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असम: अहोम विरासत के गढ़ में दो गोगोई की सियासी जंग, मुश्किल में फंसी कांग्रेस; पढ़ें अमर उजाला की रिपोर्ट
Mon, 15 Apr 2024 04:36 AM IST
यशोधन शर्मा
डॉ. इन्दुशेखर पंचोली, अमर उजाला, जोरहाट
डॉ. इन्दुशेखर पंचोली, अमर उजाला, जोरहाट
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Mon, 15 Apr 2024 04:36 AM IST
सार
दिग्गज कांग्रेसी हितेश्वर सैकिया एवं तरुण गोगोई इसी इलाके से जुड़े थे। दोनों क्रमश: दो बार एवं तीन बार मुख्यमंत्री रहे। कांग्रेसी उम्मीदवार गौरव के पिता तरुण गोगोई यहीं से दो बार सांसद भी रहे।
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गौरव गोगोई और तपन गोगोई
- फोटो : ANI/एक्स@ToponKumarGogo1
विस्तार
असम में कभी कांग्रेस का गढ़ रही जोरहाट संसदीय सीट पर भाजपा के मौजूदा सांसद तपन गोगोई का सीधा मुकाबला लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई से है। दोनों अहोम नेता और मौजूदा सांसदों की इस सियासी जंग पर दिल्ली तक की निगाहें हैं। राज्य की सांस्कृतिक राजधानी माना जाने वाला यह इलाका अहोम राजवंश की समृद्ध विरासत को संजोये हुए है। इकलौता राजवंश, जो कभी मुगलों के अधीन नहीं रहा और सत्रह बार युद्ध में उन्हें हराया।
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दिग्गज कांग्रेसी हितेश्वर सैकिया एवं तरुण गोगोई इसी इलाके से जुड़े थे। दोनों क्रमश: दो बार एवं तीन बार मुख्यमंत्री रहे। कांग्रेसी उम्मीदवार गौरव के पिता तरुण गोगोई यहीं से दो बार सांसद भी रहे। पहले आम चुनाव के बाद तीन बार को छोड़कर 2009 तक कांग्रेस इस सीट पर काबिज रही। विजॉय कृष्ण हांडिक सबसे लंबे अरसे 1991 से 2014 तक पांच बार सांसद रहे। लेकिन, 2014 से इलाके की धारा बदली और भाजपा के कामाख्या प्रसाद ताशा ने हांडिक को पराजित किया। हालांकि 2009 में भी हांडिक-ताशा ही आमने-सामने थे और हांडिक जीते थे। 2019 में भाजपा के तपन कुमार गोगोई ने जीत दर्ज की और दूसरी पारी के लिए अब फिर मैदान में हैं। उनसे मुकाबिल गौरव को अपनी ही पार्टी के पुराने दुर्ग में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। रोचक तथ्य यह भी है कि विगत चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार रहे सुशांत बोरगोहेन अब भाजपा में हैं।
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कलियाबोर सीट खत्म होने से गड़बड़ाया गणित
गोगोई परिवार की पंरपरागत सीट कलियाबोर पुनर्गठन में खत्म हो गई। इसकी जगह पुनर्गठित काजीरंगा सीट कांग्रेस के लिए मुफीद नहीं है। कलियाबोर से दिवंगत तरुण गोगोई (91,98,99) तीन बार, उनके भाई दीप गोगोई (2002,04,09) तीन बार और बेटे गौरव गोगोई (2014,19) दो बार चुनाव जीते थे। मजबूरी में गौरव को जोरहाट जाना पड़ा और मतदान की तारीख 19 अप्रैल तक वहां से निकलना भी संभव नहीं है। वह खुद कहते हैं, अर्जुन को जिस तरह चिड़िया की आंख दिख रही थी, वैसे ही अपनी ही सीट पर फोकस है।
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भाजपा नेता तपन गोगोई ने कहा कि जोरहाट ही नहीं, पूरे असम में सीएए कोई मुद्दा ही नहीं है। हमारी डबल इंजन की सरकार के काम और प्रधानमंत्री मोदी की गारंटी के साथ मैदान में हैं। इस बार दो लाख से ज्यादा वोटों से जीतेंगे।
शांत तपन...तेवर वाले गौरव
भाजपा के तपन गोगोई अपेक्षाकृत शांत हैं। असम में छात्र राजनीति से मुख्य धारा में आए हैं। जोरहाट के मतदाता शिक्षक रहे बैजयंत बरुआ बताते हैं, ऑल असम स्टूडेंट यूनियन (आसू) के हर नेता के साथ एक अवधि बाद एंटी-इनकम्बेंसी स्वभावगत जुड़ जाती है, वह तपन के साथ भी है। वहीं, संसद के अंदर और बाहर गौरव के जैसे तेवर रहे, कांग्रेस ने उन्हें जो अहमियत दी, उससे उनकी छवि राज्य में बदली है। युवाओं में लोकप्रियता बड़ी है। तरुण गोगोई के बेटे होने का भी लाभ है,
प्रचार के दौरान सेल्फी विद गौरव अभियान में यह दिखता है। वह कहते हैं, जितने लोगों ने मेरे साथ सेल्फी ली है, वह वोट में बदलती है, तो मेरी जीत तय है। हालांकि, जोरहाट के चौक बाजार में बातचीत के दौरान युवा बदलते असम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को अपनी पसंद बताते हैं। दीपक महंत सवाल करते हैं, हमें ऐसा नेता नहीं चाहिए, जो सिर्फ प्रधानमंत्री को गाली देते हैं।
जोरहाट: पिछले दो चुनावों के हाल
2019
उम्मीदवार दल मत मत%
तपन गोगोई भाजपा 5.43 लाख 51.31
सुशांत बोरगोहेन कांग्रेस 4.60 लाख 43.50
2014
उम्मीदवार दल मत मत%
कामाख्या प्रसाद भाजपा 4.56 लाख 48.9
बिजॉय कृष्ण कांग्रेस 3.54 लाख 38.0
फिर भी इसीलिए फंसे हैं
गौरव के यहां फंसने का बड़ा कारण उनके पास इलाके के लिए कोई बड़ा काम बताने के लिए नहीं है। तपन राज्य के बिजली मंत्री रहे हैं। उस दौरान 24 लाख बिजली कनेक्शन देने का श्रेय उनके खाते में है। माजुली गांव में कुछ ग्रामीणों ने बातचीत में इसका जिक्र किया। वहीं, संसद में कम सक्रियता के आरोप को नकारते हुए तपन कहते हैं, दलीय अनुशासन में रहना होता है।
तपन की सबसे बड़ी ताकत पीएम मोदी की गारंटी के साथ सीएम हिमंत का अपने साथ कांग्रेस में हुए अन्याय का राजनीतिक प्रतिशोध लेने का अवसर है। चौतांग गांव की चौपाल पर बैठे बीजू गोहेन कहते हैं, मामा का खेल है। कलियाबोर ऐसे ही थोड़े गायब हो गई? लगता भी है। हिमंत ने पूरी ताकत झोंक रखी है। अपना हिसाब-किताब बराबर तो होगा ही, दिल्ली की शाबासी भी मिलेगी।
अमर उजाला से कहा-भाजपा ने मेरी पारंपरिक सीट खत्म करवा दी
आपकी चुनावी तैयारी कैसी चल रही है?
हमारी तैयारी पूरी है, बस हमें 19 तारीख का इंतजार है कि कब लोग आएं और हमें भरपूर बहुमत से जिताएं।
ये सेल्फी वाली स्कीम क्या है?
वो एक हिन्दी गाना था...सेल्फी वाला लव...,वही हमें महसूस हो रहा है। लोग कहते हैं कि हमें देखने आए हैं, छूने आए हैं। युवा हों, महिलाएं हों, या बुजुर्ग हों। सभी से एक रिश्ता सा बन गया है। हमारे लिए यही राजनीति का आदर्श है कि हमें एक रिश्ता बनाना चाहिए। सभी के साथ दोस्ती का, भाई का और बेटे का रिश्ता बन रहा है। मुझे लगता है कि आने वाले समय में यही हमें जिताने का जरिया बनेगा।
पिताजी के बिना पहला चुनाव है, लोगों की प्रतिक्रिया कैसी है?
