कृष्णानगर ग्राउंड रिपोर्ट: रानी और महुआ के बीच प्लासी पर हो रहा युद्ध, 267 साल पुराने मैदान तक पहुंची बात
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र का चुनाव ऐतिहासिक हो गया है। हिंदुत्व की प्रचंड ज्योति की आंच 267 साल पुराने प्लासी के युद्ध के मैदान तक जा पहुंची है। कृष्णानगर में दो नामचीन महिलाओं के बीच प्लासी पर एक और युद्ध लड़ा जा रहा है। ये हैं कृष्णानगर रियासत की रानी अमृता राय और तेजतर्रार महुआ मोइत्रा।
बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और अंग्रेजी फौज के बीच साल 1757 में हुए युद्ध में नवाब की हार के बाद बरतानिया हुकूमत का पूरे हिंदुस्तान में राज करने का रास्ता साफ हो गया। सेनापति मीर जाफर ने अपने सुल्तान से गद्दारी की थी, लेकिन अब इस चुनावी समर में तब की रियासत कृष्णानगर के राजा कृष्णचंद्र राय पर अंग्रेजों का साथ देने का आरोप लगाते हुए रानी को घेरने की चाल चली जा रही है।
यों, पलटवार में रानी पीछे नहीं हैं। दो टूक कहती हैं कि हां, सिराजुद्दौला के जुल्मों से बचाव के लिए राजा ने अंग्रेजों का साथ दिया था। ऐसा न करते तो क्या आज यहां हिंदुत्व बचा रहता? क्या सनातन धर्म का कोई नामलेवा होता? हमारा पहनावा, हमारी संस्कृति...ये सब आज होता क्या? वोट बैंक की राजनीति करने वालों को दो सौ-तीन सौ साल पुराने गड़े मुर्दे उखाड़ने से कुछ हासिल नहीं होने वाला।
कृष्ण भक्त चैतन्य महाप्रभु की इस नगरी में भाजपाई मोदीभक्ति में डूबे हैं। उन्हें भरोसा है कि मोदीजी नैया पार लगा देंगे। दरअसल, यहां चुनाव भी मोदी और दीदी के नाम पर ही लड़ा जा रहा है। रानी अमृता राय को सार्वजनिक जीवन का न तो कोई अनुभव है और न ही कोई पहचान। उनसे मुकाबिल महुआ मोइत्रा को संसद में सवाल पूछने के एवज में गिफ्ट और पैसे लेने के आरोप में अपनी सदस्यता खोनी पड़ी। उनकी नेता मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे साजिश करार देते हुए फिर से इसी सीट पर महुआ को उतार दिया है और जिताने के लिए प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी है। यहां मुकाबले का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि उम्मीदवारी की घोषणा होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अमृता राय को फोन कर उनसे चुनावी हालात समझे और उन्हें चुनावी रणनीति समझाई।
पूरबा मेदिनीपुर जिले का मुख्यालय है कृष्णानगर। राजा कृष्ण चंद्र राय के नाम पर इसका नाम रखा गया है। कृष्णानगर में कई ऐतिहासिक विरासत और इमारते हैं। उनकी दीवारों पर काफी उत्कृष्ट नक्काशी है। इस संसदीय सीट पर 1967 से चुनाव हो रहे हैं। कम्युनिस्ट पार्टी के अजय मुखोपाध्याय, एथलीट ज्योतिर्मिय सिकदर, एक्टर तापस पॉल जैसे चर्चित चेहरे यहां की नुमाइंदगी कर चुके हैं। यहां की सात में से छह विधानसभा सीटों पर टीएमसी का कब्जा है, एक भाजपा के पास है।
विदेशी नौकरी छोड़ राजनीति में आईं महुआ मोइत्रा
तेजतर्रार भाषणों के अलावा महुआ निजी जीवन को लेकर भी चर्चा या विवादों में रहती हैं। 50 साल की पूर्व निवेश बैंकर ने पहली शादी डेनिस फाइनेंसर लॉर्स ब्रॉर्सन से की थी, लेकिन जल्द ही तलाक हो गया। इसके बाद उनका नाम वकील जय अनंत देहाद्राई के साथ भी जुड़ा। मूल रूप से असमी हैं। पढ़ाई अमेरिका से करने के बाद लंदन और न्यूयॉर्क में बैंकिंग इंडस्ट्री में ऊंचे ओहदे पर नौकरी की। करोड़ों का वेतन छोड़ पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीति में एंट्री मारी।
ऐन चुनाव के वक्त भाजपा में आईं रानी अमृता राय
चुनाव की घोषणा के 4 दिन बाद भाजपा में शामिल होने वाली रानी अमृता राय पार्टी का मास्टर स्ट्रोक मानी जा रही हैं। 18वीं सदी में कृष्णानगर के राजा कृष्णचंद्र राय के बंगाल के सामाजिक-आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों के जरिए तब किए गए विकास और उन्नति के काम को भाजपा अब भुनाना चाहती है। संगठन भी उन्हें ही चाहता था। राजा का बंगाली समाज में काफी सम्मान है।
महुआ को सादी से खतरा
वामपंथी सीपीएम प्रत्याशी एसएम सादी महुआ का खेल बिगाड़ सकते हैं। पिछले चुनाव में अलग-अलग लड़ने पर कांग्रेस को 38 हजार, सीपीएम को 1.20 लाख वोट मिले। महुआ 63 हजार वोटों से जीत पाईं थी। इस बार उन्हें कांग्रेस का समर्थन है। मुस्लिम बहुल प्लासीपारा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके सादी बाकी दोनों प्रत्याशियों के मुकाबले जमीनी नेता हैं और मुस्लिमों के बीच अच्छी पैठ भी है।
मतदाताओं की मिली-जुली राय
संसदीय सीट पर हिंदू-मुस्लिम फैक्टर बहुत प्रभावी नहीं है। कोलकाता जाने वाले हाईवे पर बसे भजनगढ़ मोहल्ले में चाय की दुकान पर चर्चा में शामिल सुदीप मंडल दावा करते हैं कि महुआ जीतेगी, रानी को कोई नहीं जानता। पास खड़े रशीद शेख वोट किसको, इस सवाल पर दुकान पर लगे लाल झंडे की ओर इशारा कर देते है। लोगों की शिकायत है कि महुआ हों या रानी, दोनों यहां कम ही रहती हैं। ज्यादातर कोलकाता में ही दिखती हैं।निजी बैंक में कार्यरत सुकृति बोस कहती हैं, रानी से क्या लेना देना, वोट तो मोदी को देना है। सब्जी बाजार में मिले गुरुदेव गांगुली कहते हैं कि मोदी देश का गरब (गर्व) है, अमी मोदी को चाहे। दुकानदार रूपकुमार का कहना है कि दोनों का फिफ्टी-फिफ्टी चांस है। दीदी की महिलाओं को पैसा देने वाली योजना का जादू चलता है। शिबॉय नंदी कहते हैं महुआ ने विकास में पक्षपात किया।
पिछले दो लोकसभा चुनावों का हाल
| लोकसभा चुनाव 2019 | ||
| उम्मीदवार | दल | मत% |
| महुआ मोइत्रा | तृणमूल | 44.99 |
| कल्याण चौबे | भाजपा | 40.37 |
| लोकसभा चुनाव 2019 | ||
| उम्मीदवार | दल | मत% |
| तापस पॉल | तृणमूल | 35.14 |
| शांतनु झा | सीपीएम | 29.43 |
| सत्यब्रत मुखर्जी | भाजपा | 26.38 |