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Pataliputra Ground Report: मीसा के सामने हैट्रिक लगाने को तैयार चाचा को हराने की चुनौती, कभी लालू के करीबी रहे

Fri, 31 May 2024 06:06 AM IST
दीपक कुमार शर्मा भूपेंद्र कुमार
भूपेंद्र कुमार Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Fri, 31 May 2024 06:06 AM IST
सार

2014 के लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज रामकृपाल भाजपा के खेमे में चले गए थे और उन्हें टिकट भी मिल गया। वे लालू की बेटी मीसा भारती को लगातार दो चुनावों में इस सीट से हरा चुके हैं। दिलचस्प यह कि तीसरी बार भी भाजपा से रामकृपाल और राजद से मीसा भारती आमने-सामने हैं।

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Ground Report Lok Sabha Elections 2024 Political atmosphere of Pataliputra Lok Sabha seat of Bihar
अमर उजाला ग्राउंड रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

राजनीति की बिसात पर मोहरे कब काले से सफेद हो जाएं पता ही नहीं चलता। दस साल पहले तक राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के सबसे करीबी माने जाने वाले रामकृपाल यादव ही उनकी बेटी मीसा की संसद की राह का सबसे बड़ा रोड़ा बने हुए हैं।

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2014 के लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज रामकृपाल भाजपा के खेमे में चले गए थे और उन्हें टिकट भी मिल गया। वे लालू की बेटी मीसा भारती को लगातार दो चुनावों में इस सीट से हरा चुके हैं। दिलचस्प यह कि तीसरी बार भी भाजपा से रामकृपाल और राजद से मीसा भारती आमने-सामने हैं। रामकृपाल को मीसा पहले से चाचा कहकर ही बुलातीं थीं। दोनों का चाचा-भतीजी का रिश्ता रहा है। 2008 के परिसीमन में पटना लोकसभा सीट को पटना साहिब और पाटलिपुत्र में बांट दिया गया था। यहां एक जून को सातवें चरण में मतदान है।
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पाटलि का पुत्र यानी पाटलिपुत्र
राजा पत्रक को पटना का जनक कहा जाता है। किंवदंतियों के अनुसार उन्होंने अपनी रानी पाटलि के लिए जादू से इस शहर का निर्माण किया था, उनके पुत्र के नाम पर पाटलिपुत्र नाम पड़ा। 490 ईसा पूर्व से इस शहर का ज्ञात इतिहास उपलब्ध है। इसका नाम पाटलिपत्तन भी बताया जाता है। बाद में कुसुमपुर और अजीमाबाद भी रहा। पाटलिपुत्र का अपभ्रंश ही पटना है। वहीं कुछ लोग कहते हैं पटना शब्द पत्तन यानी बंदरगाह है। गंगा में यहां से माल की ढुलाई होती थी इसी से इसे पत्तन कहा जाता था।  
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2009 का चुनाव और लालू की हार
पाटलिपुत्र सीट ने हमेशा ही चौंकाने वाले नतीजे दिए हैं। परिसीमन के बाद पहली बार हुए लोकसभा चुनाव में 2009 में राजद के लालू प्रसाद यादव को जद-यू के रंजन प्रसाद ने हरा दिया था। लालू का परिवार इस सीट पर हमेशा ही हारा है।

क्या हैं जातीय समीकरण
सबसे ज्यादा चार लाख यादव वोटर हैं। तीन लाख भूमिहार, एक लाख ब्राह्मण, पौने दो लाख कुर्मी, इतने ही कोइरी और डेढ़ लाख मुस्लिम मतदाता हैं। दोनों प्रमुख प्रत्याशी यादव होने से वोट बंट जाते हैं और भाजपा के वोट बैंक का फायदा रामकृपाल को मिलता है। फिर जद-यू के समर्थक कुर्मी-कुशवाहा मत भी मिलते हैं।