मेरे पिताजी ने सीएम की कुर्सी 2016 में छोड़ी। आज 2024 में भी जहां हम जाते हैं, लोग उनके काम को याद करते हैं। खासकर बुजुर्ग लोग। उन्होंने वह दौर देखा है, जब यहां अशांति थी, वित्तीय कठिनाई भी थी। बुजुर्गों में उनके प्रति अपार श्रद्धा है और इन लोगों का आशीर्वाद हमें मिल रहा है। युवाओं में हमने देखा, जो आज भी आकर बताते हैं कि जबसे हमने स्कूल जाना शुरू किया, तबसे पढ़ रहे हैं कि असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बारे में। समाज के हर वर्ग में पिताजी के प्रति बहुत सम्मान है।
कौन से मुद्दे लेकर आप मैदान में हैं?
जोरहाट लोकसभा में कुछ स्थानीय और कुछ राज्य के मुद्दे हैं, जो हर क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। सबसे बड़ा मुद्दा कनेक्टिविटी का है। यहां पर तो हमारे परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी फेल हो गए। वह कई बार जोरहाट आए, लेकिन जोरहाट और शिवसागर के बीच के महत्वपूर्ण हिस्से को अब तक ठीक नहीं कर पाए। अगर जोरहाट से ट्रेन भी लेना चाहते हैं, तो रात के डेढ़ बजे पकड़ना होगा। आसानी से फ्लाइट भी नहीं मिलेगी। सरकारी और प्राइवेट काॅलेजों में सुविधाएं नहीं हैं। युवा अपनी आर्थिक कमजोरी के कारण पूरी क्षमता नहीं दिखा पा रहे। तीसरा मुद्दा स्वास्थ्य का है। अगर किसी को इमरजेंसी पड़ जाए, तो चिकित्सा नहीं मिलेगी। भाजपा के सांसद को पैर का इलाज कराने दिल्ली जाना पड़ा था।
आपको अपनी लोकसभा सीट क्यों बदलनी पड़ी?
इससे पहले मेरी सीट वह थी, जो कांग्रेस का शक्तिशाली केंद्र था। जहां 1990 से हमारे पिता और परिवार कांग्रेस के लिए जीतते आ रहे थे। जब मोदीजी और अमित शाह को यह लगा कि 2024 में भी यह सीट कांग्रेस के पास चली जाएगी, तो बड़ी चतुराई से निर्वाचन अयोग के द्वारा पुरानी सीट को समाप्त करवा दिया गया। तब हमने पार्टी पर फैसला छोड़ दिया। जहां से वह लड़ाना चाहे। 2014 तक जोरहाट कांग्रेस का शक्तिशाली केंद्र था, उसके बाद हमारी पार्टी यहां कमजोर हुई है। मेरे कंधों पर कठिन जिम्मेदारी है, जिसमें कांग्रेस को जोरहाट और ऊपरी असम में शक्तिशाली करना है।
Quotation
आपकी सीट के अलावा कांग्रेस कहीं भी ताकत से लड़ती नहीं दिख रही है?
इससे सहमत नहीं हूं। मुझे लगता है कि हम बहुत ताकत से लड़ रहे हैं। कुछ महीने पहले राहुल गांधी ने मणिपुर से ही यात्रा शुरू की थी। आज भी आप जाएं, तो देखेंगे कि वहां एक असांविधानिक वातावरण दिख रहा है। सरकार बिखर चुकी है, बंदूकों को बाजार में बेचा जा रहा है।
असम में कुकी समुदाय के बच्चे आज भी हैं। वे अपने घर नहीं जा सकते, उनका घर जल गया है। अपनी माताओं को नहीं मिल सकते, उन्हें पता भी नहीं कहां हैं।
ऐसे वातावरण में हमने उत्तर पूर्व की ओर, जो हमारा कर्तव्य है, उसे निभाया। इसका फल निश्चित ही हमें मिलेगा।