपने समीकरण
वर्ष 2009 से सुरक्षित श्रेणी में गई बेल्लारी सीट पर 21 फीसदी से अधिक दलित और 18 फीसदी से ज्यादा आदिवासी मतदाता हैं। इनकी एकजुटता किसी का भी खेल बनाने-बिगाड़ने में सक्षम है। इनमें लाभार्थी वर्ग अधिक है। यहां लिंगायत व शेट्टी समुदाय के मतदाता अच्छी संख्या में हैं, जो चुनाव का रुख तय करते हैं। शहर के सराफा व्यवसायी जयंतीलाल के अनुसार, पिछले चुनावों में भाजपा की लगातार जीत इन्हीं समीकरणों से तय होती आई है। इसके पीछे वह रेड्डी बंधुओं की भूमिका को भी कम नहीं आंकते। कांग्रेस को उम्मीद है कि मुस्लिमों के साथ दलित और आदिवासी मतों के सहारे वह अपनी हार का सिलसिला तोड़ने में कामयाब हो सकती है। यहां लगभग दो लाख मुस्लिम मतदाता हैं। इसके अलावा प्रदेश सरकार की गारंटियों का सहारा है। ट्रैवल एजेंट मीरा शेख कहते हैं कि भाजपा ने इस क्षेत्र को रेड्डी बंधुओं के हवाले कर दिया था। खनन घोटाले में फजीहत होने पर उनसे किनारा तो किया, पर फिर से पार्टी में शामिल कर लिया। 


विस चुनाव के आंकड़ों में कांग्रेस 6-2 से आगे
लोकसभा चुनावों में भले ही कांग्रेस के हिस्से लगातार हार आई हो, लेकिन पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में वह आठ में से छह सीटें जीतकर सबसे आगे  रही। भाजपा और जदएस के खाते में दो-दो सीटें   ही आई थीं।

जिस मुकाबले की देशभर में हुई थी चर्चा
1999 में सोनिया गांधी के बेल्लारी से चुनाव मैदान में उतरने पर भाजपा ने सुषमा स्वराज को प्रत्याशी बनाकर उनकी कड़ी घेरेबंदी कर दी थी। इस चुनाव में सुषमा का हेलिकॉप्टर से आकर आखिरी दिन नामांकन करने की भी खूब चर्चा रही। सोनिया लगभग 55 हजार वोटों से जीतीं थीं। हालांकि, बाद में उन्होंने बेल्लारी सीट छोड़ दी थी। इसके बाद 2000 और 2018 में हुए उपचुनाव में ही कांग्रेस को जीत  हासिल हुई। 

अवैध खनन में आंध्र प्रदेश के रास्ते बेल्लारी में दाखिल हुए थे रेड्डी बंधु
बेल्लारी शहर से उत्तर दिशा में महज 16 किमी दूर आंध्रप्रदेश की सीमा पर स्थित लाल-काली पहाड़ियां रेड्डी बंधुओं के काले कारोबार की गवाही देती हैं। वर्ष 2001 में आंध्र के मुख्यमंत्री रहे वाईएसआर रेड्डी से अच्छे संबंधों का फायदा उठाकर रेड्डी बंधुओं ने 10 लाख की लागत से माइनिंग कंपनी शुरू की थी। इस बीच, 1999 के लोकसभा चुनाव से भाजपा के नजदीक आए रेड्डी बंधु कर्नाटक की सियासत में भी सिक्का जमा चुके थे। खनन घोटाले उजागर होने के बाद आई रिपोर्ट में सामने आया था कि महज पांच साल में उनकी कंपनी का टर्नओवर तीन हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। 

स्थानीय लोग बताते हैं कि रेड्डी बंधुओं ने आंध्र के लाइसेंस पर सीमा से सटे कर्नाटक में अवैध रूप से खनन शुरू कर सैकड़ों ग्रामीणों को बेघर किया और सरकार को हजारों करोड़ों का नुकसान पहुंचाया। आंध्र की सीमा से सटे बेडेगलटांडा गांव के आसपास रेड्डी बंधुओं की मनमानी के निशान अब भी देखे जा सकते हैं। इलाके में चुनावी माहौल भांपने की कोशिश को भी ग्रामीण खनन में लगी कंपनियों का कर्मचारी मानकर घेर लेते हैं। कई बड़ी कंपनियों का नाम लेकर अपनी जमीन हथियाने का आरोप भी लगाते हैं।
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