रामकृपाल यादव : पहले मजबूत...फिर कमजोर
2014 के चुनाव में मीसा भारती को हराने पर रामकृपाल यादव को केंद्र सरकार में मंत्री पद से नवाजा गया। बहरहाल धीरे-धीरे उनकी स्थिति कमजोर होती गई। 2019 में जीत का अंतर कम हुआ तो उन्हें मंत्री पद भी गंवाना पड़ा।

दरअसल पाटलिपुत्र सीट से छह विधानसभा क्षेत्र जुड़े हैं और 2020 के चुनाव में भाजपा या जद-यू को कोई सीट नहीं मिली थी। मनेर, दानापुर, मसौढ़ी से राजद, बिक्रम से कांग्रेस और फुलवारी और पालीगंज से भाकपा-माले ने जीत हासिल की थी। उनके पक्ष में यह बात जरूर है कि वे जनता के लिए उपलब्ध रहते हैं।

रामकृपाल का लंबा राजनीतिक अनुभव
पटना यूनिवर्सिटी से इतिहास में ऑनर्स रामकृपाल 1977 से राजनीति में हैं। वह विश्वविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष रहे। फिर पार्षद व उपमहापौर रहे। 1992 में एमएलए और 1993 में सांसद व 2010 में राजद से राज्यसभा के सांसद बने। 2014 में उनका लालू से सीट बंटवारे पर विवाद हुआ तो भाजपा में चले गए।

मीसा लालू की सबसे बड़ी बेटी, पेशे से चिकित्सक
राष्ट्रीय जनता दल से मीसा भारती राज्यसभा की सांसद हैं। लालू यादव की सबसे बड़ी बेटी मीसा ने पटना मेडिकल काॅलेज से एमबीबीएस किया है। वह पेशे से डाॅक्टर हैं। 1999 में उनकी शादी शैलेंद्र कुमार से हुई। उनकी दो बेटियां और एक बेटा है।

मुद्दे और मतदाता
2002 में ट्रामा सेंटर की शुरुआत की घोषणा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी, यह आज तक पूरा नहीं हो सका। लगभग दो दशक से बिहटा-औरंगाबाद रेल लाइन शुरू नहीं हो सकी है। राजधानी क्षेत्र होने के बाद भी सुविधाओं की कमी है। लोगों में इन बातों को लेकर आक्रोश है। इस सीट पर करीब 16.5 लाख मतदाता हैं।
 
दानापुर में किराने की दुकान चलाने वाले रीतलाल कहते हैं, मीसा तो इस इलाके में कभी नहीं दिखीं, हां रामकृपाल सुखदुख में हर जगह जाते हैं।

क्या कहते हैं उम्मीदवार
भाजपा प्रत्याशी रामकृपाल यादव कहते हैं कि मैं मोदी का सिपाही हूं, मेरा 40 साल का सार्वजनिक जीवन है। जो सपना राजद ने पूरा नहीं किया वो विकास पीएम मोदी ने करके दिखाया है। जो खुद बेल पर हैं, वह लोगों को जेल भेजने की बात कर रहे हैं। महागठबंधन के लोग भ्रष्टाचारी हैं।


राजद प्रत्याशी मीसा भारती का कहना है कि भाजपा प्रत्याशी ने यहां लोगों को जो सपना दिखाया, कोई पूरा नहीं हुआ। मैं जहां जा रही हूं, लोगों की भीड़ स्वागत कर रही है। मोदी सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। इलेक्टोरल बांड बड़ा भ्रष्टाचार है, हम जीते तो इसकी जांच होगी। 

पिछले दो लोकसभा चुनाव के नतीजे
                                                 लोकसभा चुनाव 2019
उम्मीदवार दल मत%
रामकृपाल यादव भाजपा 47.23
मीसा भारती राजद 43.59

                                                 लोकसभा चुनाव 2019
उम्मीदवार दल मत%
रामकृपाल यादव भाजपा 39.16
मीसा भारती राजद 35.04

 

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