फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Election ›   Lok Sabha ›   Ground Report Lok Sabha Elections 2024 Political atmosphere of Sundargarh Lok Sabha seat of Odisha

Ground Report: ओडिशा में BJP को छठी जीत की आस, BJD के डिफेंडर से मुकाबला; दिलीप के लिए सियासी चौसर बड़ी चुनौती

Sun, 19 May 2024 05:37 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अनूप वाजपेयी, अमर उजाला
अनूप वाजपेयी, अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 19 May 2024 05:37 AM IST
सार

हॉकी के मैदान में देश के लिए गोल बचाने वाले डिफेंडर और बीजद उम्मीदवार दिलीप चुनावी मैदान में अटैकर नजर आ रहे हैं। उनके पास हॉकी के मैदान का लंबा अनुभव है, तो भाजपा उम्मीदवार जुएल उरांव राजनीतिक मैदान के माहिर खिलाड़ी हैं। दिलीप ने 2014 के चुनाव में ओरांव को कड़ी टक्कर दी थी।

विज्ञापन
Ground Report Lok Sabha Elections 2024 Political atmosphere of Sundargarh Lok Sabha seat of Odisha
जुएल उरांव और दिलीप तिर्की (फाइल) - फोटो : एक्स@jualoram / एएनआई

विस्तार

ओडिशा की सुंदरगढ़ लोकसभा सीट पर मुकाबला दिलचस्प दिख रहा है। भाजपा ने यहां से पांच बार सांसद रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव को उतारा है। उनके सामने चार बार ओलंपिक खेलों का प्रतिनिधित्व कर चुके हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की दूसरी बार बीजद उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में हैं। हॉकी के मैदान में देश के लिए गोल बचाने वाले डिफेंडर दिलीप चुनावी मैदान में अटैकर नजर आ रहे हैं। उनके पास हॉकी के मैदान का लंबा अनुभव है, तो उरांव राजनीतिक मैदान के माहिर खिलाड़ी हैं। दिलीप ने 2014 के चुनाव में ओरांव को कड़ी टक्कर दी थी। राज्यसभा पहुंच चुके दिलीप भी अब सियासी दांव-पेच सीखकर आए हैं। सुंदरगढ़ आदिवासियों की घनी आबादी वाला इलाका है। राज्य में भले ही 25 वर्ष से क्षेत्रीय दल बीजद की सरकार रही हो, लेकिन सुंदरगढ़ के मतदाताओं ने हमेशा अपना सांसद राष्ट्रीय पार्टी से ही चुना है। एक समय इस सीट पर लोगों ने सर्वाधिक सात बार कांग्रेस को चुना। भाजपा के जुएल उरांव पांच बार सांसद बने। 2019 में बीजद यहां से विधानसभा चुनाव में दो विधायक जिताकर लाया, लेकिन कभी लोकसभा चुनाव नहीं जीत सका। 1996 तक मौजूदगी दर्ज कराने वाली कांग्रेस 1998, 1999 व 2004 में उरांव से हार गई। 2009 में कांग्रेस उरांव को हराकर लौटी जरूर, लेकिन 2014 व 2019 में फिर जीत उरांव को ही मिली।   

विज्ञापन

पहले कड़ी टक्कर दे चुके दिलीप 
10 साल बाद फिर भाजपा के उरांव और बीजद के दिलीप के बीच सीधा मुकाबला दिख रहा है। उरांव के पास आदिवासियों को बताने के लिए केंद्र की मोदी सरकार की उपलब्धियां हैं, जबकि दिलीप के पास दिखाने के लिए नवीन पटनायक सरकार के काम हैं।  

विज्ञापन

उरांव 2019 का चुनाव करीब दो लाख वोटों से जीते थे, लेकिन 2014 में जब उनके सामने दिलीप थे, तो जीत का अंतर 19 हजार मतों का ही था। उरांव 1998 में पहली बार जब भाजपा से सांसद चुने गए तब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने पहली बार आदिवासी मामलों का मंत्रालय गठित कर उसकी जिम्मेदारी उरांव का सौंपी थी। उरांव को मोदी सरकार में भी मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। 

विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने आदिवासियों के हितों में कई योजनाएं लागू की हैं, जबकि दिलीप ने सुंदरगढ़ में ब्लाक स्तर पर हॉकी के खिलाड़ी तैयार किए हैं, जिसके चलते युवाओं में लोकप्रिय हैं। 

पिछले दो लोकसभा चुनाव के नतीजे 

                                                  लोकसभा चुनाव 2019
उम्मीदवार  दल  मत%
जुएल उरांव  भाजपा 45.42 
सुनीता बिस्वाल  बीजद  25.16     

 

                                                  लोकसभा चुनाव 2014
उम्मीदवार  दल  मत%
जुएल उरांव  भाजपा 33.69 
दिलीप तिर्की बीजद  31.83  

अमर उजाला के साथ साक्षात्कार में भारत के पूर्व हॉकी खिलाड़ी और अब बीजद उम्मीदवार दिलीप तिर्की ने राजनीति को बड़ी चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि राजनीति में आने का मकसद आदिवासी समाज के लिए बनी योजनाओं और कानून को धरातल पर उतारना है। पढ़िए साक्षात्कार के अंश... 

खेल का मैदान आसान है या चुनाव का मैदान? 
राजनीति का मैदान टफ है, क्योंकि आपको सभी मतदाताओं का सम्मान करना है, उनको सुनना है, उनकी अपेक्षाओं को पूरा करना है। उसके लिए अलग तरह की ऊर्जा होनी चाहिए। मेरी कोशिश है कि आदिवासी समाज खासकर नई पीढ़ी के मन में जो सपने पल रहे हैं, उन्हें पूरा करूं। सिर्फ वादा नहीं करना चाहता हूं। सुंदरगढ़ में ब्लाक स्तर पर करोड़ों की लागत से हॉकी खिलाड़ी तैयार करने के लिए सिंथेटिक घास लगवाई गई है। पटनायक सरकार ने राउरकेला में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बनाया, जहां हॉकी का विश्वकप हुआ। 

10 साल बाद फिर से सुंदरगढ़ और फिर सामने हैं उरांव। क्या कहेंगे? 
2014 में मेरा पहला चुनाव था और तब मैं राजनीति को उतनी अच्छी तरह नहीं समझा था। मुझे सुंदरगढ़ के लोगों ने तीन लाख से अधिक वोट दिए थे। 10 साल बाद लौटकर मैं अपनी राज्य सरकार के कामों को गिना सकता हूं। जनता को बता सकता हूं कि इस दौरान मैंने क्या काम कराए। 

इस बार क्या गोल लेकर चुनाव लड़ रहे हैं? 
मेरी निगाहें फिलहाल चुनाव में जीत पर हैं। कोई गोल तो तय नहीं किया है, लेकिन लोकसभा के लिए चुने जाने पर आदिवासी समाज के हितों में बने कानून और योजनाओं को जमीन पर उतरवाना मेरा मकसद है। सुंदरगढ़ वाले मौका दें तो यहां के विकास की रफ्तार और तेज होगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed